भूल जाइए सोना-चांदी, टक्कर में आया अब यह मेटल; इस साल अब तक 70 परसेंट बढ़ी कीमत

Platinum Price Surge: सोने और चांदी की कीमतें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं. फेस्टिव सीजन से पहले सोने की बढ़ती कीमतों ने लोगों को परेशान कर दिया है और यह धीरे-धीरे आम आदमी की पहुंच से बाहर जा रहा है. इस बीच, सोने-चांदी को टक्कर देने की रेस में प्लैटिनम भी शामिल हो चुका है. इसकी भी कीमत लगातार बढ़ती ही जा रही है. कीमतों में लगभग 70 परसेंट का उछाल इस साल प्लैटिनम की कीमतों में लगभग 70 परसेंट का उछाल आया है. वहीं, इसके मुकाबले सोने ने 51 परसेंट और चांदी ने 58 परसेंट की बढ़त हासिल की है. हालांकि, ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि भले ही प्लैटिनम की कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन फिर भी यह मई, 2008 के अपने हाई लेवल 2250 डॉलर प्रति औंस से 28 परसेंट नीचे है. साल 2023 और 2024 में प्लैटिनम की कीमतों में हर साल 8 परसेंट तक की गिरावट दर्ज की गई. जबकि, 2022 में इसमें 10 परसेंट का मामूली उछाल आया.  क्यों बढ़ रही कीमत?  प्लैटिनम की कीमतों में यह उछाल सप्लाई में कमी और डिमांड में आई तेजी की वजह से आया है. ज्वैलरी बनाने के साथ-साथ इसका इस्तेमाल ऑटो सेक्टर, पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री और हाइड्रोजन एनर्जी जैसी इंडस्ट्रीज में भी किया जाता है. यही वजह है कि इसका वायदा भाव और डिमांड दोनों में तेजी देखने को मिल रही है. पाइनट्री मैक्रो के फाउंडर रितेश जैन ने मनी कंट्रोल को बताया, प्लैटिनम अब सोने की बराबरी कर रहा है. कुछ समय पहले तक तो प्लैटिनम सोने से भी ज्यादा महंगा था. अब सोना, प्लैटिनम से लगभग तीन गुना महंगा है. लोग गहनों में सोने की जगह प्लैटिनम का इस्तेमाल कर रहे हैं. साथ ही, खदानों से प्लैटिनम की आपूर्ति नहीं बढ़ रही है, जिससे इसकी कमी हो रही है.  अभी और बढ़ सकती हैं कीमतें  वर्ल्ड प्लैटिनम इंवेस्टमेंट काउंसिल के मुताबिक, प्लैटिनम से जुड़ा बाजार लगातार घाटे में है. 2025 में इसमें 8,50,000 औंस की गिरावट आ सकती है. सप्लाई में कमी का यह लगातार तीसरा साल है, जिससे बाजार तनाव में है. सप्लाई के लिहाज से डिमांड बढ़ रही है. इसका 70 परसेंट से अधिक इस्तेमाल ग्रीन टेक्नोलॉजी या व्हीकल्स में कैटेलिटिक कन्वर्टर्स में होता है. चॉइस ब्रोकिंग की कमोडिटी रिसर्च एनालिस्ट कविता मोरे के हवाले से मनी कंट्रोल ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि  2025 और उसके बाद भी प्लैटिनम की मांग मजबूत बनी रहेगी. हर साल 5,00,000 से 8,50,000 औंस की सप्लाई की कमी का अनुमान है. आपको बता दें कि दुनिया में सबसे अधिक प्लैटिनम दक्षिण अफ्रीका के खदानों में पाए जाते हैं, लेकिन खराब मौसम, तकनीकी समस्याएं और सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतों की वजह से खदानों में प्रोडक्शन में भारी गिरावट आई है.  ये भी पढ़ें:  क्या रखे-रखे सोना भी हो जाता है खराब? क्या गहनों पर जंग लगने का भी है डर?  

Oct 8, 2025 - 10:30
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भूल जाइए सोना-चांदी, टक्कर में आया अब यह मेटल; इस साल अब तक 70 परसेंट बढ़ी कीमत

Platinum Price Surge: सोने और चांदी की कीमतें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं. फेस्टिव सीजन से पहले सोने की बढ़ती कीमतों ने लोगों को परेशान कर दिया है और यह धीरे-धीरे आम आदमी की पहुंच से बाहर जा रहा है. इस बीच, सोने-चांदी को टक्कर देने की रेस में प्लैटिनम भी शामिल हो चुका है. इसकी भी कीमत लगातार बढ़ती ही जा रही है.

कीमतों में लगभग 70 परसेंट का उछाल

इस साल प्लैटिनम की कीमतों में लगभग 70 परसेंट का उछाल आया है. वहीं, इसके मुकाबले सोने ने 51 परसेंट और चांदी ने 58 परसेंट की बढ़त हासिल की है. हालांकि, ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि भले ही प्लैटिनम की कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन फिर भी यह मई, 2008 के अपने हाई लेवल 2250 डॉलर प्रति औंस से 28 परसेंट नीचे है. साल 2023 और 2024 में प्लैटिनम की कीमतों में हर साल 8 परसेंट तक की गिरावट दर्ज की गई. जबकि, 2022 में इसमें 10 परसेंट का मामूली उछाल आया. 

क्यों बढ़ रही कीमत? 

प्लैटिनम की कीमतों में यह उछाल सप्लाई में कमी और डिमांड में आई तेजी की वजह से आया है. ज्वैलरी बनाने के साथ-साथ इसका इस्तेमाल ऑटो सेक्टर, पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री और हाइड्रोजन एनर्जी जैसी इंडस्ट्रीज में भी किया जाता है. यही वजह है कि इसका वायदा भाव और डिमांड दोनों में तेजी देखने को मिल रही है.

पाइनट्री मैक्रो के फाउंडर रितेश जैन ने मनी कंट्रोल को बताया, प्लैटिनम अब सोने की बराबरी कर रहा है. कुछ समय पहले तक तो प्लैटिनम सोने से भी ज्यादा महंगा था. अब सोना, प्लैटिनम से लगभग तीन गुना महंगा है. लोग गहनों में सोने की जगह प्लैटिनम का इस्तेमाल कर रहे हैं. साथ ही, खदानों से प्लैटिनम की आपूर्ति नहीं बढ़ रही है, जिससे इसकी कमी हो रही है. 

अभी और बढ़ सकती हैं कीमतें 

वर्ल्ड प्लैटिनम इंवेस्टमेंट काउंसिल के मुताबिक, प्लैटिनम से जुड़ा बाजार लगातार घाटे में है. 2025 में इसमें 8,50,000 औंस की गिरावट आ सकती है. सप्लाई में कमी का यह लगातार तीसरा साल है, जिससे बाजार तनाव में है. सप्लाई के लिहाज से डिमांड बढ़ रही है. इसका 70 परसेंट से अधिक इस्तेमाल ग्रीन टेक्नोलॉजी या व्हीकल्स में कैटेलिटिक कन्वर्टर्स में होता है.

चॉइस ब्रोकिंग की कमोडिटी रिसर्च एनालिस्ट कविता मोरे के हवाले से मनी कंट्रोल ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि  2025 और उसके बाद भी प्लैटिनम की मांग मजबूत बनी रहेगी. हर साल 5,00,000 से 8,50,000 औंस की सप्लाई की कमी का अनुमान है. आपको बता दें कि दुनिया में सबसे अधिक प्लैटिनम दक्षिण अफ्रीका के खदानों में पाए जाते हैं, लेकिन खराब मौसम, तकनीकी समस्याएं और सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतों की वजह से खदानों में प्रोडक्शन में भारी गिरावट आई है. 

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क्या रखे-रखे सोना भी हो जाता है खराब? क्या गहनों पर जंग लगने का भी है डर?  

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