'मैंने कहा शूट...', रि. एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने सुनाई ऑपरेशन सिंदूर की कहानी
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के संचालन और प्रबंधन को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए भारतीय वायु सेना के रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को नया सीईओ नियुक्त किया है. इस पद के लिए लंबे समय से चयन प्रक्रिया चल रही थी, जिस पर अब अंतिम मुहर लग गई है. जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायु सेना के वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों में गिने जाते हैं. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर तैनात थे. स्वतंत्रता दिवस 2025 पर उन्हें 'ऑपरेशन सिंदूर' में उनकी भूमिका के लिए सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था. न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि कैसे भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में तबाही मचाई थी. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने एस-400 डिफेंस सिस्टम तोड़ निकालने के लिए अपने जासूस भेजे थे. इस ऑपरेशन की तैयारी को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, 'पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकी हमला हुआ था. शाम करीब 9 बजे तक मैंने एयरफोर्स चीफ को बता दिया था कि अगर सरकार सैन्य कार्रवाई का फैसला लेती है तो हम अपनी प्लानिंग के साथ तैयार हैं.' S-400 की लोकेशन जानना चाहता था पाकिस्तान इस दौरान उन्होंने एस-400 को लेकर पाकिस्तान की नियत का खुलासा किया. रि. एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने बताया कि पाकिस्तान ने हमारे देश के भीतर जासूस तैनात किए थे और S-400 की लोकेशन का पता करने के लिए स्लीपर सेल एक्टिव किए थे. S-400 ने पाकिस्तानी सेना की ओर दागे गए मिसाइल को कुछ ही देर में हवा में नष्ट कर दिया था. ऑपरेशन के दौरान इससे जुड़ी घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा, 'मेरे S-400 के ऑपरेटर ने मुझसे पूछा शूट? मैंने कहा शूट.' जितेंद्र मिश्रा ने सुनाई ऑपरेशन सिंदूर की कहानी उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद ने S-400 सिस्टम का पता लगाने के लिए हर संभव हथकंडा अपनाया. उन्होंने बताया, 'पाकिस्तान एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम को अपना सबसे बड़ा खतरा मानता है, क्योंकि इसने पाकिस्तान के कई विमान और ड्रोन्स को इंटरसेप्ट किया है. S-400 की लोकेशन ट्रैक करने के लिए पाकिस्तान ने किसी दूसरे देश की सैटेलाइट और इलेक्ट्रॉनिक तकनीक की मदद ली थी. पाकिस्तान को लगा कि S-400 आदमपुर एयर फोर्स स्टेशन पर तैनात है, इसी वजह से उसने इस एयरबेस को सबसे ज्यादा निशाना बनाया.' इससे पहले जितेंद्र मिश्रा को 2024 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2013 में विशिष्ट सेवा मेडल भी मिल चुका है. कारगिल युद्ध के दौरान जितेंद्र मिश्रा ने मिराज-2000 विमानों पर लेजर-गाइडेड बमों को संचालन में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. बाद में इन बमों का इस्तेमाल 'ऑपरेशन सफेद सागर' के तहत टाइगर हिल और मुंथो ढालो जैसे रणनीतिक ठिकानों पर हमलों में किया गया. वह 30 अप्रैल 2026 को भारतीय वायु सेना से रिटायर हुए.
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के संचालन और प्रबंधन को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए भारतीय वायु सेना के रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को नया सीईओ नियुक्त किया है. इस पद के लिए लंबे समय से चयन प्रक्रिया चल रही थी, जिस पर अब अंतिम मुहर लग गई है. जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायु सेना के वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों में गिने जाते हैं. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर तैनात थे. स्वतंत्रता दिवस 2025 पर उन्हें 'ऑपरेशन सिंदूर' में उनकी भूमिका के लिए सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था.
न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि कैसे भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में तबाही मचाई थी. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने एस-400 डिफेंस सिस्टम तोड़ निकालने के लिए अपने जासूस भेजे थे. इस ऑपरेशन की तैयारी को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, 'पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकी हमला हुआ था. शाम करीब 9 बजे तक मैंने एयरफोर्स चीफ को बता दिया था कि अगर सरकार सैन्य कार्रवाई का फैसला लेती है तो हम अपनी प्लानिंग के साथ तैयार हैं.'
S-400 की लोकेशन जानना चाहता था पाकिस्तान
इस दौरान उन्होंने एस-400 को लेकर पाकिस्तान की नियत का खुलासा किया. रि. एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने बताया कि पाकिस्तान ने हमारे देश के भीतर जासूस तैनात किए थे और S-400 की लोकेशन का पता करने के लिए स्लीपर सेल एक्टिव किए थे. S-400 ने पाकिस्तानी सेना की ओर दागे गए मिसाइल को कुछ ही देर में हवा में नष्ट कर दिया था. ऑपरेशन के दौरान इससे जुड़ी घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा, 'मेरे S-400 के ऑपरेटर ने मुझसे पूछा शूट? मैंने कहा शूट.'
जितेंद्र मिश्रा ने सुनाई ऑपरेशन सिंदूर की कहानी
उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद ने S-400 सिस्टम का पता लगाने के लिए हर संभव हथकंडा अपनाया. उन्होंने बताया, 'पाकिस्तान एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम को अपना सबसे बड़ा खतरा मानता है, क्योंकि इसने पाकिस्तान के कई विमान और ड्रोन्स को इंटरसेप्ट किया है. S-400 की लोकेशन ट्रैक करने के लिए पाकिस्तान ने किसी दूसरे देश की सैटेलाइट और इलेक्ट्रॉनिक तकनीक की मदद ली थी. पाकिस्तान को लगा कि S-400 आदमपुर एयर फोर्स स्टेशन पर तैनात है, इसी वजह से उसने इस एयरबेस को सबसे ज्यादा निशाना बनाया.'
इससे पहले जितेंद्र मिश्रा को 2024 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2013 में विशिष्ट सेवा मेडल भी मिल चुका है. कारगिल युद्ध के दौरान जितेंद्र मिश्रा ने मिराज-2000 विमानों पर लेजर-गाइडेड बमों को संचालन में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. बाद में इन बमों का इस्तेमाल 'ऑपरेशन सफेद सागर' के तहत टाइगर हिल और मुंथो ढालो जैसे रणनीतिक ठिकानों पर हमलों में किया गया. वह 30 अप्रैल 2026 को भारतीय वायु सेना से रिटायर हुए.
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