यूएस-ईरान वॉर के इफैक्ट्स पर मुख्य आर्थिक सलाहकार का बड़ा बयान, जानें देश की इकोनॉमी पर क्या कहा

Domestic Market Demand Holds Indian Economy: मिडिल ईस्ट के युद्ध को लेकर भारत की आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. आनंत नागेश्वरन ने कहा है कि मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरु होने के बाद दो महीने गुजर गए हैं. ऐसे में जो आंकड़े सामने आए हैं, उससे पता चलता है कि सबसे बुरा दौर गुजर चुका है. भारत सुरक्षित स्थिति में है. देश वैश्विक उथल-पुथल का आत्मविश्वास के साथ सामना कर रहा है.  NDTV के मुताबिक, उन्होंने बताया कि दो बातें दिखाती हैं. पहली भारत को चिंता करने की जरूरत क्यों नहीं है. इसकी वजह है, भारत में घरेलू मांगे अच्छी बनी हुई है. नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ के 12 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है.  नागेश्वरन ने कहा है कि मुझे लगता है कि अभी शुरुआती दिन हैं. हमारे पास कॉर्पोरेट टैक्स रेवेन्यू या पर्सनल कंजप्शन, पर्सनल टैक्सेशन के बारे में बात करने के लिए मौजूदा एक महीने का डेटा है. यह उत्साहजनक है.  मुख्य आर्थिक सलाहकर  ने कहा कि हाई फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स से पता चला है कि Domestic Demand अच्छी बनी हुई है. इसका मतलब है, कंपनियों के लिए बेहतर रेवेन्यू होगा. इसके अलावा उन्होंने कहा कि फाइनेंशियल ईयर की चौथी तिमाही यानी फोर्थ क्वाटर में भारती कंपनियों की मुनाफेदारी में सुधार हुआ था.  नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 12 प्रतिशत होने की संभावना: मुख्य आर्थिक सलाहकार इसके अलावा उन्होंने बताया कि दूसरी अच्छी खबर यह कि नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 12 प्रतिशत होने की संभावना है. यह अनुमान से ज्यादा होना है. इसका मतलब है कि हमारे अनुमान से बेहतर रेवेन्यू मिलेगा. उन्होंने रेवेन्यू के प्रति उदासीन न होने की नसीहत दी है. इसके अलावा उन्होंने पड़ोसी देशों की आर्थिक स्थिति पर कहा है कि वहां घरेलू आर्थिक सुस्ती सबसे बड़ी वजह है. इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इससे तेल की कीमतें भी कम हो रही हैं, एक्सपोर्ट के लिए यूरिया बाजार भी खुल रहा है. ऐसे में यह दोनों बातें, भारत की अर्थव्यवस्था और हमारी बाहरी स्थिति के लिए काफी मददगार साबित हो रही है.  Explained: मस्क के एक ट्रिलियन डॉलर, गिनेंगे तो लगेंगे 31,700 साल, 60 साल तक दुनिया खाएगी भरपेट खाना, भारतीयों को मिलेंगे 60000 मुख्य आर्थिक सलाहकार ने बताया कि आज ईरान और अमेरिका के बीच शांति की उम्मीदें तब बढ़ गईं, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इस हफ्ते के अंत तक कोई डील साइन हो सकती है. तेहरान ने कहा है कि समझौते पर आखिरी फैसला नहीं लिया है. ऐसे में डील अगर फाइनल हो जाती है, तो एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी होगी. इस युद्ध में हजारों लोग मारे गए हैं. अगर युद्ध जारी रहा तो....आर्थिक सलाहकार ने कहा है कि अगर तेल का उत्पादन बंद रहता है, और अमेरिका तय करता है कि उसका रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व उस लेवल पर आ गया है, जहां उसे फिर से भरने की जरूरत है. अगर फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही में तेल की कीमत 100 डॉलर के ऊपर चली जाती है, तो जीडीपी के 6 प्रतिशत रहने की संभावना है. Petrol-Diesel News: पेट्रोल-डीजल के नए नियमों से आपको है कोई खतरा? जानिए कार-बाइक वालों के लिए क्या बदला

Jun 12, 2026 - 23:30
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यूएस-ईरान वॉर के इफैक्ट्स पर मुख्य आर्थिक सलाहकार का बड़ा बयान, जानें देश की इकोनॉमी पर क्या कहा

Domestic Market Demand Holds Indian Economy: मिडिल ईस्ट के युद्ध को लेकर भारत की आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. आनंत नागेश्वरन ने कहा है कि मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरु होने के बाद दो महीने गुजर गए हैं. ऐसे में जो आंकड़े सामने आए हैं, उससे पता चलता है कि सबसे बुरा दौर गुजर चुका है. भारत सुरक्षित स्थिति में है. देश वैश्विक उथल-पुथल का आत्मविश्वास के साथ सामना कर रहा है. 

NDTV के मुताबिक, उन्होंने बताया कि दो बातें दिखाती हैं. पहली भारत को चिंता करने की जरूरत क्यों नहीं है. इसकी वजह है, भारत में घरेलू मांगे अच्छी बनी हुई है. नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ के 12 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है. 

नागेश्वरन ने कहा है कि मुझे लगता है कि अभी शुरुआती दिन हैं. हमारे पास कॉर्पोरेट टैक्स रेवेन्यू या पर्सनल कंजप्शन, पर्सनल टैक्सेशन के बारे में बात करने के लिए मौजूदा एक महीने का डेटा है. यह उत्साहजनक है. 

मुख्य आर्थिक सलाहकर  ने कहा कि हाई फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स से पता चला है कि Domestic Demand अच्छी बनी हुई है. इसका मतलब है, कंपनियों के लिए बेहतर रेवेन्यू होगा. इसके अलावा उन्होंने कहा कि फाइनेंशियल ईयर की चौथी तिमाही यानी फोर्थ क्वाटर में भारती कंपनियों की मुनाफेदारी में सुधार हुआ था. 

नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 12 प्रतिशत होने की संभावना: मुख्य आर्थिक सलाहकार

इसके अलावा उन्होंने बताया कि दूसरी अच्छी खबर यह कि नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 12 प्रतिशत होने की संभावना है. यह अनुमान से ज्यादा होना है. इसका मतलब है कि हमारे अनुमान से बेहतर रेवेन्यू मिलेगा. उन्होंने रेवेन्यू के प्रति उदासीन न होने की नसीहत दी है. इसके अलावा उन्होंने पड़ोसी देशों की आर्थिक स्थिति पर कहा है कि वहां घरेलू आर्थिक सुस्ती सबसे बड़ी वजह है. इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इससे तेल की कीमतें भी कम हो रही हैं, एक्सपोर्ट के लिए यूरिया बाजार भी खुल रहा है. ऐसे में यह दोनों बातें, भारत की अर्थव्यवस्था और हमारी बाहरी स्थिति के लिए काफी मददगार साबित हो रही है. 

Explained: मस्क के एक ट्रिलियन डॉलर, गिनेंगे तो लगेंगे 31,700 साल, 60 साल तक दुनिया खाएगी भरपेट खाना, भारतीयों को मिलेंगे 60000

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने बताया कि आज ईरान और अमेरिका के बीच शांति की उम्मीदें तब बढ़ गईं, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इस हफ्ते के अंत तक कोई डील साइन हो सकती है. तेहरान ने कहा है कि समझौते पर आखिरी फैसला नहीं लिया है. ऐसे में डील अगर फाइनल हो जाती है, तो एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी होगी. इस युद्ध में हजारों लोग मारे गए हैं.

अगर युद्ध जारी रहा तो....
आर्थिक सलाहकार ने कहा है कि अगर तेल का उत्पादन बंद रहता है, और अमेरिका तय करता है कि उसका रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व उस लेवल पर आ गया है, जहां उसे फिर से भरने की जरूरत है. अगर फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही में तेल की कीमत 100 डॉलर के ऊपर चली जाती है, तो जीडीपी के 6 प्रतिशत रहने की संभावना है.

Petrol-Diesel News: पेट्रोल-डीजल के नए नियमों से आपको है कोई खतरा? जानिए कार-बाइक वालों के लिए क्या बदला

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