'आजकल लड़के-लड़कियां नाच-गाने करके...’, सोशल मीडिया पर रील बनाने को लेकर क्या बोले कारी इसहाक गोरा?

जमीयत दावतुल मुस्लिमीन के संरक्षक और प्रसिद्ध देवबंदी उलेमा मौलाना कारी इसहाक गोरा ने समाज, खासकर युवाओं में नाच-गाने और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने इस संबंध में एक वीडियो संदेश जारी कर युवाओं से आत्ममंथन करने और सही दिशा में आगे बढ़ने की अपील की है. अपने संदेश में मौलाना कारी इसहाक गोरा ने कहा कि पहले के समय में नाच-गाने को समाज में गलत और शर्म की बात माना जाता था, लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल गए हैं. अब वही चीजें सोशल मीडिया पर मशहूर होने, लाइक और फॉलोअर्स बढ़ाने का जरिया बन गई हैं. उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि समय से ज्यादा हमारी सोच बदल गई है और यही बदलाव समाज के लिए खतरे की घंटी है. समाज की पहचान अच्छे संस्कार से होती हैः इसहाक मौलाना ने कहा कि आज बड़ी संख्या में युवक और युवतियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर नाच-गाने के वीडियो बना रहे हैं. कई बार मजहब और दीन से जुड़ी बातों को भी मजाक के तौर पर पेश किया जाता है. लोग इसे मनोरंजन समझकर देखते हैं और बिना सोचे-समझे साझा भी करते हैं. मौलाना ने कहा कि जब पवित्र बातों का मजाक बनने लगे, तो यह समाज की सोच के गिरने का संकेत है. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल बुरा नहीं है, लेकिन इसका गलत उपयोग समाज को नुकसान पहुंचा रहा है. आज का युवा थोड़ी-सी प्रसिद्धि के लिए अपनी मर्यादा और संस्कार भूलता जा रहा है. मौलाना ने युवाओं से अपील की कि वे कुछ पल की शोहरत के बजाय अपने चरित्र, शिक्षा और अच्छे आचरण को महत्व दें. उन्होंने कहा कि किसी भी समाज या कौम की पहचान उसके अच्छे व्यवहार, संस्कार और जिम्मेदारी से होती है, न कि वायरल वीडियो से. परिवार, शिक्षक और समाज के लोग नई पीढ़ी को रास्ता दिखाएः इसहाक मौलाना कारी इसहाक गोरा ने यह भी कहा कि माता-पिता, शिक्षक और समाज के जिम्मेदार लोगों को चाहिए कि वे नई पीढ़ी को सही रास्ता दिखाएं. बच्चों को शुरू से ही अच्छे संस्कार, तहजीब और अनुशासन की शिक्षा दी जाए, ताकि वे सही और गलत में फर्क समझ सकें. गौरतलब है कि देवबंद हमेशा से इस्लामी शिक्षा और सामाजिक सुधार का बड़ा केंद्र रहा है. यहां के उलेमा समय-समय पर समाज की बुराइयों पर खुलकर अपनी राय रखते रहे हैं. मौलाना कारी इसहाक गोरा का यह संदेश भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें समाज को बेहतर और संतुलित बनाने की बात कही गई है. उन्होंने उम्मीद जताई कि युवा वर्ग उनकी बातों पर गंभीरता से विचार करेगा और समाज को सही दिशा देने में अपनी भूमिका निभाएगा.

Feb 13, 2026 - 00:30
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'आजकल लड़के-लड़कियां नाच-गाने करके...’, सोशल मीडिया पर रील बनाने को लेकर क्या बोले कारी इसहाक गोरा?

जमीयत दावतुल मुस्लिमीन के संरक्षक और प्रसिद्ध देवबंदी उलेमा मौलाना कारी इसहाक गोरा ने समाज, खासकर युवाओं में नाच-गाने और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने इस संबंध में एक वीडियो संदेश जारी कर युवाओं से आत्ममंथन करने और सही दिशा में आगे बढ़ने की अपील की है.

अपने संदेश में मौलाना कारी इसहाक गोरा ने कहा कि पहले के समय में नाच-गाने को समाज में गलत और शर्म की बात माना जाता था, लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल गए हैं. अब वही चीजें सोशल मीडिया पर मशहूर होने, लाइक और फॉलोअर्स बढ़ाने का जरिया बन गई हैं. उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि समय से ज्यादा हमारी सोच बदल गई है और यही बदलाव समाज के लिए खतरे की घंटी है.

समाज की पहचान अच्छे संस्कार से होती हैः इसहाक

मौलाना ने कहा कि आज बड़ी संख्या में युवक और युवतियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर नाच-गाने के वीडियो बना रहे हैं. कई बार मजहब और दीन से जुड़ी बातों को भी मजाक के तौर पर पेश किया जाता है. लोग इसे मनोरंजन समझकर देखते हैं और बिना सोचे-समझे साझा भी करते हैं. मौलाना ने कहा कि जब पवित्र बातों का मजाक बनने लगे, तो यह समाज की सोच के गिरने का संकेत है.

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल बुरा नहीं है, लेकिन इसका गलत उपयोग समाज को नुकसान पहुंचा रहा है. आज का युवा थोड़ी-सी प्रसिद्धि के लिए अपनी मर्यादा और संस्कार भूलता जा रहा है. मौलाना ने युवाओं से अपील की कि वे कुछ पल की शोहरत के बजाय अपने चरित्र, शिक्षा और अच्छे आचरण को महत्व दें. उन्होंने कहा कि किसी भी समाज या कौम की पहचान उसके अच्छे व्यवहार, संस्कार और जिम्मेदारी से होती है, न कि वायरल वीडियो से.

परिवार, शिक्षक और समाज के लोग नई पीढ़ी को रास्ता दिखाएः इसहाक

मौलाना कारी इसहाक गोरा ने यह भी कहा कि माता-पिता, शिक्षक और समाज के जिम्मेदार लोगों को चाहिए कि वे नई पीढ़ी को सही रास्ता दिखाएं. बच्चों को शुरू से ही अच्छे संस्कार, तहजीब और अनुशासन की शिक्षा दी जाए, ताकि वे सही और गलत में फर्क समझ सकें.

गौरतलब है कि देवबंद हमेशा से इस्लामी शिक्षा और सामाजिक सुधार का बड़ा केंद्र रहा है. यहां के उलेमा समय-समय पर समाज की बुराइयों पर खुलकर अपनी राय रखते रहे हैं. मौलाना कारी इसहाक गोरा का यह संदेश भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें समाज को बेहतर और संतुलित बनाने की बात कही गई है. उन्होंने उम्मीद जताई कि युवा वर्ग उनकी बातों पर गंभीरता से विचार करेगा और समाज को सही दिशा देने में अपनी भूमिका निभाएगा.

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