शुभेंदु सरकार ने BJP सांसद अनंत महाराज से वापस लिया सम्मान, नेताजी पर टिप्पणी पड़ी भारी
21 फरवरी 2026 को बीजेपी के राज्यसभा सांसद नागेंद्र राय उर्फ अनंत महाराज को दिए बंगा विभूषण सम्मान को वापस ले लिया है. यह कार्रवाई सुभाष चंद्र बोस पर आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर की गई है. बीजेपी सरकार ने न सिर्फ राजकीय सम्मान लिया, बल्कि इसे रद्द भी कर दिया है. सूचना और सांस्कृतिक मामलों के विभाग ने एक आदेश में कहा है कि सम्मान दिए जाने के बाद सामने आए कुछ तथ्यों और परिस्थितियों ने इसे बनाए रखने पर सवाल खड़े कर दिए. रिकॉर्ड में मौजूद जानकारी पर विचार करने के बाद, सक्षम अधिकारी ने निष्कर्ष निकाला है कि इस सम्मान को बनाए रखना, इसकी गरिमा, प्रतिष्ठा और उद्देश्य के अनुरूप नहीं था. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दिए कार्रवाई के निर्देश पूरा मामला नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर की गई टिप्पणियों को लेकर है. जिसपर राज्य में बवाल खड़ा हो गया है. वहीं, पूरे मामले पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. मामले में अपमानजनक टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की गई. इस पर चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने मान करते हुए कहा है कि आप चाहें तो याचिका दाखिल कर सकते हैं. स्वत: संज्ञान ऐसे मामलों में लिया जाता है, जहां कोर्ट का तुरंत दाखिल जरूरी हो. याचिका दाखिल करने वाला कोई न हो. नेताजी और आजाद हिंद फौज पर उठाए थे सवाल बीजेपी सांसद अनंत महाराज ने एक मीडिया के बयान में नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज की भूमिका पर सवाल उठाए. इसके अलावा सोशल मीडिया पर नेता से जुड़ी तस्वीरें और आपत्तिजनकर पोस्ट शेयर किए जाने लगे. इसपर नॉर्थ बंगाल के विधायकों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की और राष्ट्रीय नायक की गरिमा की रक्षा करने के लिए कानूनी कार्रवाई की मांग की. नागेंद्र राय से जुड़े फैक्ट्स, जानें कौन हैं? नागेंद्र राय की बात करें, तो वह ग्रेटर कूच बिहार पीपल्स एसोसिएशन के एक प्रमुख नेता हैं. उत्तरी बंगाल के राजबंशी समुदाय के प्रभावशाली व्यक्ति भी हैं. कुछ दिन पहले उन्होंने नेताजी को युद्ध अपराधी कहा था. इसके अलावा उनके नेतृत्व पर भी सवाल उठाए थे. इतना ही नहीं नागेंद्र रॉय ने भारत की आजादी की लड़ाई में आजाद हिंद फौज की भूमिका पर भी संदेह जताया था.
21 फरवरी 2026 को बीजेपी के राज्यसभा सांसद नागेंद्र राय उर्फ अनंत महाराज को दिए बंगा विभूषण सम्मान को वापस ले लिया है. यह कार्रवाई सुभाष चंद्र बोस पर आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर की गई है. बीजेपी सरकार ने न सिर्फ राजकीय सम्मान लिया, बल्कि इसे रद्द भी कर दिया है.
सूचना और सांस्कृतिक मामलों के विभाग ने एक आदेश में कहा है कि सम्मान दिए जाने के बाद सामने आए कुछ तथ्यों और परिस्थितियों ने इसे बनाए रखने पर सवाल खड़े कर दिए. रिकॉर्ड में मौजूद जानकारी पर विचार करने के बाद, सक्षम अधिकारी ने निष्कर्ष निकाला है कि इस सम्मान को बनाए रखना, इसकी गरिमा, प्रतिष्ठा और उद्देश्य के अनुरूप नहीं था.
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दिए कार्रवाई के निर्देश
पूरा मामला नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर की गई टिप्पणियों को लेकर है. जिसपर राज्य में बवाल खड़ा हो गया है. वहीं, पूरे मामले पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. मामले में अपमानजनक टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की गई. इस पर चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने मान करते हुए कहा है कि आप चाहें तो याचिका दाखिल कर सकते हैं. स्वत: संज्ञान ऐसे मामलों में लिया जाता है, जहां कोर्ट का तुरंत दाखिल जरूरी हो. याचिका दाखिल करने वाला कोई न हो.
नेताजी और आजाद हिंद फौज पर उठाए थे सवाल
बीजेपी सांसद अनंत महाराज ने एक मीडिया के बयान में नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज की भूमिका पर सवाल उठाए. इसके अलावा सोशल मीडिया पर नेता से जुड़ी तस्वीरें और आपत्तिजनकर पोस्ट शेयर किए जाने लगे. इसपर नॉर्थ बंगाल के विधायकों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की और राष्ट्रीय नायक की गरिमा की रक्षा करने के लिए कानूनी कार्रवाई की मांग की.
नागेंद्र राय से जुड़े फैक्ट्स, जानें कौन हैं?
नागेंद्र राय की बात करें, तो वह ग्रेटर कूच बिहार पीपल्स एसोसिएशन के एक प्रमुख नेता हैं. उत्तरी बंगाल के राजबंशी समुदाय के प्रभावशाली व्यक्ति भी हैं. कुछ दिन पहले उन्होंने नेताजी को युद्ध अपराधी कहा था. इसके अलावा उनके नेतृत्व पर भी सवाल उठाए थे. इतना ही नहीं नागेंद्र रॉय ने भारत की आजादी की लड़ाई में आजाद हिंद फौज की भूमिका पर भी संदेह जताया था.
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