वक्फ संपत्ति विवाद से जुड़े हत्या मामले का खुलासा, पुलिस ने कॉन्ट्रैक्ट किलिंग साजिश में सात लोगों को किया गिरफ्तार

तेलंगाना में वकील ख्वाजा मोइज़ुद्दीन की हत्या की जांच में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. हैदराबाद पुलिस ने सात ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनका कथित तौर पर एक सोची-समझी कॉन्ट्रैक्ट किलिंग की साजिश से संबंध है. इस साजिश की जड़ें वक्फ संपत्तियों को लेकर चल रहे एक लंबे विवाद में थीं. पुलिस की तरफ से की गई ये गिरफ्तारियां एक गहन जांच के बाद हुईं हैं, जिसमें तकनीकी विश्लेषण, जमीनी खुफिया जानकारी और मुख्य संदिग्धों से पूछताछ का सहारा लिया गया. पुलिस का कहना है कि इस मामले से एक ऐसी साजिश का खुलासा हुआ है, जिसे कथित तौर पर लंबे समय तक बुना गया था और पीड़ित की रोजमर्रा की गतिविधियों पर महीनों तक नजर रखने के बाद अंजाम दिया गया. पुलिस जांच में क्या हुआ खुलासा? जांचकर्ताओं के अनुसार, मलकपेट और लकड़िकापुल इलाकों में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और नियंत्रण से जुड़े तनाव के कारण पिछले कुछ सालों में कई कानूनी लड़ाइयां लड़ी गईं. इन विवादों में कथित तौर पर दीवानी मुकदमे, आपराधिक मामले और वक्फ ट्रिब्यूनल के समक्ष मामले शामिल थे. पुलिस का मानना है कि यह लंबा संघर्ष आखिर में एक आपराधिक साजिश में बदल गया, जिसका मकसद वकील को रास्ते से हटाना था. जांच में मुजाहिद आलम खान और उनके पिता महबूब आलम खान को इस कथित साजिश में मुख्य सूत्रधार के रूप में पहचाना गया. पुलिस का आरोप है कि हत्या को अंजाम देने के लिए 15 लाख रुपये का कॉन्ट्रैक्ट तय किया गया था. कथित तौर पर यह योजना कई बिचौलियों के जरिए उन लोगों तक पहुंची, जिन्हें हमले को अंजाम देने का काम सौंपा गया था. जांचकर्ताओं का कहना है कि इस नेटवर्क में कई लोग शामिल थे, जिन्होंने समन्वय और साजो-सामान जुटाने से लेकर निगरानी और हत्या को अंजाम देने तक अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं.  यह भी पढे़ंः PFI से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी को जमानत, HC ने कहा- प्रदर्शन में शामिल होना जमानत रोकने का आधार नहीं हैदराबाद पुलिस ने कैसे किया मामले का खुलासा? हैदराबाद पुलिस को यह बड़ी सफलता तब मिली, जब पुलिस ने आरोपियों में से एक, किशन उर्फ पप्पू को हरियाणा के पानीपत में ढूंढ निकाला. उसकी गिरफ्तारी के बाद, जांचकर्ताओं को कथित तौर पर अहम जानकारियां मिलीं, जिनसे अन्य संदिग्धों की पहचान करने और साजिश में कथित तौर पर शामिल लोगों के बीच कड़ियों को जोड़ने में मदद मिली. इसके बाद चलाए गए अभियानों के दौरान हैदराबाद के अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तारियां हुईं, जिनमें शहर के रिहायशी इलाकों से मुख्य संदिग्धों को हिरासत में लेना भी शामिल है. पुलिस ने आरोपियों की भूमिकाओं की दी जानकारी पुलिस का आरोप है कि इस गिरोह के सदस्यों ने हमले से पहले कई महीनों तक पीड़ित की दिनचर्या की विस्तृत रेकी (जांच-पड़ताल) की थी. जांचकर्ताओं ने अलग-अलग आरोपियों को सौंपी गई विशिष्ट भूमिकाओं की भी पहचान की है, जिनमें वाहन का इंतजाम करना, आवाजाही का समन्वय करना, लक्ष्य पर नजर रखना और अपराध को अंजाम देने में सीधे तौर पर शामिल होना शामिल है. अपराध के दौरान कथित तौर पर इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो गाड़ी को जांच के दौरान बरामद कर लिया गया.  पुलिस ने मामले में जुटाए नकदी और कई अन्य सबूत अधिकारियों ने 10.10 लाख रुपये की नकदी के साथ-साथ कई मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं, जिनके इस मामले से जुड़े होने का संदेह है. जांचकर्ता घटनाओं की पूरी कड़ियों को जोड़ने के लिए डिजिटल सबूतों, वित्तीय लेन-देन और संचार रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं. पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि कुछ आरोपियों की अन्य आपराधिक मामलों में संभावित संलिप्तता की भी जांच की जा रही है. अधिकारियों ने बताया कि अन्य संदिग्धों का पता लगाने और अतिरिक्त सबूत जुटाने के प्रयास जारी हैं. पुलिस ने पीड़ित परिवार को सुरक्षा का आश्वासन दिया है और कहा है कि जांच बिना किसी बाहरी प्रभाव या हस्तक्षेप के वैज्ञानिक तरीकों से की गई है.  यह भी पढे़ंः पंजाब-दिल्ली समेत कई राज्यों में IED धमाकों की साजिश, NIA की 4 राज्यों में बड़ी रेड

May 30, 2026 - 03:30
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वक्फ संपत्ति विवाद से जुड़े हत्या मामले का खुलासा, पुलिस ने कॉन्ट्रैक्ट किलिंग साजिश में सात लोगों को किया गिरफ्तार

तेलंगाना में वकील ख्वाजा मोइज़ुद्दीन की हत्या की जांच में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. हैदराबाद पुलिस ने सात ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनका कथित तौर पर एक सोची-समझी कॉन्ट्रैक्ट किलिंग की साजिश से संबंध है. इस साजिश की जड़ें वक्फ संपत्तियों को लेकर चल रहे एक लंबे विवाद में थीं.

पुलिस की तरफ से की गई ये गिरफ्तारियां एक गहन जांच के बाद हुईं हैं, जिसमें तकनीकी विश्लेषण, जमीनी खुफिया जानकारी और मुख्य संदिग्धों से पूछताछ का सहारा लिया गया. पुलिस का कहना है कि इस मामले से एक ऐसी साजिश का खुलासा हुआ है, जिसे कथित तौर पर लंबे समय तक बुना गया था और पीड़ित की रोजमर्रा की गतिविधियों पर महीनों तक नजर रखने के बाद अंजाम दिया गया.

पुलिस जांच में क्या हुआ खुलासा?

जांचकर्ताओं के अनुसार, मलकपेट और लकड़िकापुल इलाकों में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और नियंत्रण से जुड़े तनाव के कारण पिछले कुछ सालों में कई कानूनी लड़ाइयां लड़ी गईं. इन विवादों में कथित तौर पर दीवानी मुकदमे, आपराधिक मामले और वक्फ ट्रिब्यूनल के समक्ष मामले शामिल थे. पुलिस का मानना है कि यह लंबा संघर्ष आखिर में एक आपराधिक साजिश में बदल गया, जिसका मकसद वकील को रास्ते से हटाना था.

जांच में मुजाहिद आलम खान और उनके पिता महबूब आलम खान को इस कथित साजिश में मुख्य सूत्रधार के रूप में पहचाना गया. पुलिस का आरोप है कि हत्या को अंजाम देने के लिए 15 लाख रुपये का कॉन्ट्रैक्ट तय किया गया था. कथित तौर पर यह योजना कई बिचौलियों के जरिए उन लोगों तक पहुंची, जिन्हें हमले को अंजाम देने का काम सौंपा गया था. जांचकर्ताओं का कहना है कि इस नेटवर्क में कई लोग शामिल थे, जिन्होंने समन्वय और साजो-सामान जुटाने से लेकर निगरानी और हत्या को अंजाम देने तक अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं. 

यह भी पढे़ंः PFI से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी को जमानत, HC ने कहा- प्रदर्शन में शामिल होना जमानत रोकने का आधार नहीं

हैदराबाद पुलिस ने कैसे किया मामले का खुलासा?

हैदराबाद पुलिस को यह बड़ी सफलता तब मिली, जब पुलिस ने आरोपियों में से एक, किशन उर्फ पप्पू को हरियाणा के पानीपत में ढूंढ निकाला. उसकी गिरफ्तारी के बाद, जांचकर्ताओं को कथित तौर पर अहम जानकारियां मिलीं, जिनसे अन्य संदिग्धों की पहचान करने और साजिश में कथित तौर पर शामिल लोगों के बीच कड़ियों को जोड़ने में मदद मिली. इसके बाद चलाए गए अभियानों के दौरान हैदराबाद के अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तारियां हुईं, जिनमें शहर के रिहायशी इलाकों से मुख्य संदिग्धों को हिरासत में लेना भी शामिल है.

पुलिस ने आरोपियों की भूमिकाओं की दी जानकारी

पुलिस का आरोप है कि इस गिरोह के सदस्यों ने हमले से पहले कई महीनों तक पीड़ित की दिनचर्या की विस्तृत रेकी (जांच-पड़ताल) की थी. जांचकर्ताओं ने अलग-अलग आरोपियों को सौंपी गई विशिष्ट भूमिकाओं की भी पहचान की है, जिनमें वाहन का इंतजाम करना, आवाजाही का समन्वय करना, लक्ष्य पर नजर रखना और अपराध को अंजाम देने में सीधे तौर पर शामिल होना शामिल है. अपराध के दौरान कथित तौर पर इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो गाड़ी को जांच के दौरान बरामद कर लिया गया. 

पुलिस ने मामले में जुटाए नकदी और कई अन्य सबूत

अधिकारियों ने 10.10 लाख रुपये की नकदी के साथ-साथ कई मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं, जिनके इस मामले से जुड़े होने का संदेह है. जांचकर्ता घटनाओं की पूरी कड़ियों को जोड़ने के लिए डिजिटल सबूतों, वित्तीय लेन-देन और संचार रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं. पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि कुछ आरोपियों की अन्य आपराधिक मामलों में संभावित संलिप्तता की भी जांच की जा रही है.

अधिकारियों ने बताया कि अन्य संदिग्धों का पता लगाने और अतिरिक्त सबूत जुटाने के प्रयास जारी हैं. पुलिस ने पीड़ित परिवार को सुरक्षा का आश्वासन दिया है और कहा है कि जांच बिना किसी बाहरी प्रभाव या हस्तक्षेप के वैज्ञानिक तरीकों से की गई है. 

यह भी पढे़ंः पंजाब-दिल्ली समेत कई राज्यों में IED धमाकों की साजिश, NIA की 4 राज्यों में बड़ी रेड

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