ब्लैक मनी पर सर्जिकल स्ट्राइक! 3.12 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति से जुड़ा मामला, एक्शन में आयकर विभाग

देश के कई राज्यों में हुए 3.12 लाख करोड़ रुपये के संपत्ति सौदे इस वक्त आयकर विभाग की जांच के दायरे में हैं. आयकर विभाग की जांच में सामने आया यह आंकड़ा काफी बड़ा है, जो कथित तौर पर काले धन की ओर इशारा करता हैं. विभाग जिन संपत्ति सौदों को लेकर जांच कर रही है, उसमें से अधिकांश गुरुग्राम, चंडीगढ़, फरीदाबाद, सोनीपत, करनाल और कुछ अन्य जिलों में काफी ज्यादा थे. इस घटनाक्रम से परिचित लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, जम्मू और कश्मीर और लद्दाख में आयकर विभाग के सर्वेक्षणों और मौके पर किए गए सत्यापन से पता चला है कि पिछले एक साल में इन क्षेत्रों में 3.12 लाख करोड़ रुपये कीमत के 2.5 लाख से ज्यादा संपत्ति सौदे या तो दर्ज नहीं किए गए है, या फिर गलत पैन विवरण के साथ दर्ज किए गए हैं. क्या है आयकर विभाग के नियम? आयकर अधिनियम की धारा 285BA के तहत, बैंकों, उप-पंजीयक कार्यालयों (SROs), गैर-वित्तीय वित्तीय संस्थानों (NBFCs), म्यूचुअल फंडों आदि सहित रिपोर्टिंग प्राधिकारियों को करदाताओं की ओर से किए गए उच्च-मूल्य के लेन-देन, ब्याज भुगतान, लाभांश और अन्य संबंधित लेन-देन के संबंध में वित्तीय लेन-देन विवरण (SFTs) उनके स्थायी खाता संख्या (PAN) के साथ प्रस्तुत करना अनिवार्य है. वहीं, SROs को 30 लाख रुपये से अधिक के सभी अचल संपत्ति लेन-देन का विवरण देना वैधानिक रूप से अनिवार्य है. इसके बाद इस जानकारी का मिलान आयकर रिटर्न से किया जाता है. यह भी पढ़ेंः योगी सरकार के लिए खतरे की घंटी? सर्वे में यूपी के 33 मंत्रियों से जनता नाराज, सिर्फ 3 को दोबारा टिकट की उम्मीद आयकर विभाग के अधिकारी ने दी जानकारी आयकर विभाग के एक अधिकारी ने कहा, ‘सूचना और आपराधिक जांच निदेशालय, जो आयकर विभाग की एक इकाई है, ने 2025-26 में उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश राज्यों के साथ जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़ और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 42 मौके पर सत्यापन किए, जिसमें से अधिकांश तहसील कार्यालयों में किए गए. इसका मुख्य उद्देश्य नामित रिपोर्टिंग प्राधिकारियों की ओर से उच्च-मूल्य के वित्तीय लेन-देन की रिपोर्टिंग में अनियमितताओं का पता लगाना और उन्हें दूर करना था.’ उन्होंने कहा, ‘मौजूदा रिकॉर्ड से प्राप्त आंकड़ों के क्षेत्रीय सत्यापन और विश्लेषण से पता चला है कि SROs ने 30 लाख रुपये से अधिक मूल्य के कई संपत्ति लेन-देन की जानकारी हीं नहीं दी या गलत पैन विवरण प्रदान किए हैं.’ 31 लाख करोड़ की संपत्ति लेन-देन का भी खुलासा वहीं, विभाग से संबंधित एक अन्य व्यक्ति ने कहा, ‘आयकर विभाग ने 25 लाख से अधिक ऐसे संपत्ति लेन-देन का पता लगाया है, जिनमें से कई गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, चंडीगढ़ और पंजाब के कई जिलों के तहसील कार्यालयों में दर्ज किए गए हैं और इन लेन-देन का अनुमानित कीमत 31 लाख करोड़ रुपये है.’ सूचना मिली है कि आयकर विभाग ने देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह का अभियान शुरू किया है. हालांकि, आंकड़ों का केंद्रीय संकलन नहीं किया गया है, लेकिन अधिकारियों ने संकेत दिया है कि पूरे भारत में इस तरह के संदिग्ध लेन-देन की कीमत 75 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है. क्या मामले में एसआरओ अधिकारियों की भी है मिलीभगत? वहीं, दूसरे अधिकारी ने कहा, ‘यह ज्ञात नहीं है कि SRO के अधिकारी इन सभी मामलों में करदाताओं के साथ शामिल हैं या नहीं, लेकिन इस तरह की अधूरी या गलत रिपोर्टिंग कर सत्यापन के उद्देश्य से आंकड़ों को अप्रभावी बना देती है और आयकर विभाग की उच्च मूल्य के लेन-देन पर नजर रखने और उचित कर अनुपालन सुनिश्चित करने की क्षमता को काफी हद तक बाधित करती है.’ यह भी पढे़ंः विदेशी डेबिट कार्ड के जरिए भारत में फंडिंग का खुलासा, 6 ठिकानों पर ED की छापे में 25 डेबिट कार्ड और 40 लाख नकद बरामद

Apr 27, 2026 - 06:30
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ब्लैक मनी पर सर्जिकल स्ट्राइक! 3.12 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति से जुड़ा मामला, एक्शन में आयकर विभाग

देश के कई राज्यों में हुए 3.12 लाख करोड़ रुपये के संपत्ति सौदे इस वक्त आयकर विभाग की जांच के दायरे में हैं. आयकर विभाग की जांच में सामने आया यह आंकड़ा काफी बड़ा है, जो कथित तौर पर काले धन की ओर इशारा करता हैं. विभाग जिन संपत्ति सौदों को लेकर जांच कर रही है, उसमें से अधिकांश गुरुग्राम, चंडीगढ़, फरीदाबाद, सोनीपत, करनाल और कुछ अन्य जिलों में काफी ज्यादा थे.

इस घटनाक्रम से परिचित लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, जम्मू और कश्मीर और लद्दाख में आयकर विभाग के सर्वेक्षणों और मौके पर किए गए सत्यापन से पता चला है कि पिछले एक साल में इन क्षेत्रों में 3.12 लाख करोड़ रुपये कीमत के 2.5 लाख से ज्यादा संपत्ति सौदे या तो दर्ज नहीं किए गए है, या फिर गलत पैन विवरण के साथ दर्ज किए गए हैं.

क्या है आयकर विभाग के नियम?

आयकर अधिनियम की धारा 285BA के तहत, बैंकों, उप-पंजीयक कार्यालयों (SROs), गैर-वित्तीय वित्तीय संस्थानों (NBFCs), म्यूचुअल फंडों आदि सहित रिपोर्टिंग प्राधिकारियों को करदाताओं की ओर से किए गए उच्च-मूल्य के लेन-देन, ब्याज भुगतान, लाभांश और अन्य संबंधित लेन-देन के संबंध में वित्तीय लेन-देन विवरण (SFTs) उनके स्थायी खाता संख्या (PAN) के साथ प्रस्तुत करना अनिवार्य है. वहीं, SROs को 30 लाख रुपये से अधिक के सभी अचल संपत्ति लेन-देन का विवरण देना वैधानिक रूप से अनिवार्य है. इसके बाद इस जानकारी का मिलान आयकर रिटर्न से किया जाता है.

यह भी पढ़ेंः योगी सरकार के लिए खतरे की घंटी? सर्वे में यूपी के 33 मंत्रियों से जनता नाराज, सिर्फ 3 को दोबारा टिकट की उम्मीद

आयकर विभाग के अधिकारी ने दी जानकारी

आयकर विभाग के एक अधिकारी ने कहा, ‘सूचना और आपराधिक जांच निदेशालय, जो आयकर विभाग की एक इकाई है, ने 2025-26 में उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश राज्यों के साथ जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़ और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 42 मौके पर सत्यापन किए, जिसमें से अधिकांश तहसील कार्यालयों में किए गए. इसका मुख्य उद्देश्य नामित रिपोर्टिंग प्राधिकारियों की ओर से उच्च-मूल्य के वित्तीय लेन-देन की रिपोर्टिंग में अनियमितताओं का पता लगाना और उन्हें दूर करना था.’

उन्होंने कहा, ‘मौजूदा रिकॉर्ड से प्राप्त आंकड़ों के क्षेत्रीय सत्यापन और विश्लेषण से पता चला है कि SROs ने 30 लाख रुपये से अधिक मूल्य के कई संपत्ति लेन-देन की जानकारी हीं नहीं दी या गलत पैन विवरण प्रदान किए हैं.’

31 लाख करोड़ की संपत्ति लेन-देन का भी खुलासा

वहीं, विभाग से संबंधित एक अन्य व्यक्ति ने कहा, ‘आयकर विभाग ने 25 लाख से अधिक ऐसे संपत्ति लेन-देन का पता लगाया है, जिनमें से कई गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, चंडीगढ़ और पंजाब के कई जिलों के तहसील कार्यालयों में दर्ज किए गए हैं और इन लेन-देन का अनुमानित कीमत 31 लाख करोड़ रुपये है.’

सूचना मिली है कि आयकर विभाग ने देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह का अभियान शुरू किया है. हालांकि, आंकड़ों का केंद्रीय संकलन नहीं किया गया है, लेकिन अधिकारियों ने संकेत दिया है कि पूरे भारत में इस तरह के संदिग्ध लेन-देन की कीमत 75 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है.

क्या मामले में एसआरओ अधिकारियों की भी है मिलीभगत?

वहीं, दूसरे अधिकारी ने कहा, ‘यह ज्ञात नहीं है कि SRO के अधिकारी इन सभी मामलों में करदाताओं के साथ शामिल हैं या नहीं, लेकिन इस तरह की अधूरी या गलत रिपोर्टिंग कर सत्यापन के उद्देश्य से आंकड़ों को अप्रभावी बना देती है और आयकर विभाग की उच्च मूल्य के लेन-देन पर नजर रखने और उचित कर अनुपालन सुनिश्चित करने की क्षमता को काफी हद तक बाधित करती है.’

यह भी पढे़ंः विदेशी डेबिट कार्ड के जरिए भारत में फंडिंग का खुलासा, 6 ठिकानों पर ED की छापे में 25 डेबिट कार्ड और 40 लाख नकद बरामद

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