देश की इकोनॉमी के लिए आई बुरी खबर, अप्रैल में 8 महीने के लोअर लेवल पर पहुंचा देश का कोर सेक्टर

Core Sector Growth: भारत के कोर सेक्टर का ग्रोथ अप्रैल में 8 महीने के लोअर लेवल पर आ गया है. इससे देश की इकोनॉमी को तगड़ा झटका लगा है. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि आठ कोर सेक्टरों - कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली का ग्रोथ अप्रैल में कम होकर 0.5 परसेंट रह गया है. जबकि मार्च में यही आंकड़ा 4.6 परसेंट और पिछले साल अप्रैल में 6.9 परसेंट था.  मार्च से काफी कम है अप्रैल का ग्रोथ अप्रैल में सीमेंट सेक्टर का ग्रोथ 6.7 परसेंट रहा है, जो मार्च में 12.2 परसेंट के ग्रोथ से काफी कम है. इसी महीने स्टील सेक्टर का ग्रोथ महज 3 परसेंट तक ही बढ़ा है, जबकि मार्च में 9.3 परसेंट का ग्रोथ सामने आया था. इसी तरह से अप्रैल में नैचुरल गैस के सेक्टर में मार्च में हुए 12.7 परसेंट के ग्रोथ के मुकाबले महज 0.4 परसेंट का ही ग्रोथ हुआ है. हालांकि, कोल सेक्टर में अप्रैल में 3.5 परसेंट की वृद्धि हुई है, जो मार्च में 1.6 परसेंट के ग्रोथ से अधिक है.  कोर सेक्टर देश की इकोनॉमी के लिए अहम इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन के इंडेक्स ( IIP) में कोर सेक्टर का योगदान करीब 41 परसेंट है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अप्रैल में सुस्त नतीजों का असर ओवरऑल  IIP पर पड़ेगा, जो इस महीने के आखिर तक जारी किए जाएंगे. बता दें कि कोर सेक्टर में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी प्रोडक्ट्स, बिजली, सीमेंट, स्टील और फर्टिलाइजर शामिल हैं. ये आठ सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी के समान है. इसमें ग्रोथ या गिरावट का असर पूरी इकोनॉमी पर गहरा पड़ता है.  क्यों आई ये गिरावट?  आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल के महीने में क्रूड ऑयल, रिफाइनरी प्रोडक्ट सेगमेंट, फर्टिलाइजर में गिरावट दर्ज की गई है. इन तीनों सेक्टर में क्रमश: 2.8 परसेंट, 4.5 परसेंट और 4.2 परसेंट की गिरावट आई है. जबकि बिजली के सेक्टर में मात्र 1 परसेंट की वृद्धि दर्ज की गई है, जो मार्च में 7.5 परसेंट के ग्रोथ से काफी ज्यादा कम है.  ये भी पढ़ें:  सड़कों पर खुलकर हो रही मनमानी: एक साल में 12000 करोड़ रुपये का कटा चालान, 9000 करोड़ अब भी बकाया  

May 21, 2025 - 11:30
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देश की इकोनॉमी के लिए आई बुरी खबर, अप्रैल में 8 महीने के लोअर लेवल पर पहुंचा देश का कोर सेक्टर

Core Sector Growth: भारत के कोर सेक्टर का ग्रोथ अप्रैल में 8 महीने के लोअर लेवल पर आ गया है. इससे देश की इकोनॉमी को तगड़ा झटका लगा है. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि आठ कोर सेक्टरों - कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली का ग्रोथ अप्रैल में कम होकर 0.5 परसेंट रह गया है. जबकि मार्च में यही आंकड़ा 4.6 परसेंट और पिछले साल अप्रैल में 6.9 परसेंट था. 

मार्च से काफी कम है अप्रैल का ग्रोथ

अप्रैल में सीमेंट सेक्टर का ग्रोथ 6.7 परसेंट रहा है, जो मार्च में 12.2 परसेंट के ग्रोथ से काफी कम है. इसी महीने स्टील सेक्टर का ग्रोथ महज 3 परसेंट तक ही बढ़ा है, जबकि मार्च में 9.3 परसेंट का ग्रोथ सामने आया था. इसी तरह से अप्रैल में नैचुरल गैस के सेक्टर में मार्च में हुए 12.7 परसेंट के ग्रोथ के मुकाबले महज 0.4 परसेंट का ही ग्रोथ हुआ है. हालांकि, कोल सेक्टर में अप्रैल में 3.5 परसेंट की वृद्धि हुई है, जो मार्च में 1.6 परसेंट के ग्रोथ से अधिक है. 

कोर सेक्टर देश की इकोनॉमी के लिए अहम

इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन के इंडेक्स ( IIP) में कोर सेक्टर का योगदान करीब 41 परसेंट है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अप्रैल में सुस्त नतीजों का असर ओवरऑल  IIP पर पड़ेगा, जो इस महीने के आखिर तक जारी किए जाएंगे. बता दें कि कोर सेक्टर में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी प्रोडक्ट्स, बिजली, सीमेंट, स्टील और फर्टिलाइजर शामिल हैं. ये आठ सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी के समान है. इसमें ग्रोथ या गिरावट का असर पूरी इकोनॉमी पर गहरा पड़ता है. 

क्यों आई ये गिरावट? 

आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल के महीने में क्रूड ऑयल, रिफाइनरी प्रोडक्ट सेगमेंट, फर्टिलाइजर में गिरावट दर्ज की गई है. इन तीनों सेक्टर में क्रमश: 2.8 परसेंट, 4.5 परसेंट और 4.2 परसेंट की गिरावट आई है. जबकि बिजली के सेक्टर में मात्र 1 परसेंट की वृद्धि दर्ज की गई है, जो मार्च में 7.5 परसेंट के ग्रोथ से काफी ज्यादा कम है. 

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