दिल्ली नहीं ये है देश का सबसे प्रदूषित शहर, जानें नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम किस नंबर पर?
भारत के करीब 44 फीसदी शहर लंबे समय से वायु प्रदूषण की चपेट में हैं, जो इस बात का संकेत है कि यह समस्या अल्पकालिक घटनाओं के बजाय उत्सर्जन स्रोतों से लगातार जारी उत्सर्जन का नतीजा है. ऊर्जा एवं स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (CREA) की हालिया विश्लेषण रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय से वायु प्रदूषण का सामना कर रहे लगभग 44 फीसदी शहरों में से महज चार प्रतिशत राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के दायरे में आते हैं. CREA ने सैटेलाइट डेटा की मदद से भारत के 4,041 शहरों में पीएम 2.5 कणों के स्तर का आकलन किया. इसके मुताबिक, 'इन 4,041 शहरों में से कम से कम 1,787 में PM2.5 कणों का स्तर हाल के पांच वर्षों (2019, 2021, 2022, 2023 और 2024) में हर साल राष्ट्रीय वार्षिक मानक से अधिक दर्ज किया गया, जिनमें कोविड-19 से प्रभावित वर्ष 2020 शामिल नहीं है. इसका मतलब है कि लगभग 44 फीसदी भारतीय शहर लंबे समय से वायु प्रदूषण का सामना कर रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि यह समस्या अल्पकालिक घटनाओं के बजाय उत्सर्जन स्रोतों से लगातार जारी उत्सर्जन का नतीजा है. रिपोर्ट में वर्ष 2025 में PM2.5 कणों के स्तर के आकलन के आधार पर बर्नीहाट (असम), दिल्ली और गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) को भारत के तीन सर्वाधिक प्रदूषित शहर करार दिया गया, जहां वार्षिक सांद्रता क्रमशः 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर, 96 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और 93 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई. नोएडा-गाजियाबाद किस नंबर पर? इसके अनुसार, सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में नोएडा चौथे, गुरुग्राम पांचवें, ग्रेटर नोएडा छठे, भिवाड़ी सातवें, हाजीपुर आठवें, मुजफ्फरनगर नौवें और हापुड़ दसवें स्थान पर है. रिपोर्ट में कहा गया है, 'इसके बावजूद वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए भारत की प्रमुख NCAP योजना के दायरे में लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहे महज चार फीसदी शहर आते हैं, NCAP के अंतर्गत केवल 130 शहरों को शामिल किया गया है और इनमें से केवल 67 शहर ही उन 1,787 शहरों में शामिल हैं, जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की ओर से निर्धारित राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) पर खरा उतरने में लगातार कई वर्षों से विफल साबित हो रहे हैं.' यूपी के 400 से ज्यादा शहरों ने किया नियमों का उल्लंघन रिपोर्ट में कहा गया है कि NAAQS के मानकों का लगातार उल्लंघन करने वाले शहरों में सर्वाधिक 416 शहर उत्तर प्रदेश के हैं. इसमें कहा गया है कि राजस्थान के 158, गुजरात के 152, मध्यप्रदेश के 143, पंजाब के 136, बिहार के 136 और पश्चिम बंगाल के 124 शहर NAAQS के मानकों पर खरा उतरने में विफल रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, NCAP में शामिल 130 शहरों में से 28 में अभी भी व्यापक वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (CAAQMS) मौजूद नहीं हैं, जबकि CAAQMS से लैस 102 शहरों में से 100 शहरों में PM10 का स्तर 80% या उससे अधिक दर्ज किया गया है. इसमें कहा गया है, 'PM10 उत्सर्जन पर लगाम लगाने के मोर्चे पर प्रगति मिली-जुली रही है. 23 शहरों ने PM10 के स्तर में कमी का संशोधित 40% टारगेट हासिल कर लिया है, 28 शहरों में 21-40 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, 26 शहरों में 1-20 प्रतिशत का मामूली सुधार हुआ है, जबकि 23 शहरों में कार्यक्रम की शुरुआत के बाद से पीएम10 के स्तर में वास्तव में वृद्धि हुई है.' PM 10 उत्सर्जन पर दिल्ली टॉप पर रिपोर्ट में कहा गया है, 'PM10 कणों के मामले में दिल्ली शीर्ष पर है, जहां वार्षिक औसत स्तर 197 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया है, जो राष्ट्रीय मानक से तीन गुना है. गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा इस मामले में दूसरे और तीसरे पायदान पर हैं, जहां PM10 कणों का वार्षिक औसत स्तर क्रमश: 190 और 188 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा है.' इसमें कहा गया है कि सबसे ज्यादा PM10 सांद्रता वाले शीर्ष 50 शहरों में राजस्थान के सर्वाधिक 18 शहर शामिल हैं, जिसके बाद उत्तर प्रदेश (10), मध्यप्रदेश (5), बिहार (4) और ओडिशा (4) का स्थान आता है.
भारत के करीब 44 फीसदी शहर लंबे समय से वायु प्रदूषण की चपेट में हैं, जो इस बात का संकेत है कि यह समस्या अल्पकालिक घटनाओं के बजाय उत्सर्जन स्रोतों से लगातार जारी उत्सर्जन का नतीजा है. ऊर्जा एवं स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (CREA) की हालिया विश्लेषण रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय से वायु प्रदूषण का सामना कर रहे लगभग 44 फीसदी शहरों में से महज चार प्रतिशत राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के दायरे में आते हैं. CREA ने सैटेलाइट डेटा की मदद से भारत के 4,041 शहरों में पीएम 2.5 कणों के स्तर का आकलन किया.
इसके मुताबिक, 'इन 4,041 शहरों में से कम से कम 1,787 में PM2.5 कणों का स्तर हाल के पांच वर्षों (2019, 2021, 2022, 2023 और 2024) में हर साल राष्ट्रीय वार्षिक मानक से अधिक दर्ज किया गया, जिनमें कोविड-19 से प्रभावित वर्ष 2020 शामिल नहीं है.
इसका मतलब है कि लगभग 44 फीसदी भारतीय शहर लंबे समय से वायु प्रदूषण का सामना कर रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि यह समस्या अल्पकालिक घटनाओं के बजाय उत्सर्जन स्रोतों से लगातार जारी उत्सर्जन का नतीजा है.
रिपोर्ट में वर्ष 2025 में PM2.5 कणों के स्तर के आकलन के आधार पर बर्नीहाट (असम), दिल्ली और गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) को भारत के तीन सर्वाधिक प्रदूषित शहर करार दिया गया, जहां वार्षिक सांद्रता क्रमशः 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर, 96 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और 93 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई.
नोएडा-गाजियाबाद किस नंबर पर?
इसके अनुसार, सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में नोएडा चौथे, गुरुग्राम पांचवें, ग्रेटर नोएडा छठे, भिवाड़ी सातवें, हाजीपुर आठवें, मुजफ्फरनगर नौवें और हापुड़ दसवें स्थान पर है.
रिपोर्ट में कहा गया है, 'इसके बावजूद वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए भारत की प्रमुख NCAP योजना के दायरे में लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहे महज चार फीसदी शहर आते हैं, NCAP के अंतर्गत केवल 130 शहरों को शामिल किया गया है और इनमें से केवल 67 शहर ही उन 1,787 शहरों में शामिल हैं, जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की ओर से निर्धारित राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) पर खरा उतरने में लगातार कई वर्षों से विफल साबित हो रहे हैं.'
यूपी के 400 से ज्यादा शहरों ने किया नियमों का उल्लंघन
रिपोर्ट में कहा गया है कि NAAQS के मानकों का लगातार उल्लंघन करने वाले शहरों में सर्वाधिक 416 शहर उत्तर प्रदेश के हैं. इसमें कहा गया है कि राजस्थान के 158, गुजरात के 152, मध्यप्रदेश के 143, पंजाब के 136, बिहार के 136 और पश्चिम बंगाल के 124 शहर NAAQS के मानकों पर खरा उतरने में विफल रहे हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, NCAP में शामिल 130 शहरों में से 28 में अभी भी व्यापक वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (CAAQMS) मौजूद नहीं हैं, जबकि CAAQMS से लैस 102 शहरों में से 100 शहरों में PM10 का स्तर 80% या उससे अधिक दर्ज किया गया है.
इसमें कहा गया है, 'PM10 उत्सर्जन पर लगाम लगाने के मोर्चे पर प्रगति मिली-जुली रही है. 23 शहरों ने PM10 के स्तर में कमी का संशोधित 40% टारगेट हासिल कर लिया है, 28 शहरों में 21-40 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, 26 शहरों में 1-20 प्रतिशत का मामूली सुधार हुआ है, जबकि 23 शहरों में कार्यक्रम की शुरुआत के बाद से पीएम10 के स्तर में वास्तव में वृद्धि हुई है.'
PM 10 उत्सर्जन पर दिल्ली टॉप पर
रिपोर्ट में कहा गया है, 'PM10 कणों के मामले में दिल्ली शीर्ष पर है, जहां वार्षिक औसत स्तर 197 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया है, जो राष्ट्रीय मानक से तीन गुना है. गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा इस मामले में दूसरे और तीसरे पायदान पर हैं, जहां PM10 कणों का वार्षिक औसत स्तर क्रमश: 190 और 188 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा है.'
इसमें कहा गया है कि सबसे ज्यादा PM10 सांद्रता वाले शीर्ष 50 शहरों में राजस्थान के सर्वाधिक 18 शहर शामिल हैं, जिसके बाद उत्तर प्रदेश (10), मध्यप्रदेश (5), बिहार (4) और ओडिशा (4) का स्थान आता है.
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