झटका: दिसंबर में मैन्युफैक्चरिंग- सर्विस की कम हो गई रफ्तार, PMI घटकर 55.0 पर पहुंचा

Demember Manufacturing PMI Slows: देश की आर्थिक रफ्तार के लिहाज से यह खबर चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है. दिसंबर महीने में भले ही मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में गतिविधियां विस्तार के दायरे में बनी रहीं, लेकिन उनकी गति पहले की तुलना में धीमी पड़ती नजर आई. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, एचएसबीसी मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) दिसंबर में घटकर 55.0 पर आ गया, जबकि नवंबर में यह 56.6 के स्तर पर था. कम हुई मैन्युफैक्चरिंग रफ्तार एसएंडपी ग्लोबल द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि उत्पादन, नए ऑर्डर और निर्यात मांग में वृद्धि तो जारी रही, लेकिन उनकी रफ्तार में साफ सुस्ती दिखी. इसी तरह सर्विस सेक्टर में भी गतिविधियों की गति पर असर पड़ा है, जिससे कुल मिलाकर आर्थिक गतिविधियों की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता, कमजोर बाहरी मांग और इनपुट लागत के दबाव जैसी वजहों से उद्योगों की ग्रोथ स्पीड प्रभावित हुई है, हालांकि पीएमआई का 50 से ऊपर रहना यह संकेत देता है कि अर्थव्यवस्था अभी विस्तार के रास्ते पर ही बनी हुई है. क्या है मजबूत स्थिति का पैमाना? हालांकि, पीएमआई का 50 से ऊपर रहना यह संकेत देता है कि संबंधित सेक्टर में गतिविधियां विस्तार के दायरे में बनी हुई हैं और इसे मजबूत वृद्धि के रूप में देखा जाता है. इसका मतलब यह होता है कि मैन्युफैक्चरिंग या कंस्ट्रक्शन जैसी गतिविधियों में उत्पादन, नए ऑर्डर और रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं. वहीं, अगर पीएमआई का स्तर 50 से नीचे चला जाता है, तो यह मैन्युफैक्चरिंग या कंस्ट्रक्शन सेक्टर में संकुचन या कंसोलिडेशन की स्थिति को दर्शाता है, यानी गतिविधियां धीमी पड़ रही हैं. जबकि पीएमआई का 50 के आसपास बना रहना यह संकेत देता है कि अर्थव्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं हो रहा है और गतिविधियां स्थिर अवस्था में हैं. ये भी पढ़ें: लगातार तीन दिनों की गिरावट के बाद चमका सोना, जानें आज 2 जनवरी को आपके शहर का ताजा भाव

Jan 2, 2026 - 12:30
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झटका: दिसंबर में मैन्युफैक्चरिंग- सर्विस की कम हो गई रफ्तार, PMI घटकर 55.0 पर पहुंचा

Demember Manufacturing PMI Slows: देश की आर्थिक रफ्तार के लिहाज से यह खबर चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है. दिसंबर महीने में भले ही मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में गतिविधियां विस्तार के दायरे में बनी रहीं, लेकिन उनकी गति पहले की तुलना में धीमी पड़ती नजर आई. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, एचएसबीसी मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) दिसंबर में घटकर 55.0 पर आ गया, जबकि नवंबर में यह 56.6 के स्तर पर था.

कम हुई मैन्युफैक्चरिंग रफ्तार

एसएंडपी ग्लोबल द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि उत्पादन, नए ऑर्डर और निर्यात मांग में वृद्धि तो जारी रही, लेकिन उनकी रफ्तार में साफ सुस्ती दिखी. इसी तरह सर्विस सेक्टर में भी गतिविधियों की गति पर असर पड़ा है, जिससे कुल मिलाकर आर्थिक गतिविधियों की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता, कमजोर बाहरी मांग और इनपुट लागत के दबाव जैसी वजहों से उद्योगों की ग्रोथ स्पीड प्रभावित हुई है, हालांकि पीएमआई का 50 से ऊपर रहना यह संकेत देता है कि अर्थव्यवस्था अभी विस्तार के रास्ते पर ही बनी हुई है.

क्या है मजबूत स्थिति का पैमाना?

हालांकि, पीएमआई का 50 से ऊपर रहना यह संकेत देता है कि संबंधित सेक्टर में गतिविधियां विस्तार के दायरे में बनी हुई हैं और इसे मजबूत वृद्धि के रूप में देखा जाता है. इसका मतलब यह होता है कि मैन्युफैक्चरिंग या कंस्ट्रक्शन जैसी गतिविधियों में उत्पादन, नए ऑर्डर और रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं.

वहीं, अगर पीएमआई का स्तर 50 से नीचे चला जाता है, तो यह मैन्युफैक्चरिंग या कंस्ट्रक्शन सेक्टर में संकुचन या कंसोलिडेशन की स्थिति को दर्शाता है, यानी गतिविधियां धीमी पड़ रही हैं. जबकि पीएमआई का 50 के आसपास बना रहना यह संकेत देता है कि अर्थव्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं हो रहा है और गतिविधियां स्थिर अवस्था में हैं.

ये भी पढ़ें: लगातार तीन दिनों की गिरावट के बाद चमका सोना, जानें आज 2 जनवरी को आपके शहर का ताजा भाव

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