क्या है SEBI का BER, म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है इसे समझना?
Investment Tips: अगर आप भी म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं या करने की सोच रहे हैं, तो शुरुआत से ही कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देना जरूरी है. जिनमें बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) को समझना काफी अहम है. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने खर्च दिखाने के तरीके में बदलाव करते हुए BER को लागू किया हैं. ताकि निवेशकों को फंड के असली खर्च की ज्यादा जानकारी मिल सके. आइए जानते हैं, आखिर क्या होता है बेस एक्सपेंस रेशियो. पहले खर्च समझना था मुश्किल पहले निवेशक म्यूचुअल फंड के खर्च को टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) के जरिए समझते थे. जिसमें फंड मैनेजमेंट फीस के साथ-साथ जीएसटी और STT जैसे टैक्स और दूसरे चार्ज भी शामिल होते थे. इससे यह साफ-साफ समझ पाना मुश्किल हो जाता था कि असल में फंड हाउस कितना चार्ज ले रहा है, क्योंकि सभी खर्च एक साथ जोड़ कर दिखाए जाते थे. BER से खर्च समझना हुआ आसान अब बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) में सिर्फ म्यूचुअल फंड स्कीम को चलाने से जुड़े खर्च को ही दिखाया जाता है. वहीं, जीएसटी और STT जैसे दूसरे चार्ज अलग से दिखाए जाते हैं. इससे निवेशकों को यह साफ समझ में आता है कि फंड हाउस वास्तव में कितना पैसा निवेशकों से चार्ज कर रही है. साथ ही बाकी चार्ज की जानकारी भी अलग होने से समझने में आसानी होती है. BER में क्या शामिल होता है? बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) में म्यूचुअल फंड से जुड़ी जरूरी जानकारी को शामिल किया जाता है. जैसे फंड मैनेजमेंट फीस, डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन और रजिस्ट्रार व ट्रांसफर एजेंट (RTA) चार्ज. जिससे निवेशकों को साफ पता चलता है कि, उनका पैसा किन चीजों पर खर्च हो रहा हैं. BER और TER में क्या फर्क है? बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) और टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) के बीच अंतर की बात करें तो, BER सिर्फ फंड हाउस के खर्च को दिखाता है. यानी इसमें केवल ऑपरेटिंग लागत शामिल होती है. वहीं TER वह कुल खर्च होता है जो निवेशकों को देना पड़ता है. इसमें BER के साथ-साथ सभी टैक्स और रेगुलेटरी चार्ज भी जुड़े होते हैं. यह भी पढ़ें: ट्रंप की होर्मुज करतूत से एक्शन में सरकार, पेट्रोल-डीजल और LPG पर कसी कमर, राज्यों को दिए ये निर्देश
Investment Tips: अगर आप भी म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं या करने की सोच रहे हैं, तो शुरुआत से ही कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देना जरूरी है. जिनमें बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) को समझना काफी अहम है.
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने खर्च दिखाने के तरीके में बदलाव करते हुए BER को लागू किया हैं. ताकि निवेशकों को फंड के असली खर्च की ज्यादा जानकारी मिल सके. आइए जानते हैं, आखिर क्या होता है बेस एक्सपेंस रेशियो.
पहले खर्च समझना था मुश्किल
पहले निवेशक म्यूचुअल फंड के खर्च को टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) के जरिए समझते थे. जिसमें फंड मैनेजमेंट फीस के साथ-साथ जीएसटी और STT जैसे टैक्स और दूसरे चार्ज भी शामिल होते थे. इससे यह साफ-साफ समझ पाना मुश्किल हो जाता था कि असल में फंड हाउस कितना चार्ज ले रहा है, क्योंकि सभी खर्च एक साथ जोड़ कर दिखाए जाते थे.
BER से खर्च समझना हुआ आसान
अब बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) में सिर्फ म्यूचुअल फंड स्कीम को चलाने से जुड़े खर्च को ही दिखाया जाता है. वहीं, जीएसटी और STT जैसे दूसरे चार्ज अलग से दिखाए जाते हैं.
इससे निवेशकों को यह साफ समझ में आता है कि फंड हाउस वास्तव में कितना पैसा निवेशकों से चार्ज कर रही है. साथ ही बाकी चार्ज की जानकारी भी अलग होने से समझने में आसानी होती है.
BER में क्या शामिल होता है?
बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) में म्यूचुअल फंड से जुड़ी जरूरी जानकारी को शामिल किया जाता है. जैसे फंड मैनेजमेंट फीस, डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन और रजिस्ट्रार व ट्रांसफर एजेंट (RTA) चार्ज. जिससे निवेशकों को साफ पता चलता है कि, उनका पैसा किन चीजों पर खर्च हो रहा हैं.
BER और TER में क्या फर्क है?
बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) और टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) के बीच अंतर की बात करें तो, BER सिर्फ फंड हाउस के खर्च को दिखाता है. यानी इसमें केवल ऑपरेटिंग लागत शामिल होती है. वहीं TER वह कुल खर्च होता है जो निवेशकों को देना पड़ता है. इसमें BER के साथ-साथ सभी टैक्स और रेगुलेटरी चार्ज भी जुड़े होते हैं.
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ट्रंप की होर्मुज करतूत से एक्शन में सरकार, पेट्रोल-डीजल और LPG पर कसी कमर, राज्यों को दिए ये निर्देश
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