क्या सरकारी बैंक वाले केंद्रीय कर्मचारी होते हैं?
बैंक यूनियनों ने 28 से 30 सितंबर तक लगातार तीन दिन की हड़ताल बुलाई है. इस दौरान ऑनलाइन और डिजिटल बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहेंगी, लेकिन बैंकों की शाखाओं में कामकाज पूरी तरह बंद रहेगा. हड़ताल की वजह से केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में देरी न हो, इसके लिए वित्त मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों और विभागों को 25 सितंबर तक ही भुगतान खातों में भेजने के निर्देश दिए हैं. इस फैसले के बाद एक स्वाभाविक सवाल उठता है कि क्या सरकारी बैंकों में काम करने वाले कर्मचारी भी केंद्रीय कर्मचारी माने जाते हैं. जानिए इसका सही जवाब क्या है. दरअसल भारत में सरकारी कर्मचारियों को मुख्य रूप से दो तरीकों से बांटा जाता है. पहले यह कि वह किस सरकार या संस्थान के अधीन काम करते हैं, फिर पद के स्तर यानी ग्रुप के हिसाब से. सरकार-संस्थान की श्रेणी में कौन आते हैं? श्रेणी कौन आते हैं उदाहरण केंद्रीय सरकारी कर्मचारी केंद्र सरकार के मंत्रालय, विभाग, अटैच्ड या सबऑर्डिनेट ऑफिस आईएएस-आईपीएस, आयकर, रेलवे (रेलवे बोर्ड के तहत), डाक, रक्षा नागरिक कर्मचारी राज्य सरकारी कर्मचारी राज्य सरकार के विभाग पीसीएस, राज्य पुलिस, राज्य शिक्षा, राज्य स्वास्थ्य स्थानीय निकाय कर्मचारी नगर निगम, पंचायत और नगर पालिका नगर निगम क्लर्क, सफाईकर्मी, नगरपालिका इंजीनियर पब्लिक सेक्टर (पीएसयू-पीएसबी) कर्मचारी सरकार की बहुमत हिस्सेदारी वाली कंपनियां या बैंक एसबीआई, पीएनबी, ओएनजीसी, बीएचईएल, एलआईसी, रेलवे पीएसयू स्वायत्त संस्था / संवैधानिक निकाय सरकार से जुड़े, लेकिन स्वतंत्र निकाय यूपीएससी, चुनाव आयोग, आरबीआई, विश्वविद्यालय, आईआईटी/एम्स के कुछ पद पिछली बात के हिसाब से पब्लिक बैंक कर्मचारी केंद्रीय कर्मचारी नहीं, बल्कि पब्लिक सेक्टर बैंक कर्मचारी हैं. केंद्र और ज्यादातर राज्यों में पदों को ग्रुप ए, बी, सी में बांटा जाता है. पुराना ग्रुप डी अब ज्यादातर ग्रुप सी में मिला दिया गया है. ग्रुप ए में कौन-कौन शामिल? ग्रुप ए की श्रेणी में सबसे ऊपरी स्तर पर नीति बनाने, प्रशासन और नेतृत्व वाले पद आते हैं. यानी ज्यादातर गजेटेड अधिकारी. जैसे- आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, आईआरएस, इसरो या डीआरडीओ के वैज्ञानिक, केंद्रीय अस्पताल के डॉक्टर. ग्रुप बी में कौन-कौन शामिल? ग्रुप बी में मिड-लेवल यानी नीति लागू करवाना, सुपरविजन, कुछ गजेटेड और कुछ नॉन-गजेटेड अधिकारी शामिल होते हैं. जैसे- सेक्शन ऑफिसर, इनकम टैक्स इंस्पेक्टर, जूनियर इंजीनियर, डीएसपी (राज्य), कुछ शिक्षक पद. ग्रुप सी में कौन-कौन शामिल? इस ग्रुप में सबसे बड़ी संख्या क्लर्क, ऑपरेशनल और सपोर्ट स्टॉफ की होती है. जैसे- एलडीसी और यूडीसी, स्टेनो, कांस्टेबल, टैक्स असिस्टेंट, तकनीशियन और बैंक क्लर्क. ग्रुप डी में कौन-कौन शामिल? ग्रुप डी अब लगभग खत्म कर दिया गया है. इस ग्रुप में चपरासी, सफाईकर्मी, माली, ड्राइवर जैसे छोटे पद वाले लोग आते हैं. बता दें कि अब नई भर्ती ज्यादातर ग्रुप सी में या आउटसोर्स होते हैं. दो छोटे, लेकिन जरूरी विभाजन गजेटेड बनाम नॉन-गजेटेड गजेटेड- नियुक्ति गजट में छपती है, कुछ कानूनी अधिकार होते हैं (ग्रुप ए और कुछ ग्रुप बी). नॉन-गजेटेड- बाकी ज्यादातर ग्रुप बी और पूरा ग्रुप सी. स्थायी बनाम अस्थायी या कॉन्ट्रैक्ट स्थायी- सरकारी कर्मचारी. कॉन्ट्रैक्ट- आउटसोर्स, दैनिक वेतन भोगी. ये लोग सरकारी दफ्तर में काम तो करते हैं, लेकिन वही सेवा नियम और पेंशन नहीं मिलती. यह भी पढ़ें- UPI पर चार्ज, अब क्या क्रेडिट डेबिट कार्ड इस्तेमाल करना पड़ेगा सस्ता? NPCI ने बताया
बैंक यूनियनों ने 28 से 30 सितंबर तक लगातार तीन दिन की हड़ताल बुलाई है. इस दौरान ऑनलाइन और डिजिटल बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहेंगी, लेकिन बैंकों की शाखाओं में कामकाज पूरी तरह बंद रहेगा. हड़ताल की वजह से केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में देरी न हो, इसके लिए वित्त मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों और विभागों को 25 सितंबर तक ही भुगतान खातों में भेजने के निर्देश दिए हैं. इस फैसले के बाद एक स्वाभाविक सवाल उठता है कि क्या सरकारी बैंकों में काम करने वाले कर्मचारी भी केंद्रीय कर्मचारी माने जाते हैं. जानिए इसका सही जवाब क्या है.
दरअसल भारत में सरकारी कर्मचारियों को मुख्य रूप से दो तरीकों से बांटा जाता है. पहले यह कि वह किस सरकार या संस्थान के अधीन काम करते हैं, फिर पद के स्तर यानी ग्रुप के हिसाब से.
सरकार-संस्थान की श्रेणी में कौन आते हैं?
| श्रेणी | कौन आते हैं | उदाहरण |
| केंद्रीय सरकारी कर्मचारी | केंद्र सरकार के मंत्रालय, विभाग, अटैच्ड या सबऑर्डिनेट ऑफिस |
आईएएस-आईपीएस, आयकर, रेलवे (रेलवे बोर्ड के तहत), डाक, रक्षा नागरिक कर्मचारी
|
| राज्य सरकारी कर्मचारी | राज्य सरकार के विभाग | पीसीएस, राज्य पुलिस, राज्य शिक्षा, राज्य स्वास्थ्य |
| स्थानीय निकाय कर्मचारी | नगर निगम, पंचायत और नगर पालिका | नगर निगम क्लर्क, सफाईकर्मी, नगरपालिका इंजीनियर |
| पब्लिक सेक्टर (पीएसयू-पीएसबी) कर्मचारी | सरकार की बहुमत हिस्सेदारी वाली कंपनियां या बैंक | एसबीआई, पीएनबी, ओएनजीसी, बीएचईएल, एलआईसी, रेलवे पीएसयू |
| स्वायत्त संस्था / संवैधानिक निकाय | सरकार से जुड़े, लेकिन स्वतंत्र निकाय | यूपीएससी, चुनाव आयोग, आरबीआई, विश्वविद्यालय, आईआईटी/एम्स के कुछ पद |
पिछली बात के हिसाब से पब्लिक बैंक कर्मचारी केंद्रीय कर्मचारी नहीं, बल्कि पब्लिक सेक्टर बैंक कर्मचारी हैं. केंद्र और ज्यादातर राज्यों में पदों को ग्रुप ए, बी, सी में बांटा जाता है. पुराना ग्रुप डी अब ज्यादातर ग्रुप सी में मिला दिया गया है.
ग्रुप ए में कौन-कौन शामिल?
ग्रुप ए की श्रेणी में सबसे ऊपरी स्तर पर नीति बनाने, प्रशासन और नेतृत्व वाले पद आते हैं. यानी ज्यादातर गजेटेड अधिकारी. जैसे- आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, आईआरएस, इसरो या डीआरडीओ के वैज्ञानिक, केंद्रीय अस्पताल के डॉक्टर.
ग्रुप बी में कौन-कौन शामिल?
ग्रुप बी में मिड-लेवल यानी नीति लागू करवाना, सुपरविजन, कुछ गजेटेड और कुछ नॉन-गजेटेड अधिकारी शामिल होते हैं. जैसे- सेक्शन ऑफिसर, इनकम टैक्स इंस्पेक्टर, जूनियर इंजीनियर, डीएसपी (राज्य), कुछ शिक्षक पद.
ग्रुप सी में कौन-कौन शामिल?
इस ग्रुप में सबसे बड़ी संख्या क्लर्क, ऑपरेशनल और सपोर्ट स्टॉफ की होती है. जैसे- एलडीसी और यूडीसी, स्टेनो, कांस्टेबल, टैक्स असिस्टेंट, तकनीशियन और बैंक क्लर्क.
ग्रुप डी में कौन-कौन शामिल?
ग्रुप डी अब लगभग खत्म कर दिया गया है. इस ग्रुप में चपरासी, सफाईकर्मी, माली, ड्राइवर जैसे छोटे पद वाले लोग आते हैं. बता दें कि अब नई भर्ती ज्यादातर ग्रुप सी में या आउटसोर्स होते हैं.
दो छोटे, लेकिन जरूरी विभाजन
गजेटेड बनाम नॉन-गजेटेड
- गजेटेड- नियुक्ति गजट में छपती है, कुछ कानूनी अधिकार होते हैं (ग्रुप ए और कुछ ग्रुप बी).
- नॉन-गजेटेड- बाकी ज्यादातर ग्रुप बी और पूरा ग्रुप सी.
स्थायी बनाम अस्थायी या कॉन्ट्रैक्ट
- स्थायी- सरकारी कर्मचारी.
- कॉन्ट्रैक्ट- आउटसोर्स, दैनिक वेतन भोगी.
ये लोग सरकारी दफ्तर में काम तो करते हैं, लेकिन वही सेवा नियम और पेंशन नहीं मिलती.
यह भी पढ़ें- UPI पर चार्ज, अब क्या क्रेडिट डेबिट कार्ड इस्तेमाल करना पड़ेगा सस्ता? NPCI ने बताया
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