शेयर बाजार क्यों डूबा, निवेशकों को कितने हजार करोड़ का नुकसान हुआ?
शेयर बाजार में गुरुवार को ऐसी बिकवाली हुई कि निवेशकों के बीच हड़कंप मच गया. आज तो देखते ही देखते लोगों को बड़ा झटका लगा है. सेंसेक्स 1,247.71 अंक गिरकर 73,580.54 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 383.70 अंक टूटकर 23,063.10 पर आ गया. इस गिरावट में BSE पर लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू करीब 4.33 लाख करोड़ रुपए घट गई है. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि आखिर बाजार एक ही दिन में इतना क्यों टूट गया? इसके पीछे सिर्फ एक वजह तो नहीं हो सकती है. आइये स्टॉक मार्केट गिरने के पीछे के कारण को समझते हैं. सबसे बड़ी वजह क्या है? इस गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी रही है. ये बढ़कर करीब 5.11 फीसदी तक पहुंच गई, जो करीब 19 साल का ऊंचा स्तर है. जब अमेरिका में सरकारी बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है तो निवेशकों को वहां कम जोखिम वाले निवेश ज्यादा सही लगने लगते हैं. ऐसे में शेयर बाजार जैसे ज्यादा जोखिम वाले एसेट से पैसा निकल सकता है. इसका असर भारत के बाजार पर भी पड़ता है. फेट रेट भी है वजह? दूसरी बड़ी वजह अमेरिका में ब्याज दर बढ़ना भी हो सकती है. अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े हालिया आंकड़ों ने यह चिंता बढ़ाई है कि महंगाई पर काबू पाने के लिए US फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रख सकता है या आगे बढ़ा सकता है. अगर अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं तो वहां निवेश ज्यादा हो सकता है. इसका मतलब ये भी है कि विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय शेयर बाजार में आने वाला पैसा कम हो सकता है. कच्चा तेल है तीसरी वजह? बाजार के लिए तीसरी बड़ी चिंता क्रूड ऑयल है. बेंट क्रूड की कीमत फिर से 102 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर देश के इंपोर्ट बिल, रुपए, महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है. डॉलर और रुपए से भी बढ़ा दबाव? तेल की बढ़ती कीमत और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बीच डॉलर भी मजबूत हुआ है. इससे उभरते बाजारों की करेंसी और शेयर बाजार पर दबाव बढ़ता है. भारत के लिए कमजोर रुपया खास तौर पर चिंता की बात है क्योंकि महंगे डॉलर की वजह से कच्चे तेल और दूसरी जरूरी चीजों का इंपोर्ट महंगा पड़ सकता है. यही वजह है कि बाजार के निवेशक इस समय ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं. बैंकिंग और इंश्योरेंस शेयरों में बिकवाली गिरावट सिर्फ आईटी या किसी एक सेक्टर में नहीं रही है. बैंकिंग और फाइनेंसियल सर्विसेस स्टॉक पर दबाव देखने को मिला है. बजाज फाइनेंस, एक्सिक बैंक और बजाज फिनसर्व जैसे शेयरों में तेज गिरावट आई है, वहीं इसके अलावा इंश्योरेंस सेक्टर भी दबाव में दिखा. IRDAI की प्रस्तावित नए कमीशन कैप को लेकर बाजार में चिंता बनी रही जिससे कुछ इंश्योरेंस और फाइनेंसियल स्टॉक पर भी दबाव देखने को मिला है. UPI पर चार्ज, अब क्या क्रेडिट डेबिट कार्ड इस्तेमाल करना पड़ेगा सस्ता? NPCI ने बताया
शेयर बाजार में गुरुवार को ऐसी बिकवाली हुई कि निवेशकों के बीच हड़कंप मच गया. आज तो देखते ही देखते लोगों को बड़ा झटका लगा है. सेंसेक्स 1,247.71 अंक गिरकर 73,580.54 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 383.70 अंक टूटकर 23,063.10 पर आ गया. इस गिरावट में BSE पर लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू करीब 4.33 लाख करोड़ रुपए घट गई है.
लेकिन बड़ा सवाल ये है कि आखिर बाजार एक ही दिन में इतना क्यों टूट गया? इसके पीछे सिर्फ एक वजह तो नहीं हो सकती है. आइये स्टॉक मार्केट गिरने के पीछे के कारण को समझते हैं.
सबसे बड़ी वजह क्या है?
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी रही है. ये बढ़कर करीब 5.11 फीसदी तक पहुंच गई, जो करीब 19 साल का ऊंचा स्तर है. जब अमेरिका में सरकारी बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है तो निवेशकों को वहां कम जोखिम वाले निवेश ज्यादा सही लगने लगते हैं. ऐसे में शेयर बाजार जैसे ज्यादा जोखिम वाले एसेट से पैसा निकल सकता है. इसका असर भारत के बाजार पर भी पड़ता है.
फेट रेट भी है वजह?
दूसरी बड़ी वजह अमेरिका में ब्याज दर बढ़ना भी हो सकती है. अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े हालिया आंकड़ों ने यह चिंता बढ़ाई है कि महंगाई पर काबू पाने के लिए US फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रख सकता है या आगे बढ़ा सकता है.
अगर अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं तो वहां निवेश ज्यादा हो सकता है. इसका मतलब ये भी है कि विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय शेयर बाजार में आने वाला पैसा कम हो सकता है.
कच्चा तेल है तीसरी वजह?
बाजार के लिए तीसरी बड़ी चिंता क्रूड ऑयल है. बेंट क्रूड की कीमत फिर से 102 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर देश के इंपोर्ट बिल, रुपए, महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है.
डॉलर और रुपए से भी बढ़ा दबाव?
तेल की बढ़ती कीमत और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बीच डॉलर भी मजबूत हुआ है. इससे उभरते बाजारों की करेंसी और शेयर बाजार पर दबाव बढ़ता है. भारत के लिए कमजोर रुपया खास तौर पर चिंता की बात है क्योंकि महंगे डॉलर की वजह से कच्चे तेल और दूसरी जरूरी चीजों का इंपोर्ट महंगा पड़ सकता है. यही वजह है कि बाजार के निवेशक इस समय ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं.
बैंकिंग और इंश्योरेंस शेयरों में बिकवाली
गिरावट सिर्फ आईटी या किसी एक सेक्टर में नहीं रही है. बैंकिंग और फाइनेंसियल सर्विसेस स्टॉक पर दबाव देखने को मिला है. बजाज फाइनेंस, एक्सिक बैंक और बजाज फिनसर्व जैसे शेयरों में तेज गिरावट आई है, वहीं इसके अलावा इंश्योरेंस सेक्टर भी दबाव में दिखा. IRDAI की प्रस्तावित नए कमीशन कैप को लेकर बाजार में चिंता बनी रही जिससे कुछ इंश्योरेंस और फाइनेंसियल स्टॉक पर भी दबाव देखने को मिला है.
UPI पर चार्ज, अब क्या क्रेडिट डेबिट कार्ड इस्तेमाल करना पड़ेगा सस्ता? NPCI ने बताया
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