कहां छिपा है पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमाइंड हाशिम मूसा? सुरक्षाबलों को मिल गई खुफिया जानकारी

Pahalgam Terror Attack: पहलगाम आतंकी हमले के गुनहगार हाशिम मूसा और उसके साथी अभी भी कश्मीर में मौजूद है. सूत्रों के हवाले से इसकी जानकारी मिली है. 22 अप्रैल को हुए इस आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे. इस घटना के बाद से सुरक्षा एजेंसियां साजिशकर्ताओं और आतंकवादियों का पता लगाने में जुटी हुई है. सुरक्षा एजेंसियों को पूरा शक है कि आतंकी घने जंगलों में छिपे हुए हैं. ऐसे में आतंकियों की घेराबंदी की पूरी तैयारी है. सुरक्षा एजेंसियों को पूरा शक है कि आतंकी मूसा और उसके साथी यूरोप का Alpine Quest ऐप इस्तेमाल कर रहे हैं, जो बिना इंटरनेट और जीपीएस के जंगलों में ट्रैकिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. जानकारी ये भी है कि आतंकी एक चीनी मिलिट्री कम्युनिकेशन डिवाइस इस्तेमाल कर रहे हैं जो बहुत संभव है कि चीनी सेना ने पाकिस्तानी सेना को दी होगी और अब आईएसआई के जरिए आतंकियों तक पहुंच गई है. दुनियाभर के एडवांस आर्मी इस डिवाइस का इस्तेमाल करती हैं ताकि वॉर-जोन से कम्युनिकेशन के साथ-साथ वीडियो तक भी कमांड सेंटर तक भेजे जा सके. खबर में अपडेट जारी है...

May 3, 2025 - 10:30
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कहां छिपा है पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमाइंड हाशिम मूसा? सुरक्षाबलों को मिल गई खुफिया जानकारी

Pahalgam Terror Attack: पहलगाम आतंकी हमले के गुनहगार हाशिम मूसा और उसके साथी अभी भी कश्मीर में मौजूद है. सूत्रों के हवाले से इसकी जानकारी मिली है. 22 अप्रैल को हुए इस आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे. इस घटना के बाद से सुरक्षा एजेंसियां साजिशकर्ताओं और आतंकवादियों का पता लगाने में जुटी हुई है.

सुरक्षा एजेंसियों को पूरा शक है कि आतंकी घने जंगलों में छिपे हुए हैं. ऐसे में आतंकियों की घेराबंदी की पूरी तैयारी है. सुरक्षा एजेंसियों को पूरा शक है कि आतंकी मूसा और उसके साथी यूरोप का Alpine Quest ऐप इस्तेमाल कर रहे हैं, जो बिना इंटरनेट और जीपीएस के जंगलों में ट्रैकिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

जानकारी ये भी है कि आतंकी एक चीनी मिलिट्री कम्युनिकेशन डिवाइस इस्तेमाल कर रहे हैं जो बहुत संभव है कि चीनी सेना ने पाकिस्तानी सेना को दी होगी और अब आईएसआई के जरिए आतंकियों तक पहुंच गई है. दुनियाभर के एडवांस आर्मी इस डिवाइस का इस्तेमाल करती हैं ताकि वॉर-जोन से कम्युनिकेशन के साथ-साथ वीडियो तक भी कमांड सेंटर तक भेजे जा सके.

खबर में अपडेट जारी है...

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