एक गलत नंबर और फंस गए 3.25 लाख, हाई कोर्ट ने बैंक से कराई भरपाई

कर्नाटक हाईकोर्ट ने फेडर्ल बैंक को एक महिला के उसके 3.25 लाख रुपये वापिस लौटाने का आदेश सुनाया. जिसमें महिला ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि वह पैसे अपने पिता को आरटिजिएस के जरिए भेजना चाहती थी, लेकिन पिंन का गलत कोड डालने के कारण पैसे किसी और के बैंक खाते में चला गया था. क्या था पूरा मामला? यह पूरा मामला कर्नाटक की रहने वाली एक महिला नाम नुजौबा जलील से जुड़ा है. दरसल 17 दिसंबर 2025 को नुजौबा ने अपने पिता को आरटिजिएस के द्वारा शुल्क भेजा था, लेकिन पिंन के आखिरी चार अंक गलत डालने के कारण रकम स्टेंडरड इंजीनिरिंग वर्कस के एक बैंक के खाते में पहुंच गयी थी. जिसके खाते में वह शुल्क पहुंचा उसके मालिक की कोई जानकारी नहीं मिल पा रही थी. मदद के लिए पहुंची आरबिआई   नुजौबा को जब एक जगह से प्राप्त संतुष्टि नहीं मिल पा रही थी, तब उसने RBI का दरवाजा खटखटाया. लेकिन अफसोस की बात यह है कि वहां से भी उसकी मांग को खारिज कर दिया गया था. RBI का कहना था कि जिनके पास रकम पहुंची है उनकी सहमती के बगैर उनके पैसे वापिस नहीं मिल सकते है.  यह भी पढ़े- सोलर पैनल लगवाने के बाद कितना आएगा मेंटेनेंस खर्च? जानें पूरी जानकारी क्या था कोर्ट का फैसला? जब महिला के लिए सभी दरवाजे बंद हो चुके है तो उसने कर्नाटक हाईकोर्ट जाने का फैसला किया. कोर्ट में अपनी दलील देने के बाद, कोर्ट ने यह जवाब दिया कि जिस इंसान के खाते में रुपये पहुंचे है उसका कोई अता-पता नहीं है, और कोई उस रकम का गलत इस्तेमाल कर सकता है. महिला ने यह भी कहा कि अपनी रकम से वंचित रहना संविधान 300A के तहत अपने अधिकारों का उल्लंघन माना जाता है.  अदालत ने बैंक को रकम महिला के खाते में दुबारा से ट्रांसफर कर देने का आदेश सुनाया. कोर्ट ने ध्यान दिया कि स्टेंडरड इंजीनिरिंग वर्कस को भेजा गया नोटिस वापिस आ गया था, और जिसके खाते में रकम पहुंची थी उससे भी कोेई संपर्क नहीं हो पा रहा था. इसके बाद न्यायमूर्ति सी एम पुनाचा ने बैंक को 3.25 लाख रुपये देने का आदेश सुनाया.  यह भी पढ़े- बीमा खरीद रहे हो? जानिए साइबर ठगों के 5 नए और खतरनाक पैंतरे यह भी देखे- 

Sep 15, 2026 - 08:30
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एक गलत नंबर और फंस गए 3.25 लाख, हाई कोर्ट ने बैंक से कराई भरपाई

कर्नाटक हाईकोर्ट ने फेडर्ल बैंक को एक महिला के उसके 3.25 लाख रुपये वापिस लौटाने का आदेश सुनाया. जिसमें महिला ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि वह पैसे अपने पिता को आरटिजिएस के जरिए भेजना चाहती थी, लेकिन पिंन का गलत कोड डालने के कारण पैसे किसी और के बैंक खाते में चला गया था. 

क्या था पूरा मामला?

यह पूरा मामला कर्नाटक की रहने वाली एक महिला नाम नुजौबा जलील से जुड़ा है. दरसल 17 दिसंबर 2025 को नुजौबा ने अपने पिता को आरटिजिएस के द्वारा शुल्क भेजा था, लेकिन पिंन के आखिरी चार अंक गलत डालने के कारण रकम स्टेंडरड इंजीनिरिंग वर्कस के एक बैंक के खाते में पहुंच गयी थी. जिसके खाते में वह शुल्क पहुंचा उसके मालिक की कोई जानकारी नहीं मिल पा रही थी. 

मदद के लिए पहुंची आरबिआई  

नुजौबा को जब एक जगह से प्राप्त संतुष्टि नहीं मिल पा रही थी, तब उसने RBI का दरवाजा खटखटाया. लेकिन अफसोस की बात यह है कि वहां से भी उसकी मांग को खारिज कर दिया गया था. RBI का कहना था कि जिनके पास रकम पहुंची है उनकी सहमती के बगैर उनके पैसे वापिस नहीं मिल सकते है. 

यह भी पढ़े- सोलर पैनल लगवाने के बाद कितना आएगा मेंटेनेंस खर्च? जानें पूरी जानकारी

क्या था कोर्ट का फैसला?

जब महिला के लिए सभी दरवाजे बंद हो चुके है तो उसने कर्नाटक हाईकोर्ट जाने का फैसला किया. कोर्ट में अपनी दलील देने के बाद, कोर्ट ने यह जवाब दिया कि जिस इंसान के खाते में रुपये पहुंचे है उसका कोई अता-पता नहीं है, और कोई उस रकम का गलत इस्तेमाल कर सकता है. महिला ने यह भी कहा कि अपनी रकम से वंचित रहना संविधान 300A के तहत अपने अधिकारों का उल्लंघन माना जाता है. 

अदालत ने बैंक को रकम महिला के खाते में दुबारा से ट्रांसफर कर देने का आदेश सुनाया. कोर्ट ने ध्यान दिया कि स्टेंडरड इंजीनिरिंग वर्कस को भेजा गया नोटिस वापिस आ गया था, और जिसके खाते में रकम पहुंची थी उससे भी कोेई संपर्क नहीं हो पा रहा था. इसके बाद न्यायमूर्ति सी एम पुनाचा ने बैंक को 3.25 लाख रुपये देने का आदेश सुनाया. 

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