एंटी पेपर लीक बिल पर संसद में बहस, पुराने कानून और नए बिल में कितना अंतर?
Anti Paper Leak Bill: देशभर में नीट समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा प्रणाली को लेकर उठे सवाल अब संसद तक पहुंच चुके हैं. आज लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (Prevention of Unfair Means Act) संशोधन विधेयक 2026 पर चर्चा होने की संभावना है. पिछले एक सप्ताह से मानसून सत्र में जारी राजनीतिक गतिरोध के बाद यह पहली बड़ी विधायी बहस मानी जा रही है. सरकार का कहना है कि नया संशोधन कानून पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वाले संगठित गिरोहों पर पहले से कहीं ज्यादा सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा, जबकि विपक्ष का कहना है कि केवल कानून सख्त करने से समस्या का समाधान नहीं होगा. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि एंटी पेपर लीक के पुराने कानून और नए बिल में कितना अंतर है. एंटी पेपर लीक पर संसद में बहस नीट यूजी विवाद के बाद देशभर में छात्रों के प्रदर्शन हुए. दिल्ली के जंतर मंतर समेत कई जगहों पर आंदोलन हुए और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग उठी. इसी बीच केंद्र सरकार ने 2024 में लागू कानून को और सख्त बनाने के लिए संशोधन विधेयक तैयार किया है. सोमवार को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे लोकसभा में पेश किया, हालांकि सोमवार को विपक्ष ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए सदन में हंगामा किया, जिससे बहस नहीं हो सकी. अब सभी दलों के बीच चर्चा पर सहमति बनने के बाद आज इस बिल पर बहस होने की उम्मीद है. 2024 के कानून में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी? केंद्र सरकार ने 2024 में सार्वजनिक परीक्षा में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं को रोकने के लिए कानून बनाया था. यह कानून यूपीएससी, एसएससी, एनटीए, रेलवे भर्ती बोर्ड, आईबीपीएस और केंद्र सरकार की अन्य अधिसूचित परीक्षाओं पर लागू किया गया था. इसके बावजूद पिछले दो वर्षों में कई परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के आरोप सामने आए. सरकार का कहना है कि केवल सजा का प्रावधान पर्याप्त नहीं था, बल्कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया को भी समयबद्ध और प्रभावी बनाना जरूरी हो गया, इसी वजह से संशोधन लाया गया है. पुराने कानून और नए बिल में अंतर सबसे बड़ा बदलाव सजा और जुर्माने को लेकर किया गया है. 2024 के कानून में सामान्य मामलों में तीन से पांच वर्ष तक की जेल का प्रावधान था, जबकि संशोधन के बाद गंभीर मामलों में सजा बढ़ाकर अधिकतम 10 वर्ष तक जा सकती है. जुर्माने की राशि भी कई गुना बढ़ाई गई है. पहले जहां अधिकतम 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता था, वहीं अब संगठित अपराध और बड़े मामलों में 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है. परीक्षा एजेंसी और सर्विस प्रोवाइडर संस्थान पर भी पहले से कई ज्यादा आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है. ये भी पढ़ें-CBSE की दूसरी बोर्ड परीक्षा से बढ़ा पास पर्सेंटेज, छात्रों को राहत आसान शब्दों में समझे पुराने बिल और नए बिल में अंतर प्रावधान 2024 का पुराना बिल नया संशोधन 2026 सामान्य मामलों में सजा 3 से 5 साल 10 साल तक सजा अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये कई मामलों में करोड़ों रुपये तकसंगठित गिरोह पर कार्रवाई अधिकतम 1 करोड़ रुपये अब 10 करोड़ रुपये तक जुर्मानाजांच की समय सीमा तय नहीं 60 दिनों में जांच पूरी ट्रायल सामान्य अदालत फास्ट ट्रैक कोर्ट में रोजाना सुनवाई फैसला कोई तय समय नहीं 90 दिन के अंदर ट्रायल पूरा करने का टारगेटजांच एजेंसी सामान्य व्यवस्था विशेष एसटीएफ का गठन सरकार ने और क्या उठाए कदम? सरकार ने नई परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कई प्रशासनिक फैसले भी लिए हैं. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में संस्थागत बदलाव शुरू किए गए हैं. परीक्षा संचालन, साइबर सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक और टेस्ट सेंटर प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों की नियुक्ति की जा रही है. साथ ही फ्यूचर में ज्यादा परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित बनाने और तकनीकी सुरक्षा बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी छात्रों को संबोधित करते हुए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा
Anti Paper Leak Bill: देशभर में नीट समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा प्रणाली को लेकर उठे सवाल अब संसद तक पहुंच चुके हैं. आज लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (Prevention of Unfair Means Act) संशोधन विधेयक 2026 पर चर्चा होने की संभावना है. पिछले एक सप्ताह से मानसून सत्र में जारी राजनीतिक गतिरोध के बाद यह पहली बड़ी विधायी बहस मानी जा रही है. सरकार का कहना है कि नया संशोधन कानून पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वाले संगठित गिरोहों पर पहले से कहीं ज्यादा सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा, जबकि विपक्ष का कहना है कि केवल कानून सख्त करने से समस्या का समाधान नहीं होगा. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि एंटी पेपर लीक के पुराने कानून और नए बिल में कितना अंतर है.
एंटी पेपर लीक पर संसद में बहस
नीट यूजी विवाद के बाद देशभर में छात्रों के प्रदर्शन हुए. दिल्ली के जंतर मंतर समेत कई जगहों पर आंदोलन हुए और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग उठी. इसी बीच केंद्र सरकार ने 2024 में लागू कानून को और सख्त बनाने के लिए संशोधन विधेयक तैयार किया है. सोमवार को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे लोकसभा में पेश किया, हालांकि सोमवार को विपक्ष ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए सदन में हंगामा किया, जिससे बहस नहीं हो सकी. अब सभी दलों के बीच चर्चा पर सहमति बनने के बाद आज इस बिल पर बहस होने की उम्मीद है.
2024 के कानून में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?
केंद्र सरकार ने 2024 में सार्वजनिक परीक्षा में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं को रोकने के लिए कानून बनाया था. यह कानून यूपीएससी, एसएससी, एनटीए, रेलवे भर्ती बोर्ड, आईबीपीएस और केंद्र सरकार की अन्य अधिसूचित परीक्षाओं पर लागू किया गया था. इसके बावजूद पिछले दो वर्षों में कई परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के आरोप सामने आए. सरकार का कहना है कि केवल सजा का प्रावधान पर्याप्त नहीं था, बल्कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया को भी समयबद्ध और प्रभावी बनाना जरूरी हो गया, इसी वजह से संशोधन लाया गया है.
पुराने कानून और नए बिल में अंतर
सबसे बड़ा बदलाव सजा और जुर्माने को लेकर किया गया है. 2024 के कानून में सामान्य मामलों में तीन से पांच वर्ष तक की जेल का प्रावधान था, जबकि संशोधन के बाद गंभीर मामलों में सजा बढ़ाकर अधिकतम 10 वर्ष तक जा सकती है. जुर्माने की राशि भी कई गुना बढ़ाई गई है. पहले जहां अधिकतम 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता था, वहीं अब संगठित अपराध और बड़े मामलों में 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है. परीक्षा एजेंसी और सर्विस प्रोवाइडर संस्थान पर भी पहले से कई ज्यादा आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है.
ये भी पढ़ें-CBSE की दूसरी बोर्ड परीक्षा से बढ़ा पास पर्सेंटेज, छात्रों को राहत
आसान शब्दों में समझे पुराने बिल और नए बिल में अंतर
प्रावधान 2024 का पुराना बिल नया संशोधन 2026
सामान्य मामलों में सजा 3 से 5 साल 10 साल तक सजा
अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये कई मामलों में करोड़ों रुपये तक
संगठित गिरोह पर कार्रवाई अधिकतम 1 करोड़ रुपये अब 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना
जांच की समय सीमा तय नहीं 60 दिनों में जांच पूरी
ट्रायल सामान्य अदालत फास्ट ट्रैक कोर्ट में रोजाना सुनवाई
फैसला कोई तय समय नहीं 90 दिन के अंदर ट्रायल पूरा करने का टारगेट
जांच एजेंसी सामान्य व्यवस्था विशेष एसटीएफ का गठन
सरकार ने और क्या उठाए कदम?
सरकार ने नई परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कई प्रशासनिक फैसले भी लिए हैं. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में संस्थागत बदलाव शुरू किए गए हैं. परीक्षा संचालन, साइबर सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक और टेस्ट सेंटर प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों की नियुक्ति की जा रही है. साथ ही फ्यूचर में ज्यादा परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित बनाने और तकनीकी सुरक्षा बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी छात्रों को संबोधित करते हुए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा जाता चुके हैं. सरकार ने पूर्व यूआईडीएआई प्रमुख नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति का गठन भी किया है जो परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने के सुझाव देगी.
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