अरावली वाले अपने ही फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, जयराम रमेश बोले- पर्यावरण की जीत; केंद्रीय मंत्री से मांगा इस्तीफा
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने अरावली पर्वतमाला की नई परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने को पर्यावरण के लिए बड़ी राहत बताया है. उन्होंने कहा कि यह फैसला किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति की नहीं, बल्कि देश के पर्यावरण को बचाने और लोगों को साफ हवा देने की दिशा में एक अहम कदम है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यह लड़ाई अभी लंबी है और इसे पूरी तरह खत्म करना जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागतजयराम रमेश ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं. उन्होंने बताया कि अरावली की नई परिभाषा पर दोबारा विचार किया जाना था, जिसका फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया और सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी पहले से ही विरोध कर रही थी. ऐसे में कोर्ट की रोक एक सकारात्मक संकेत है. उन्होंने इसे पर्यावरण के लिए एक अंतरिम जीत बताया. पर्यावरण मंत्री पर लगाए गंभीर आरोपजयराम रमेश ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से पर्यावरण मंत्री उन पर और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर अरावली की नई परिभाषा को लेकर राजनीति करने का आरोप लगा रहे थे. उन्होंने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट में सच्चाई सामने आ गई है और कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा आगे बढ़ाई जा रही नई परिभाषा पर रोक लगा दी है. 'अरावली के संवेदनशील इकोसिस्टम को खत्म किया जा रहा था'उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अरावली के संवेदनशील पर्यावरण तंत्र को कमजोर करने की कोशिश कर रही थी, जो राजस्थान के 19 जिलों समेत पूरे उत्तर भारत के लिए बेहद जरूरी है. जयराम रमेश ने कहा कि एक तरफ सरिस्का रिजर्व में बाघों के अहम आवास की सीमाओं में बदलाव किया जा रहा है और दूसरी तरफ अरावली को लेकर सवाल उठाने वालों पर राजनीति करने का आरोप लगाया जा रहा था. पर्यावरण मंत्री से इस्तीफे की मांगजयराम रमेश ने कहा कि पर्यावरण मंत्री अरावली की परिभाषा बदलने की वकालत कर रहे थे और आलोचना करने वालों पर आरोप लगा रहे थे. ऐसे में उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए. उन्होंने प्रधानमंत्री से भी मांग की कि वे पर्यावरण मंत्री से इस्तीफा लें.
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने अरावली पर्वतमाला की नई परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने को पर्यावरण के लिए बड़ी राहत बताया है. उन्होंने कहा कि यह फैसला किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति की नहीं, बल्कि देश के पर्यावरण को बचाने और लोगों को साफ हवा देने की दिशा में एक अहम कदम है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यह लड़ाई अभी लंबी है और इसे पूरी तरह खत्म करना जरूरी है.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत
जयराम रमेश ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं. उन्होंने बताया कि अरावली की नई परिभाषा पर दोबारा विचार किया जाना था, जिसका फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया और सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी पहले से ही विरोध कर रही थी. ऐसे में कोर्ट की रोक एक सकारात्मक संकेत है. उन्होंने इसे पर्यावरण के लिए एक अंतरिम जीत बताया.
पर्यावरण मंत्री पर लगाए गंभीर आरोप
जयराम रमेश ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से पर्यावरण मंत्री उन पर और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर अरावली की नई परिभाषा को लेकर राजनीति करने का आरोप लगा रहे थे. उन्होंने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट में सच्चाई सामने आ गई है और कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा आगे बढ़ाई जा रही नई परिभाषा पर रोक लगा दी है.
'अरावली के संवेदनशील इकोसिस्टम को खत्म किया जा रहा था'
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अरावली के संवेदनशील पर्यावरण तंत्र को कमजोर करने की कोशिश कर रही थी, जो राजस्थान के 19 जिलों समेत पूरे उत्तर भारत के लिए बेहद जरूरी है. जयराम रमेश ने कहा कि एक तरफ सरिस्का रिजर्व में बाघों के अहम आवास की सीमाओं में बदलाव किया जा रहा है और दूसरी तरफ अरावली को लेकर सवाल उठाने वालों पर राजनीति करने का आरोप लगाया जा रहा था.
पर्यावरण मंत्री से इस्तीफे की मांग
जयराम रमेश ने कहा कि पर्यावरण मंत्री अरावली की परिभाषा बदलने की वकालत कर रहे थे और आलोचना करने वालों पर आरोप लगा रहे थे. ऐसे में उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए. उन्होंने प्रधानमंत्री से भी मांग की कि वे पर्यावरण मंत्री से इस्तीफा लें.
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