अब अमेरिका में पढ़ाई के बाद नौकरी मिलना आसान नहीं, देने होंगे एक करोड़
अमेरिका में पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद नौकरी करने का रास्ता अब और महंगा हो सकता है. दरअसल, ट्रंप सरकार ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) को लेकर एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जिसमें विदेशी छात्रों से करीब 1 लाख डॉलर यानी लगभग 96 लाख रुपये की फीस ली जा सकती है. फिलहाल छात्रों को यह रकम जमा नहीं करनी है, अभी यह प्रस्ताव के स्तर पर है. OPT के तहत एफ 1 वीजा पर अमेरिका में पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्रों को डिग्री पूरी करने के बाद अपनी पढ़ाई से जुड़े क्षेत्र में काम करने का मौका मिलता है. सामान्य तौर पर यह अवधि 12 महीने तक होती है, जबकि STEM से जुड़े छात्रों को अतिरिक्त 24 महीने का समय मिल सकता है. इस तरह एलिजिल STEM छात्रों के लिए कुल अवधि 3 साल तक हो सकती है. व्हाइट हाउस की समीक्षा हुई पूरी OPT फीस से जुड़ा प्रस्ताव अमेरिकी डेवलपमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी की इमिग्रेशन एंड कस्टम एनफोर्समेंट की ओर से 20 अगस्त को व्हाइट हाउस ऑफिस ऑफ इनफार्मेशन एंड रेगुलेटरी अफेयर्स को भेजा गया था. रेगुलेटरी अफेयर्स ने 11 सितंबर को इसकी समीक्षा पूरी कर ली है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि 1 लाख डॉलर की फीस लागू हो गई है. जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित फीस की वास्तविक राशि का फिलहाल खुलासा नहीं किया गया है. 1 लाख डॉलर का आंकड़ा मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया है. प्रस्ताव को आगे नोटिस ऑफ प्रपोज्ड रूल मेकिंग के रूप में फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किया जाना है. इसके बाद लोगों और संस्थाओं से सुझाव और आपत्तियां मांगी जाएगी. यह अभी तय नहीं है कि अगर फीस लागू होती है तो उसका पेमेंट छात्र करेंगे, नौकरी देने वाली कंपनियां करेंगी या किसी दूसरे पक्ष पर इसकी जिम्मेदारी होगी. ये भी पढ़ें-न्यूजीलैंड ने किया पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा के नियमों में बदलाव, भारतीय छात्रों को भी फायदा भारतीय छात्रों पर भी पड़ सकता है असर अमेरिका में भारतीय छात्र बड़ी संख्या में पढ़ाई कर रहे हैं. जानकारी के अनुसार, अमेरिका में करीब 11 लाख विदेशी छात्र पढ़ाई कर रहे हैं. वहां 3.3 लाख से ज्यादा भारतीय छात्र रजिस्टर्ड है. वहीं 2024 में करीब 4.19 लाख विदेशी छात्र ओटीपी के तहत अमेरिका में काम कर रहे हैं. विदेशी छात्रों के लिए ओपीटी इसलिए जरूरी है, क्योंकि इससे उन्हें पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिकी कंपनी में काम करने और एक्सपीरियंस हासिल करने का अवसर मिलता है. वहीं कई छात्रों के लिए यह आगे लंबे समय तक अमेरिका में नौकरी करने और एच-1 बी जैसे वर्क वीजा की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता भी बनता है. अगर एक लाख डॉलर की फीस का प्रस्ताव लागू होता है, तो अमेरिका में पढ़ाई के बाद नौकरी करने की कुल लागत काफी बढ़ सकती है. अमेरिका में पढ़ाई को लेकर छात्रों की चिंता बढ़ी अमेरिका में पढ़ाई के लिए आवेदन करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में 15 फीसदी की कमी की रिपोर्ट भी सामने आई है. इसके पीछे सख्त वीजा और इमीग्रेशन नीतियां, अमेरिका में रहने की अवधि को लेकर बदलाव और OPT पर प्रस्तावित भारी फीस जैसी वजहों का जिक्र किया गया है. OPT फीस के अलावा अमेरिका में विदेशी छात्रों के वीजा नियमों में रहने की अवधि से जुड़े बदलाव भी प्रस्तावित है. नए नियमों के तहत के अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अधिकतम चार साल तक की रहने की अनुमति देने की व्यवस्था की जा रही है. जिनकी पढ़ाई इससे ज्यादा समय लेती है, उन्हें पढ़ाई खत्म होने से पहले विस्तार के लिए आवेदन करना होगा. ये भी पढ़ें-NTA ने जारी किया 2027 तक का एग्जाम कैलेंडर, इन परीक्षाओं का शेड्यूल जारी
अमेरिका में पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद नौकरी करने का रास्ता अब और महंगा हो सकता है. दरअसल, ट्रंप सरकार ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) को लेकर एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जिसमें विदेशी छात्रों से करीब 1 लाख डॉलर यानी लगभग 96 लाख रुपये की फीस ली जा सकती है. फिलहाल छात्रों को यह रकम जमा नहीं करनी है, अभी यह प्रस्ताव के स्तर पर है.
OPT के तहत एफ 1 वीजा पर अमेरिका में पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्रों को डिग्री पूरी करने के बाद अपनी पढ़ाई से जुड़े क्षेत्र में काम करने का मौका मिलता है. सामान्य तौर पर यह अवधि 12 महीने तक होती है, जबकि STEM से जुड़े छात्रों को अतिरिक्त 24 महीने का समय मिल सकता है. इस तरह एलिजिल STEM छात्रों के लिए कुल अवधि 3 साल तक हो सकती है.
व्हाइट हाउस की समीक्षा हुई पूरी
OPT फीस से जुड़ा प्रस्ताव अमेरिकी डेवलपमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी की इमिग्रेशन एंड कस्टम एनफोर्समेंट की ओर से 20 अगस्त को व्हाइट हाउस ऑफिस ऑफ इनफार्मेशन एंड रेगुलेटरी अफेयर्स को भेजा गया था. रेगुलेटरी अफेयर्स ने 11 सितंबर को इसकी समीक्षा पूरी कर ली है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि 1 लाख डॉलर की फीस लागू हो गई है. जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित फीस की वास्तविक राशि का फिलहाल खुलासा नहीं किया गया है. 1 लाख डॉलर का आंकड़ा मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया है. प्रस्ताव को आगे नोटिस ऑफ प्रपोज्ड रूल मेकिंग के रूप में फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किया जाना है. इसके बाद लोगों और संस्थाओं से सुझाव और आपत्तियां मांगी जाएगी. यह अभी तय नहीं है कि अगर फीस लागू होती है तो उसका पेमेंट छात्र करेंगे, नौकरी देने वाली कंपनियां करेंगी या किसी दूसरे पक्ष पर इसकी जिम्मेदारी होगी.
ये भी पढ़ें-न्यूजीलैंड ने किया पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा के नियमों में बदलाव, भारतीय छात्रों को भी फायदा
भारतीय छात्रों पर भी पड़ सकता है असर
अमेरिका में भारतीय छात्र बड़ी संख्या में पढ़ाई कर रहे हैं. जानकारी के अनुसार, अमेरिका में करीब 11 लाख विदेशी छात्र पढ़ाई कर रहे हैं. वहां 3.3 लाख से ज्यादा भारतीय छात्र रजिस्टर्ड है. वहीं 2024 में करीब 4.19 लाख विदेशी छात्र ओटीपी के तहत अमेरिका में काम कर रहे हैं. विदेशी छात्रों के लिए ओपीटी इसलिए जरूरी है, क्योंकि इससे उन्हें पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिकी कंपनी में काम करने और एक्सपीरियंस हासिल करने का अवसर मिलता है. वहीं कई छात्रों के लिए यह आगे लंबे समय तक अमेरिका में नौकरी करने और एच-1 बी जैसे वर्क वीजा की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता भी बनता है. अगर एक लाख डॉलर की फीस का प्रस्ताव लागू होता है, तो अमेरिका में पढ़ाई के बाद नौकरी करने की कुल लागत काफी बढ़ सकती है.
अमेरिका में पढ़ाई को लेकर छात्रों की चिंता बढ़ी
अमेरिका में पढ़ाई के लिए आवेदन करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में 15 फीसदी की कमी की रिपोर्ट भी सामने आई है. इसके पीछे सख्त वीजा और इमीग्रेशन नीतियां, अमेरिका में रहने की अवधि को लेकर बदलाव और OPT पर प्रस्तावित भारी फीस जैसी वजहों का जिक्र किया गया है. OPT फीस के अलावा अमेरिका में विदेशी छात्रों के वीजा नियमों में रहने की अवधि से जुड़े बदलाव भी प्रस्तावित है. नए नियमों के तहत के अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अधिकतम चार साल तक की रहने की अनुमति देने की व्यवस्था की जा रही है. जिनकी पढ़ाई इससे ज्यादा समय लेती है, उन्हें पढ़ाई खत्म होने से पहले विस्तार के लिए आवेदन करना होगा.
ये भी पढ़ें-NTA ने जारी किया 2027 तक का एग्जाम कैलेंडर, इन परीक्षाओं का शेड्यूल जारी
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