Xप्लेन: देशभर में कहां-कहां गूंज रहा पेपर लीक का मुद्दा? जानें हर शहर का हाल

पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का गुस्सा अब सिर्फ एक-दो शहरों तक सीमित नहीं रहा. दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर पटना, रांची, भोपाल, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, हैदराबाद और जबलपुर तक देशभर में युवा सड़कों पर उतर आए हैं. यह आंदोलन NEET-UG 2026 पेपर लीक से शुरू हुआ, लेकिन अब यह JSSC, JPSC, बिहार सिपाही भर्ती और शिक्षक भर्ती जैसी दर्जनों प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी विरोध में तब्दील हो चुका है. तो आइए जानते हैं कि देशभर में कहां-कहां आंदोलन की गूंज सुनाई दे रही है... दिल्ली में जंतर मंतर से हुई शुरुआत यह सब 20 जून 2026 को शुरू हुआ. दिल्ली के जंतर-मंतर पर कुछ छात्र इकट्ठे हुए. उनकी मांग साफ थी- NEET-UG 2026 का पेपर लीक हुआ है, इसकी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों को इस्तीफा देना चाहिए. इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे 30 साल के अभिजीत दीपके, जो बोस्टन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करके आए थे. अभिजीत ने एक इंस्टाग्राम पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) की स्थापना की थी. 28 जून को इस आंदोलन को एक बड़ा बूस्ट मिला. जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की. 26 दिनों तक चली इस हड़ताल और 20 जुलाई को CJP के 'चलो संसद' मार्च से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. छात्रों ने इसे एक बड़ी जीत के रूप में देखा, लेकिन यह जीत अधूरी थी. छात्रों का सवाल था- सिस्टम तो वही रहा. एक मंत्री के जाने से क्या बदल गया? रांची में सबसे लंबा और सबसे भीषण आंदोलन अगर दिल्ली से आंदोलन शुरू हुआ, तो रांची में इसने सबसे भीषण रूप ले लिया. झारखंड में झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) और  झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों के आरोप हैं. 25 जुलाई 2026 को JPSC-JSSC अभियार्थी न्याय मार्च के बैनर तले शुरू हुआ. छात्रों की प्रमुख मांगें: JSSC-CGL परीक्षा रद्द करना CBI और ED से जांच भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा रद्द करना 10 अगस्त 2026 को हजारों छात्र झारखंड विधानसभा की तरफ मार्च करने निकले. प्रशासन ने विधानसभा के 750 मीटर के दायरे में बैरिकेडिंग लगा दी थी. पुलिस ने लाठीचार्ज   किया, पानी की बौछारें कीं और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. झारखंड के छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे. वे एंबुलेंस में बैठकर मार्च में शामिल हुए. 12 अगस्त 2026 तक आंदोलन को 19 दिन हो चुके हैं. झारखंड सरकार ने JPSC की प्रारंभिक परीक्षा रद्द कर दी और आयोग के तीनों सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया. राज्य CID ने JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्टे को गिरफ्तार किया, लेकिन CBI जांच की मांग पर छात्र अड़े हैं. छात्र नेता रवींद्र पासवान ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो छात्र आंदोलन को जनआंदोलन में बदल दिया जाएगा. पटना में NEET विरोध पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ नया आंदोलन बिहार की राजधानी पटना में 4 अगस्त 2026 को फिर से छात्र सड़कों पर उतर आए. दरअसल, जुलाई 2026 में NEET पेपर लीक के खिलाफ बिहार बंद बुलाया गया था. पुलिस ने करीब 600 लोगों को हिरासत में लिया था. पुलिस ने बाद में आधे से ज्यादा (नाबालिग होने के कारण) रिहा कर दिए, लेकिन बाकी को जेल भेज दिया गया. सैकड़ों छात्र गांधी मैदान से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास की तरफ मार्च करने निकले. वे NSUI, AISF और DYFI के झंडे लहरा रहे थे. पुलिस ने इनकम टैक्स चौराहा के पास रोका और पानी की बौछारें कीं. वहीं, सीवान से आए एक एक्टिविस्ट ने आरोप लगाया कि एक पुलिसकर्मी ने AK-47 राइफल से छात्रों पर फायर किया था. कांस्टेबल तो सस्पेंड हुआ, लेकिन SP के खिलाफ कार्रवाई की मांग है. मध्य प्रदेश में 20 से ज्यादा शहरों में आंदोलन मध्य प्रदेश में यह आंदोलन सबसे व्यापक रहा है. 20 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन हुए. जबलपुर: जबलपुर में एक साथ दो मुद्दों पर छात्र सड़कों पर उतरे. 11 अगस्त 2026 को पाटन-जबलपुर रोड पर सांदीपनी विद्यालय के सैकड़ों छात्रों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया. छात्रों की मांग है कि स्कूल 10 किमी दूर है, बस सुविधा नहीं है, इसलिए आवागमन आसान किया जाए. इसके अलावा 1 अगस्त 2026 को जबलपुर की छात्राओं ने बीजेपी सांसद कंगना रनौत के 'जेनरेशन गटर' वाले बयान के विरोध में पुतला जलाया और इस्तीफे की मांग की. आगरा के एक वकील ने इस बयान के खिलाफ केस दायर   किया है, जिसकी सुनवाई 21 अगस्त को होगी. भोपाल: 8 अगस्त 2026 से नर्सिंग छात्र संगठन (NSO) ने नर्सिंग काउंसिल भोपाल के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया. नर्सिंग छात्रों का आरोप है कि परीक्षा, रिजल्ट, रजिस्ट्रेशन और डिग्री से जुड़े मामलों में लंबे समय से देरी की जा रही है. कुछ मामलों में तो 6 साल तक डिग्री अटकी हुई है. इंदौर: तांत्या भील चौराहे पर छात्रों ने धरना दिया. बारिश भी उनके हौसले नहीं तोड़ पाई. एक प्रदर्शनकारी बैटमैन का कॉस्ट्यूम पहनकर आया. उसने कहा 'बैटमैन न्याय की लड़ाई का प्रतीक है. मेरा नाम 'होप' है और उम्मीद का मतलब आशावाद है. जब तक युवाओं में उम्मीद है, हम जमीन पर खड़े रहेंगे.' 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद इंदौर में 25 दिनों से प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने जश्न मनाया. इसके अलावा मध्य प्रदेश के रीवा, उमरिया, बड़वानी, श्योपुर, ग्वालियर, रतलाम, बैतूल, झाबुआ, टीकमगढ़, सिंगरौली, शाजापुर, सिधी, मऊगंज, टांडा, धार, पलेरा और बैधन में प्रदर्शन हुए. श्योपुर में PG कॉलेज से कलेक्ट्रेट तक 4 किलोमीटर का मार्च निकाला गया. इसके अलावा किन-किन शहरों मे आंदोलन? चेन्नई: एंटी-NEET फेडरेशन का प्रदर्शन 12वें दिन में प्रवेश कर चुका है. जीवा, धनशेखर, पुलियानथोपे मोहन और रवि 1 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं. रवि को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकि

Aug 12, 2026 - 17:30
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Xप्लेन: देशभर में कहां-कहां गूंज रहा पेपर लीक का मुद्दा? जानें हर शहर का हाल

पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का गुस्सा अब सिर्फ एक-दो शहरों तक सीमित नहीं रहा. दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर पटना, रांची, भोपाल, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, हैदराबाद और जबलपुर तक देशभर में युवा सड़कों पर उतर आए हैं. यह आंदोलन NEET-UG 2026 पेपर लीक से शुरू हुआ, लेकिन अब यह JSSC, JPSC, बिहार सिपाही भर्ती और शिक्षक भर्ती जैसी दर्जनों प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी विरोध में तब्दील हो चुका है. तो आइए जानते हैं कि देशभर में कहां-कहां आंदोलन की गूंज सुनाई दे रही है...

दिल्ली में जंतर मंतर से हुई शुरुआत

यह सब 20 जून 2026 को शुरू हुआ. दिल्ली के जंतर-मंतर पर कुछ छात्र इकट्ठे हुए. उनकी मांग साफ थी- NEET-UG 2026 का पेपर लीक हुआ है, इसकी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों को इस्तीफा देना चाहिए. इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे 30 साल के अभिजीत दीपके, जो बोस्टन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करके आए थे. अभिजीत ने एक इंस्टाग्राम पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) की स्थापना की थी.

28 जून को इस आंदोलन को एक बड़ा बूस्ट मिला. जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की. 26 दिनों तक चली इस हड़ताल और 20 जुलाई को CJP के 'चलो संसद' मार्च से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. छात्रों ने इसे एक बड़ी जीत के रूप में देखा, लेकिन यह जीत अधूरी थी. छात्रों का सवाल था- सिस्टम तो वही रहा. एक मंत्री के जाने से क्या बदल गया?

रांची में सबसे लंबा और सबसे भीषण आंदोलन

अगर दिल्ली से आंदोलन शुरू हुआ, तो रांची में इसने सबसे भीषण रूप ले लिया. झारखंड में झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) और  झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों के आरोप हैं. 25 जुलाई 2026 को JPSC-JSSC अभियार्थी न्याय मार्च के बैनर तले शुरू हुआ. छात्रों की प्रमुख मांगें:

  • JSSC-CGL परीक्षा रद्द करना
  • CBI और ED से जांच
  • भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार
  • 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा रद्द करना

10 अगस्त 2026 को हजारों छात्र झारखंड विधानसभा की तरफ मार्च करने निकले. प्रशासन ने विधानसभा के 750 मीटर के दायरे में बैरिकेडिंग लगा दी थी. पुलिस ने लाठीचार्ज   किया, पानी की बौछारें कीं और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. झारखंड के छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे. वे एंबुलेंस में बैठकर मार्च में शामिल हुए. 12 अगस्त 2026 तक आंदोलन को 19 दिन हो चुके हैं.

झारखंड सरकार ने JPSC की प्रारंभिक परीक्षा रद्द कर दी और आयोग के तीनों सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया. राज्य CID ने JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्टे को गिरफ्तार किया, लेकिन CBI जांच की मांग पर छात्र अड़े हैं. छात्र नेता रवींद्र पासवान ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो छात्र आंदोलन को जनआंदोलन में बदल दिया जाएगा.

पटना में NEET विरोध पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ नया आंदोलन

बिहार की राजधानी पटना में 4 अगस्त 2026 को फिर से छात्र सड़कों पर उतर आए. दरअसल, जुलाई 2026 में NEET पेपर लीक के खिलाफ बिहार बंद बुलाया गया था. पुलिस ने करीब 600 लोगों को हिरासत में लिया था. पुलिस ने बाद में आधे से ज्यादा (नाबालिग होने के कारण) रिहा कर दिए, लेकिन बाकी को जेल भेज दिया गया.

सैकड़ों छात्र गांधी मैदान से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास की तरफ मार्च करने निकले. वे NSUI, AISF और DYFI के झंडे लहरा रहे थे. पुलिस ने इनकम टैक्स चौराहा के पास रोका और पानी की बौछारें कीं.

वहीं, सीवान से आए एक एक्टिविस्ट ने आरोप लगाया कि एक पुलिसकर्मी ने AK-47 राइफल से छात्रों पर फायर किया था. कांस्टेबल तो सस्पेंड हुआ, लेकिन SP के खिलाफ कार्रवाई की मांग है.

मध्य प्रदेश में 20 से ज्यादा शहरों में आंदोलन

मध्य प्रदेश में यह आंदोलन सबसे व्यापक रहा है. 20 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन हुए.

  • जबलपुर: जबलपुर में एक साथ दो मुद्दों पर छात्र सड़कों पर उतरे. 11 अगस्त 2026 को पाटन-जबलपुर रोड पर सांदीपनी विद्यालय के सैकड़ों छात्रों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया. छात्रों की मांग है कि स्कूल 10 किमी दूर है, बस सुविधा नहीं है, इसलिए आवागमन आसान किया जाए. इसके अलावा 1 अगस्त 2026 को जबलपुर की छात्राओं ने बीजेपी सांसद कंगना रनौत के 'जेनरेशन गटर' वाले बयान के विरोध में पुतला जलाया और इस्तीफे की मांग की. आगरा के एक वकील ने इस बयान के खिलाफ केस दायर   किया है, जिसकी सुनवाई 21 अगस्त को होगी.
  • भोपाल: 8 अगस्त 2026 से नर्सिंग छात्र संगठन (NSO) ने नर्सिंग काउंसिल भोपाल के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया. नर्सिंग छात्रों का आरोप है कि परीक्षा, रिजल्ट, रजिस्ट्रेशन और डिग्री से जुड़े मामलों में लंबे समय से देरी की जा रही है. कुछ मामलों में तो 6 साल तक डिग्री अटकी हुई है.
  • इंदौर: तांत्या भील चौराहे पर छात्रों ने धरना दिया. बारिश भी उनके हौसले नहीं तोड़ पाई. एक प्रदर्शनकारी बैटमैन का कॉस्ट्यूम पहनकर आया. उसने कहा 'बैटमैन न्याय की लड़ाई का प्रतीक है. मेरा नाम 'होप' है और उम्मीद का मतलब आशावाद है. जब तक युवाओं में उम्मीद है, हम जमीन पर खड़े रहेंगे.' 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद इंदौर में 25 दिनों से प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने जश्न मनाया.

इसके अलावा मध्य प्रदेश के रीवा, उमरिया, बड़वानी, श्योपुर, ग्वालियर, रतलाम, बैतूल, झाबुआ, टीकमगढ़, सिंगरौली, शाजापुर, सिधी, मऊगंज, टांडा, धार, पलेरा और बैधन में प्रदर्शन हुए. श्योपुर में PG कॉलेज से कलेक्ट्रेट तक 4 किलोमीटर का मार्च निकाला गया.

इसके अलावा किन-किन शहरों मे आंदोलन?

  • चेन्नई: एंटी-NEET फेडरेशन का प्रदर्शन 12वें दिन में प्रवेश कर चुका है. जीवा, धनशेखर, पुलियानथोपे मोहन और रवि 1 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं. रवि को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन वह वापस लौट आए. तमिलनाडु सरकार ने एंटी-NEET प्रदर्शनों में गिरफ्तार छात्रों के सभी मामले वापस लेने का फैसला किया. लेकिन प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि भूख हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक NEET पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता.
  • मुंबई: शिवाजी पार्क में शिवसेना (UBT) ने 'तिरंगा मोर्चा' निकाला. कम से कम 5,000 लोग इस प्रदर्शन में शामिल हुए. शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे और MNS प्रमुख राज ठाकरे ने संयुक्त मोर्चा निकाला.
  • बेंगलुरु: फ्रीडम पार्क में सैकड़ों छात्र और कार्यकर्ता जुटे. पुलिस ने इस बार लाठियों की जगह सीटी बजाकर प्रदर्शन को संभाला. हालांकि, एक 19 साल के छात्र पर चार नकाबपोश लोगों ने हमला किया क्योंकि उसने NEET विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था. AISA ने आरोप लगाया कि हमलावर ABVP से जुड़े थे. 25 जुलाई को प्रधान के इस्तीफे के बाद फ्रीडम पार्क में जश्न का माहौल था.
  • हैदराबाद: NALSAR यूनिवर्सिटी के करीब 450 छात्रों ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत को कन्वोकेशन के मुख्य अतिथि बनाने का विरोध किया. छात्रों ने CJI के NEET विरोध प्रदर्शन पर दिए गए बयानों को लेकर आपत्ति जताई. उन्होंने लिखा, 'युवाओं को 'तिलचट्टे' कहने से लेकर पुलिस क्रूरता के वीडियो देखने के लिए समय नहीं होने के बारे में असंवेदनशील बयान देने तक, CJI ने हम जैसे छात्रों के प्रति उदासीनता दिखाई है.'

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो करीब 34 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं.

सिर्फ पेपर लीक नहीं, पूरे सिस्टम का लीकेज

ये आंदोलन सिर्फ NEET या किसी एक परीक्षा की गड़बड़ी का गुस्सा नहीं है. इसके पीछे दशकों से जमा हुई बेरोजगारी, टूटा हुआ भरोसा और अवसरों की कमी का दर्द है. देश की 65 फीसदी आबादी 35 साल से कम उम्र की है, लेकिन 15 से 25 साल के ग्रेजुएट्स में करीब 40 प्रतिशत बेरोजगार हैं. जब चारों तरफ नौकरियां नहीं होतीं, तो सरकारी भर्ती परीक्षा ही युवाओं की आखिरी उम्मीद बनकर रह जाती है. जब वही परीक्षा लीक हो जाए, फर्जी अभ्यर्थी पास हो जाएं और मेहनत करने वाला छात्र ठगा हुआ महसूस करे, तो सड़क पर उतरने के अलावा उसके पास कोई रास्ता नहीं बचता.

NEET पेपर लीक के बाद कम से कम 21 छात्रों ने आत्महत्या कर ली. अहमदाबाद का 17 साल का कहान पटेल हो या 19 साल की शेख सना, दोबारा परीक्षा देने का डर और लगातार हो रहे धोखे का बोझ इनके लिए असहनीय हो गया. सरकार ने 28 जुलाई को कानून में संशोधन कर पेपर लीक करने वालों के लिए 10 साल की सजा और 8.5 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान तो कर दिया, लेकिन छात्र पूछ रहे हैं कि जो पहले ही बर्बाद हो चुका, उसकी भरपाई कैसे होगी.

अभिजीत दीपके का कहना है कि युवाओं को मुख्यधारा की राजनीति में जगह नहीं मिल रही और अपनी बात रखने का कोई जरिया नहीं है. इस वजह से वो CJP जैसे व्यंग्यात्मक मंचों और सड़कों का सहारा ले रहे हैं. यही कारण है कि इस आंदोलन को लगभग सभी राजनीतिक दलों- ABVP, NSUI, AISA, कांग्रेस, शिवसेना और आम आदमी पार्टी का समर्थन मिल रहा है. 6 अगस्त को RSS प्रमुख मोहन भागवत ने भी मुंबई में कहा कि छात्रों की चिंताएं वास्तविक हैं और उन्हें राष्ट्रविरोधी कहना गलत है.

कहां जाकर रुकेगा ये गुस्सा?

ये समझना जरूरी है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, JPSC की परीक्षा रद्द होना या कुछ FIR वापस लेना इस आंदोलन की पूर्ण विराम नहीं लगा पा रहे हैं. रांची में आज 19वें दिन भी छात्र डटे हैं, भोपाल में नर्सिंग के छात्र अनिश्चितकालीन धरने पर हैं और दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक कैंपसों में रोज नए मोर्चे खुल रहे हैं.

छात्रों का कहना साफ है कि हमें सिर्फ एक नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में बदलाव चाहिए. पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, भ्रष्टाचार पर लगाम, सही मायने में रोजगार के अवसर और फीस की मार से राहत. जब तक ये नहीं होता, ये आवाज थमने वाली नहीं है. दिल्ली से जबलपुर और रांची से चेन्नई तक सड़कों पर खड़े ये छात्र बता रहे हैं कि वो पीढ़ी है जो अब चुप बैठने वालों में से नहीं है.

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