Window Weatherstripping Tips: खिड़की के किनारों से रिस रहा है पानी? 5 मिनट में ऐसे करें बंद

Rainwater Coming Through Window: बारिश के मौसम में तेज हवा और भारी बारिश के साथ घर की खिड़कियों से पानी अंदर आने की समस्या आम हो जाती है. कई बार खिड़की के किनारों से हल्का-हल्का पानी रिसने लगता है, लेकिन लोग इसे छोटी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. यही पानी धीरे-धीरे फर्श, दीवार, खिड़की के फ्रेम और आसपास के सामान को नुकसान पहुंचा सकता है. अगर आपके घर की खिड़की से भी बारिश का पानी अंदर आ रहा है, तो फर्श खराब होने से पहले कुछ जरूरी चीजों की जांच कर लेनी चाहिए. खिड़कियों से पानी आने के पीछे अक्सर छोटी-छोटी कमियां जिम्मेदार होती हैं. जैसे सीलेंट या कॉर्किंग का टूट जाना, वेदर स्ट्रिपिंग का घिस जाना, खिड़की के फ्रेम में गैप होना या पानी की निकासी ठीक से न होना. तेज बारिश के दौरान इन छोटी दरारों से पानी घर के अंदर पहुंच सकता है. खिड़की के आसपास कॉर्किंग जरूर जांचें सबसे पहले खिड़की के बाहरी किनारों को ध्यान से देखें. खिड़की के फ्रेम के आसपास लगी कॉर्किंग या सीलेंट में दरार पड़ गई है, वह सूखकर टूटने लगी है या फ्रेम से निकल रही है, तो वहां से बारिश का पानी अंदर आ सकता है. ऐसी स्थिति में सिर्फ ऊपर से नया सीलेंट लगाने के बजाय पुरानी और खराब कॉर्किंग को हटाकर जरूरत के अनुसार बाहरी इस्तेमाल के लिए बने सीलेंट से दोबारा सील करना बेहतर होता है. इससे खिड़की के किनारों पर मौजूद छोटे गैप बंद करने में मदद मिलती है. वेदर स्ट्रिपिंग भी हो सकती है वजह खिड़की के खुलने और बंद होने वाले हिस्सों के बीच लगी वेदर स्ट्रिपिंग बारिश, हवा और बाहर की नमी को अंदर आने से रोकने में मदद करती है. समय के साथ यह घिस सकती है, दब सकती है या अपनी जगह से निकल सकती है. अगर खिड़की बंद करने के बाद भी किनारों से हवा आती है या कोई गैप नजर आता है, तो वेदर स्ट्रिपिंग की जांच करें. खराब या ढीली वेदर स्ट्रिपिंग को बदलने से खिड़की की सीलिंग बेहतर हो सकती है और पानी अंदर आने का खतरा कम हो सकता है. खिड़की के फ्रेम को नजरअंदाज न करें कई बार समस्या सिर्फ सीलेंट या रबर की नहीं होती, बल्कि खिड़की का फ्रेम भी खराब हो सकता है. लकड़ी के फ्रेम में लगातार नमी की वजह से सड़न आ सकती है, जबकि कुछ पुराने फ्रेम समय के साथ ढीले या अपनी जगह से थोड़ा खिसक सकते हैं. फ्रेम पर दरार, रंग बदलना, सॉफ्ट हिस्सा या दीवार और फ्रेम के बीच गैप दिखे, तो इसे नजरअंदाज न करें. अगर लकड़ी का फ्रेम अंदर से गलने लगा है, तो केवल उसके ऊपर सीलेंट लगाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी. ऐसी स्थिति में पहले नमी और नुकसान की सही जांच कराना जरूरी हो सकता है. पानी की निकासी का भी रखें ध्यान बारिश का पानी सिर्फ खिड़की की दरार से ही घर में नहीं आता. अगर घर के आसपास पानी जमा हो रहा है या छत से गिरने वाला पानी लगातार खिड़की के ऊपर और आसपास पड़ रहा है, तो खिड़की की सील पर दबाव बढ़ सकता है. बारिश के मौसम में गटर और पानी की निकासी वाली जगहों को साफ रखें. पत्तियां, मिट्टी और कचरा जमा होने पर पानी सही दिशा में नहीं बह पाता. यह भी देखें कि डाउनस्पाउट का पानी घर की नींव या खिड़कियों के पास जमा न हो. घर के आसपास की मिट्टी का ढलान भी ऐसा होना चाहिए कि पानी घर की तरफ आने के बजाय बाहर की तरफ जाए. अगर खिड़की के बाहर ड्रेनेज होल या पानी निकलने की जगह बनी है, तो उसे भी साफ रखें. इनमें कचरा जमा होने पर पानी रुक सकता है और तेज बारिश के दौरान रिसाव की समस्या बढ़ सकती है. पानी आने के शुरुआती संकेतों को पहचानें हर बार खिड़की से पानी सीधे फर्श पर गिरता हुआ दिखाई दे, ऐसा जरूरी नहीं है. कई बार पानी धीरे-धीरे दीवार या फ्रेम के अंदर पहुंचता रहता है और नुकसान बाद में नजर आता है. खिड़की के आसपास पेंट उखड़ना, दीवार पर बुलबुले दिखाई देना, लकड़ी का फूलना या नरम होना, सील के पास पानी के निशान और कमरे में सीलन जैसी गंध आना भी नमी के संकेत हो सकते हैं. खिड़की के नीचे कारपेट या फर्श बार-बार नम महसूस हो, तो इसकी वजह भी तलाशनी चाहिए. इन संकेतों को समय रहते पहचानना जरूरी है, क्योंकि नमी दीवार के पीछे, फर्श के नीचे या दूसरे हिस्सों तक पहुंच सकती है. इसे भी पढ़ें- Snakes In Monsoon: मानसून में घर के पास क्यों आते हैं जहरीले सांप? जानें बचाव के तरीके बारिश के दौरान पानी अंदर आ जाए तो क्या करें? अगर तेज बारिश के दौरान खिड़की से पानी अंदर आने लगे, तो सबसे पहले वहां रखा फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कारपेट और जरूरी चीजें हटा दें. इससे पानी की वजह से सामान खराब होने का खतरा कम होगा. हल्का पानी आने पर तौलिये से पानी सोख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर बाल्टी या दूसरे बर्तन का इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन सिर्फ फर्श पर दिखने वाला पानी हटाकर निश्चिंत न हों. पानी दीवार के पीछे, फर्श के नीचे या खिड़की के फ्रेम के अंदर भी पहुंच सकता है. बारिश रुकने के बाद प्रभावित जगह को ध्यान से जांचें. दीवार, फर्श, खिड़की की सिल और आसपास की लकड़ी पर नमी या पानी के निशान देखें. नुकसान ज्यादा हो तो उसकी तस्वीरें लेना भी उपयोगी हो सकता है, खासकर अगर आपको मरम्मत या बीमा से जुड़ी प्रक्रिया करनी हो. फर्श खराब होने से पहले करें ये काम बारिश शुरू होने से पहले खिड़की की कॉर्किंग, वेदर स्ट्रिपिंग और फ्रेम की जांच करना एक अच्छी आदत हो सकती है. साथ ही यह सुनिश्चित करें कि घर के आसपास पानी की निकासी ठीक हो और बारिश का पानी लगातार खिड़कियों के आसपास जमा न हो. अगर खिड़की से लगातार पानी आ रहा है या फ्रेम के अंदर नमी और सड़न नजर आ रही है, तो केवल बाहर से गैप भरने के बजाय समस्या की असली वजह पता करना जरूरी है. इसे भी पढ़ें- क्या आपके कमरे में भी आती हैं छिपकलियां? जानें भगाने का सही तरीका

Aug 14, 2026 - 11:30
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Window Weatherstripping Tips: खिड़की के किनारों से रिस रहा है पानी? 5 मिनट में ऐसे करें बंद

Rainwater Coming Through Window: बारिश के मौसम में तेज हवा और भारी बारिश के साथ घर की खिड़कियों से पानी अंदर आने की समस्या आम हो जाती है. कई बार खिड़की के किनारों से हल्का-हल्का पानी रिसने लगता है, लेकिन लोग इसे छोटी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. यही पानी धीरे-धीरे फर्श, दीवार, खिड़की के फ्रेम और आसपास के सामान को नुकसान पहुंचा सकता है. अगर आपके घर की खिड़की से भी बारिश का पानी अंदर आ रहा है, तो फर्श खराब होने से पहले कुछ जरूरी चीजों की जांच कर लेनी चाहिए.

खिड़कियों से पानी आने के पीछे अक्सर छोटी-छोटी कमियां जिम्मेदार होती हैं. जैसे सीलेंट या कॉर्किंग का टूट जाना, वेदर स्ट्रिपिंग का घिस जाना, खिड़की के फ्रेम में गैप होना या पानी की निकासी ठीक से न होना. तेज बारिश के दौरान इन छोटी दरारों से पानी घर के अंदर पहुंच सकता है.

खिड़की के आसपास कॉर्किंग जरूर जांचें

सबसे पहले खिड़की के बाहरी किनारों को ध्यान से देखें. खिड़की के फ्रेम के आसपास लगी कॉर्किंग या सीलेंट में दरार पड़ गई है, वह सूखकर टूटने लगी है या फ्रेम से निकल रही है, तो वहां से बारिश का पानी अंदर आ सकता है. ऐसी स्थिति में सिर्फ ऊपर से नया सीलेंट लगाने के बजाय पुरानी और खराब कॉर्किंग को हटाकर जरूरत के अनुसार बाहरी इस्तेमाल के लिए बने सीलेंट से दोबारा सील करना बेहतर होता है. इससे खिड़की के किनारों पर मौजूद छोटे गैप बंद करने में मदद मिलती है.

वेदर स्ट्रिपिंग भी हो सकती है वजह

खिड़की के खुलने और बंद होने वाले हिस्सों के बीच लगी वेदर स्ट्रिपिंग बारिश, हवा और बाहर की नमी को अंदर आने से रोकने में मदद करती है. समय के साथ यह घिस सकती है, दब सकती है या अपनी जगह से निकल सकती है. अगर खिड़की बंद करने के बाद भी किनारों से हवा आती है या कोई गैप नजर आता है, तो वेदर स्ट्रिपिंग की जांच करें. खराब या ढीली वेदर स्ट्रिपिंग को बदलने से खिड़की की सीलिंग बेहतर हो सकती है और पानी अंदर आने का खतरा कम हो सकता है.

खिड़की के फ्रेम को नजरअंदाज न करें

कई बार समस्या सिर्फ सीलेंट या रबर की नहीं होती, बल्कि खिड़की का फ्रेम भी खराब हो सकता है. लकड़ी के फ्रेम में लगातार नमी की वजह से सड़न आ सकती है, जबकि कुछ पुराने फ्रेम समय के साथ ढीले या अपनी जगह से थोड़ा खिसक सकते हैं. फ्रेम पर दरार, रंग बदलना, सॉफ्ट हिस्सा या दीवार और फ्रेम के बीच गैप दिखे, तो इसे नजरअंदाज न करें. अगर लकड़ी का फ्रेम अंदर से गलने लगा है, तो केवल उसके ऊपर सीलेंट लगाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी. ऐसी स्थिति में पहले नमी और नुकसान की सही जांच कराना जरूरी हो सकता है.

पानी की निकासी का भी रखें ध्यान

बारिश का पानी सिर्फ खिड़की की दरार से ही घर में नहीं आता. अगर घर के आसपास पानी जमा हो रहा है या छत से गिरने वाला पानी लगातार खिड़की के ऊपर और आसपास पड़ रहा है, तो खिड़की की सील पर दबाव बढ़ सकता है. बारिश के मौसम में गटर और पानी की निकासी वाली जगहों को साफ रखें. पत्तियां, मिट्टी और कचरा जमा होने पर पानी सही दिशा में नहीं बह पाता. यह भी देखें कि डाउनस्पाउट का पानी घर की नींव या खिड़कियों के पास जमा न हो. घर के आसपास की मिट्टी का ढलान भी ऐसा होना चाहिए कि पानी घर की तरफ आने के बजाय बाहर की तरफ जाए.


अगर खिड़की के बाहर ड्रेनेज होल या पानी निकलने की जगह बनी है, तो उसे भी साफ रखें. इनमें कचरा जमा होने पर पानी रुक सकता है और तेज बारिश के दौरान रिसाव की समस्या बढ़ सकती है.

पानी आने के शुरुआती संकेतों को पहचानें

हर बार खिड़की से पानी सीधे फर्श पर गिरता हुआ दिखाई दे, ऐसा जरूरी नहीं है. कई बार पानी धीरे-धीरे दीवार या फ्रेम के अंदर पहुंचता रहता है और नुकसान बाद में नजर आता है. खिड़की के आसपास पेंट उखड़ना, दीवार पर बुलबुले दिखाई देना, लकड़ी का फूलना या नरम होना, सील के पास पानी के निशान और कमरे में सीलन जैसी गंध आना भी नमी के संकेत हो सकते हैं. खिड़की के नीचे कारपेट या फर्श बार-बार नम महसूस हो, तो इसकी वजह भी तलाशनी चाहिए. इन संकेतों को समय रहते पहचानना जरूरी है, क्योंकि नमी दीवार के पीछे, फर्श के नीचे या दूसरे हिस्सों तक पहुंच सकती है.

इसे भी पढ़ें- Snakes In Monsoon: मानसून में घर के पास क्यों आते हैं जहरीले सांप? जानें बचाव के तरीके

बारिश के दौरान पानी अंदर आ जाए तो क्या करें?

अगर तेज बारिश के दौरान खिड़की से पानी अंदर आने लगे, तो सबसे पहले वहां रखा फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कारपेट और जरूरी चीजें हटा दें. इससे पानी की वजह से सामान खराब होने का खतरा कम होगा. हल्का पानी आने पर तौलिये से पानी सोख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर बाल्टी या दूसरे बर्तन का इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन सिर्फ फर्श पर दिखने वाला पानी हटाकर निश्चिंत न हों. पानी दीवार के पीछे, फर्श के नीचे या खिड़की के फ्रेम के अंदर भी पहुंच सकता है. बारिश रुकने के बाद प्रभावित जगह को ध्यान से जांचें. दीवार, फर्श, खिड़की की सिल और आसपास की लकड़ी पर नमी या पानी के निशान देखें. नुकसान ज्यादा हो तो उसकी तस्वीरें लेना भी उपयोगी हो सकता है, खासकर अगर आपको मरम्मत या बीमा से जुड़ी प्रक्रिया करनी हो.


फर्श खराब होने से पहले करें ये काम

बारिश शुरू होने से पहले खिड़की की कॉर्किंग, वेदर स्ट्रिपिंग और फ्रेम की जांच करना एक अच्छी आदत हो सकती है. साथ ही यह सुनिश्चित करें कि घर के आसपास पानी की निकासी ठीक हो और बारिश का पानी लगातार खिड़कियों के आसपास जमा न हो. अगर खिड़की से लगातार पानी आ रहा है या फ्रेम के अंदर नमी और सड़न नजर आ रही है, तो केवल बाहर से गैप भरने के बजाय समस्या की असली वजह पता करना जरूरी है.

इसे भी पढ़ें- क्या आपके कमरे में भी आती हैं छिपकलियां? जानें भगाने का सही तरीका

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