Vastu Tips: पढ़ाई और स्पोर्ट्स में बच्चों को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है कमरे की सही दिशा, जानिए क्या कहता है वास्तु शास्त्र

Vastu Tips: वास्तु शास्त्र में माना जाता है कि जिस वातावरण में बच्चा सबसे ज्यादा समय बिताता है, उसकी ऊर्जाशक्ति सीधे उसके स्वभाव और सोच पर असर डालती है. लेकिन हर बच्चा एक जैसा नहीं होता. किसी की रुचि किताबों में होती है, तो किसी बच्चे को मैदान यानि की खेल कूद में अपनी पहचान बनानी होती है. ऐसे में केवल मेहनत या टैलेंट ही नहीं, कमरे का वास्तु भी आपकी मदद कर सकता है. यही वजह है कि आजकल कई माता-पिता बच्चों के कमरे की दिशा, रंग और सजावट को लेकर अधिक सचेत हो रहे हैं.  कमरे की दिशा कैसे असर डालती है बच्चों पर? अक्सर देखा जाता है कि कुछ बच्चे बिना किसी वजह के चिड़चिड़े, गुस्सैल या पढ़ाई में कमजोर होने लगते हैं. कई बार इसके पीछे केवल मोबाइल या सोशल मीडिया नहीं, बल्कि उनके आसपास का माहौल भी जिम्मेदार होता है. वास्तु शास्त्र इसी वातावरण की ऊर्जा पर ध्यान देता है. अगर बच्चे का कमरा बहुत ज्यादा बिखरा हुआ हो, और वहां पर सूर्य की रोशनी न आती हो या गलत दिशा में बेड रखा हो, तो इससे बच्चे के अंदर बेचैनी और ध्यान की कमी बढ़ सकती है. वहीं पर संतुलित और सकारात्मक वातावरण बच्चों को मानसिक रूप से शांत और आत्मविश्वासी बनाने में मदद करता है. पढ़ाई करने वाले बच्चों के लिए कौनसी दिशा है बेहतर? वास्तु शास्त्र के अनुसार पढ़ाई में रुचि रखने वाले बच्चों के लिए उत्तर-पूर्व दिशा सबसे अच्छी मानी जाती है. इसे ज्ञान, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा की दिशा कहा जाता है. इस दिशा में रहने या पढ़ाई करने से बच्चे का मन जल्दी भटकता नहीं है और उसका ध्यान पढ़ाई में अधिक लगने लगता है. खासकर सरकारी परीक्षा की तैयारी करने वाले बच्चों के लिए यह दिशा लाभकारी मानी जाती है. उत्तर-पूर्व दिशा में सारी दिशाओं के मुकाबले सुबह की रोशनी ज्यादा आती है. विज्ञान भी कहता है कि नेचुरल लाइट दिमाग को शांत रखने में मदद करती है. यही वजह है कि ऐसे वातावरण में पढ़ने वाले बच्चे अधिक फोकस्ड महसूस कर सकते हैं. बच्चे की स्टडी टेबल इस तरह रखी जाए कि बच्चा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पढ़ाई करें यह अधिक लाभकारी है.  स्पोर्ट्स में रुचि रखने वाले बच्चों के लिए कौनसी दिशा बेहतरीन? जो बच्चे खेलकूद, फिजिकल एक्टिविटी या स्पोर्ट्स में आगे बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए दक्षिण या पश्चिम दिशा का कमरा बेहतर माना जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार यह दिशा ऊर्जा, साहस और शारीरिक क्रियाओं से जुड़ी मानी जाती है. इस दिशा में रहने वाले बच्चों के अंदर प्रतिस्पर्धा की भावना और आत्मबल अधिक मजबूत होता है.  वास्तु में दक्षिण दिशा को स्थिरता और ताकत का प्रतीक माना गया है. स्पोर्ट्स से जुड़े बच्चों को लगातार ऊर्जा और मोटिवेशन की जरूरत होती है. अगर ऐसे बच्चों का कमरा खुला, व्यवस्थित और प्रेरणादायक हो, तो वह मानसिक रूप से अधिक एक्टिव और पॉजिटिव महसूस करते है.  इन बातों का भी रखे ध्यान: हल्का नीला, हरा, सफेद और क्रीम रंग यह रंग बच्चों में पॉजिटिविटी और सुकून का एहसास बढ़ाते हैं. ज्यादा गैजेट्स बच्चों को चिड़चिड़ा और बेचैन बना सकते हैं जितना हो सके कमरे के स्क्रीन-फ्री बनाए. बिखरा कमरा बच्चों का ध्यान भटकाने और मानसिक तनाव बढ़ाने का कारण बन सकता है. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

May 14, 2026 - 15:30
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Vastu Tips: पढ़ाई और स्पोर्ट्स में बच्चों को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है कमरे की सही दिशा, जानिए क्या कहता है वास्तु शास्त्र

Vastu Tips: वास्तु शास्त्र में माना जाता है कि जिस वातावरण में बच्चा सबसे ज्यादा समय बिताता है, उसकी ऊर्जाशक्ति सीधे उसके स्वभाव और सोच पर असर डालती है. लेकिन हर बच्चा एक जैसा नहीं होता. किसी की रुचि किताबों में होती है, तो किसी बच्चे को मैदान यानि की खेल कूद में अपनी पहचान बनानी होती है.

ऐसे में केवल मेहनत या टैलेंट ही नहीं, कमरे का वास्तु भी आपकी मदद कर सकता है. यही वजह है कि आजकल कई माता-पिता बच्चों के कमरे की दिशा, रंग और सजावट को लेकर अधिक सचेत हो रहे हैं. 

कमरे की दिशा कैसे असर डालती है बच्चों पर?

अक्सर देखा जाता है कि कुछ बच्चे बिना किसी वजह के चिड़चिड़े, गुस्सैल या पढ़ाई में कमजोर होने लगते हैं. कई बार इसके पीछे केवल मोबाइल या सोशल मीडिया नहीं, बल्कि उनके आसपास का माहौल भी जिम्मेदार होता है. वास्तु शास्त्र इसी वातावरण की ऊर्जा पर ध्यान देता है. 
अगर बच्चे का कमरा बहुत ज्यादा बिखरा हुआ हो, और वहां पर सूर्य की रोशनी न आती हो या गलत दिशा में बेड रखा हो, तो इससे बच्चे के अंदर बेचैनी और ध्यान की कमी बढ़ सकती है. वहीं पर संतुलित और सकारात्मक वातावरण बच्चों को मानसिक रूप से शांत और आत्मविश्वासी बनाने में मदद करता है.

पढ़ाई करने वाले बच्चों के लिए कौनसी दिशा है बेहतर?

वास्तु शास्त्र के अनुसार पढ़ाई में रुचि रखने वाले बच्चों के लिए उत्तर-पूर्व दिशा सबसे अच्छी मानी जाती है. इसे ज्ञान, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा की दिशा कहा जाता है. इस दिशा में रहने या पढ़ाई करने से बच्चे का मन जल्दी भटकता नहीं है और उसका ध्यान पढ़ाई में अधिक लगने लगता है. खासकर सरकारी परीक्षा की तैयारी करने वाले बच्चों के लिए यह दिशा लाभकारी मानी जाती है.

उत्तर-पूर्व दिशा में सारी दिशाओं के मुकाबले सुबह की रोशनी ज्यादा आती है. विज्ञान भी कहता है कि नेचुरल लाइट दिमाग को शांत रखने में मदद करती है. यही वजह है कि ऐसे वातावरण में पढ़ने वाले बच्चे अधिक फोकस्ड महसूस कर सकते हैं. बच्चे की स्टडी टेबल इस तरह रखी जाए कि बच्चा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पढ़ाई करें यह अधिक लाभकारी है. 

स्पोर्ट्स में रुचि रखने वाले बच्चों के लिए कौनसी दिशा बेहतरीन?

जो बच्चे खेलकूद, फिजिकल एक्टिविटी या स्पोर्ट्स में आगे बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए दक्षिण या पश्चिम दिशा का कमरा बेहतर माना जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार यह दिशा ऊर्जा, साहस और शारीरिक क्रियाओं से जुड़ी मानी जाती है. इस दिशा में रहने वाले बच्चों के अंदर प्रतिस्पर्धा की भावना और आत्मबल अधिक मजबूत होता है. 

वास्तु में दक्षिण दिशा को स्थिरता और ताकत का प्रतीक माना गया है. स्पोर्ट्स से जुड़े बच्चों को लगातार ऊर्जा और मोटिवेशन की जरूरत होती है. अगर ऐसे बच्चों का कमरा खुला, व्यवस्थित और प्रेरणादायक हो, तो वह मानसिक रूप से अधिक एक्टिव और पॉजिटिव महसूस करते है. 

इन बातों का भी रखे ध्यान:

  • हल्का नीला, हरा, सफेद और क्रीम रंग यह रंग बच्चों में पॉजिटिविटी और सुकून का एहसास बढ़ाते हैं.
  • ज्यादा गैजेट्स बच्चों को चिड़चिड़ा और बेचैन बना सकते हैं जितना हो सके कमरे के स्क्रीन-फ्री बनाए.
  • बिखरा कमरा बच्चों का ध्यान भटकाने और मानसिक तनाव बढ़ाने का कारण बन सकता है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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