Smartphone Addiction In Kids: बच्चे को स्मार्ट फोन न दें तो रोने लगता है? पैरेंट्स को माननी चाहिए CM Yogi की ये सलाह

Why Kids Cry Without Smartphones: आजकल बच्चों के हाथ में स्मार्टफोन आम बात हो गई है, लेकिन क्या आपने ध्यान दिया है कि फोन छीनते ही बच्चा रोने लगता है या चिड़चिड़ा हो जाता है? यह सिर्फ जिद नहीं, बल्कि बढ़ती स्क्रीन डिपेंडेंसी का संकेत भी हो सकता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कम उम्र में ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों के व्यवहार, नींद और मानसिक विकास पर असर डाल सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि सीएम योगी ने इसको लेकर क्या कहा है. सीएम योगी ने इसको लेकर क्या कहा? सीएम योगी ने कहा कि प्रयास होना चाहिए कि कम उम्र के बच्चों को स्मार्टफोन न दें. उन्होंने कहा कि मैं माताओं और बहनों से कहना चाहूंगा कि उनको कतई न दें.  अगर बच्चा रो रहा है, तो उसे रोने दीजिए. अगर वह नाराज हो रहा है, तो कुछ देर नाराज होने के बाद वह ठीक हो जाएगा. उन्होंने कहा कि जो बच्चा दिनभर स्मार्टफोन देखता रहता है, उसकी आंखों की रोशनी पर प्रभाव पड़ता है.   कम उम्र के बच्चों को Smartphone न दें... pic.twitter.com/OmZ5qO4qj0 — Yogi Adityanath (@myogiadityanath) March 16, 2026 उन्होंने कहा कि जितना समय वह फोन में लगा रहा है, उतना समय वह पुस्तकों में लगाए, योग करे, व्यायाम करे, कसरत करे, तो उसका जीवन सुंदर होगा, व्यवस्थित होगा और वह आगे बढ़ेगा. स्मार्टफोन उसका समय भी खराब कर रहा है, उसकी मेहनत भी खराब कर रहा है और उसकी आंखों को भी नुकसान पहुंचा रहा है. इसके अलावा उसकी सोचने-समझने की क्षमता को भी कुंठित कर रहा है. लोग इसके चलते डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। इसके साथ तमाम ऐसे गेम जुड़े हुए हैं, जो उसे निगेटिविटी दिशा की ओर लेकर जा रहे हैं. ऐसे में स्मार्टफोन को रोकने की दिशा में प्रयास होना चाहिए. उन्होंने युवाओं के लिए कहा कि इसका इस्तेमाल जितना जरूरी हो, उतना ही करना चाहिए. दिनभर इसे कान में मत रखिए और न ही दिनभर इसमें देखते रहना चाहिए. यह भी पढ़ें: क्या खाली पेट काम करता है दिमाग ज्यादा बेहतर? जानिए फास्टिंग का मेंटल हेल्थ पर असर और फायदे एक्सपर्ट का क्या है कहना? Psychiatrist Ankit Daral ने सोशल मीडिया पर अपने एक वीडियो में बताया कि आजकल मोबाइल हर घर में एक नैनी यानी दाई, आया या बच्चों की देखभाल करने वाली महिला का काम कर रहा है. बच्चा जैसे ही थोड़ा सा रोता है, तो पेरेंट्स उसे मोबाइल दे देते हैं, ताकि वह चुप हो जाए.             View this post on Instagram                       A post shared by Psychiatrist Ankit Daral (@dr.ankitdaral_psychiatrist) वे आगे बताते हैं कि बच्चा जब रोता है, तो इसलिए रोता है क्योंकि उस समय उसे पैरेंट्स की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, न कि मोबाइल फोन की. फोन देने से उनका मन डोपामिन के लिए तड़पता रहता है और बार-बार फोन देखने का मन करता है. अगर ऐसा न हो, तो उनका ब्रेन एक केमिकल क्रैश में चला जाता है. इसके चलते वे चिड़चिडे हो जाते हैं, नर्वस हो जाते हैं और गुस्सा करने लगते हैं. इसे भी पढ़ें- Side Effects Of Birth Control Pills: क्या प्रेग्नेंसी रोकने वाली दवाइयों से हो जाता है कैंसर, जानें कितनी सच है यह बात? Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Mar 17, 2026 - 20:30
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Smartphone Addiction In Kids: बच्चे को स्मार्ट फोन न दें तो रोने लगता है? पैरेंट्स को माननी चाहिए CM Yogi की ये सलाह

Why Kids Cry Without Smartphones: आजकल बच्चों के हाथ में स्मार्टफोन आम बात हो गई है, लेकिन क्या आपने ध्यान दिया है कि फोन छीनते ही बच्चा रोने लगता है या चिड़चिड़ा हो जाता है? यह सिर्फ जिद नहीं, बल्कि बढ़ती स्क्रीन डिपेंडेंसी का संकेत भी हो सकता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कम उम्र में ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों के व्यवहार, नींद और मानसिक विकास पर असर डाल सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि सीएम योगी ने इसको लेकर क्या कहा है.

सीएम योगी ने इसको लेकर क्या कहा?

सीएम योगी ने कहा कि प्रयास होना चाहिए कि कम उम्र के बच्चों को स्मार्टफोन न दें. उन्होंने कहा कि मैं माताओं और बहनों से कहना चाहूंगा कि उनको कतई न दें.  अगर बच्चा रो रहा है, तो उसे रोने दीजिए. अगर वह नाराज हो रहा है, तो कुछ देर नाराज होने के बाद वह ठीक हो जाएगा. उन्होंने कहा कि जो बच्चा दिनभर स्मार्टफोन देखता रहता है, उसकी आंखों की रोशनी पर प्रभाव पड़ता है.

 

उन्होंने कहा कि जितना समय वह फोन में लगा रहा है, उतना समय वह पुस्तकों में लगाए, योग करे, व्यायाम करे, कसरत करे, तो उसका जीवन सुंदर होगा, व्यवस्थित होगा और वह आगे बढ़ेगा. स्मार्टफोन उसका समय भी खराब कर रहा है, उसकी मेहनत भी खराब कर रहा है और उसकी आंखों को भी नुकसान पहुंचा रहा है. इसके अलावा उसकी सोचने-समझने की क्षमता को भी कुंठित कर रहा है. लोग इसके चलते डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। इसके साथ तमाम ऐसे गेम जुड़े हुए हैं, जो उसे निगेटिविटी दिशा की ओर लेकर जा रहे हैं. ऐसे में स्मार्टफोन को रोकने की दिशा में प्रयास होना चाहिए. उन्होंने युवाओं के लिए कहा कि इसका इस्तेमाल जितना जरूरी हो, उतना ही करना चाहिए. दिनभर इसे कान में मत रखिए और न ही दिनभर इसमें देखते रहना चाहिए.

यह भी पढ़ें: क्या खाली पेट काम करता है दिमाग ज्यादा बेहतर? जानिए फास्टिंग का मेंटल हेल्थ पर असर और फायदे

एक्सपर्ट का क्या है कहना?

Psychiatrist Ankit Daral ने सोशल मीडिया पर अपने एक वीडियो में बताया कि आजकल मोबाइल हर घर में एक नैनी यानी दाई, आया या बच्चों की देखभाल करने वाली महिला का काम कर रहा है. बच्चा जैसे ही थोड़ा सा रोता है, तो पेरेंट्स उसे मोबाइल दे देते हैं, ताकि वह चुप हो जाए.

 

 
 
 
 
 
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वे आगे बताते हैं कि बच्चा जब रोता है, तो इसलिए रोता है क्योंकि उस समय उसे पैरेंट्स की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, न कि मोबाइल फोन की. फोन देने से उनका मन डोपामिन के लिए तड़पता रहता है और बार-बार फोन देखने का मन करता है. अगर ऐसा न हो, तो उनका ब्रेन एक केमिकल क्रैश में चला जाता है. इसके चलते वे चिड़चिडे हो जाते हैं, नर्वस हो जाते हैं और गुस्सा करने लगते हैं.

इसे भी पढ़ें- Side Effects Of Birth Control Pills: क्या प्रेग्नेंसी रोकने वाली दवाइयों से हो जाता है कैंसर, जानें कितनी सच है यह बात?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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