कैसे खिलाड़ियों के फिट रहने और स्वस्थ होने के तरीके को बदल रहा है आयुर्वेद? पतंजलि ने बताया
खेल दुनिया में एथलीट्स का फिट रहना और चोट से जल्दी ठीक होना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है. लेकिन अब प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद इस बदलाव का केंद्र बन रही है. पतंजलि का कहना है कि आयुर्वेद न सिर्फ शरीर को मजबूत बनाता है, बल्कि दिमाग और आत्मा को भी संतुलित रखता है. यह होलिस्टिक अप्रोच एथलीट्स को आधुनिक जिम और दवाओं से आगे ले जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि आयुर्वेद से रिकवरी 30-40% तेज हो सकती है, जो खेल की दुनिया को बदल रही है. आयुर्वेद एथलीट्स के लिए क्या खास है? पतंजलि ने बताया, ''सबसे पहले यह व्यक्तिगत तरीके से काम करता है. हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है- वात, पित्त या कफ दोष के आधार पर. आयुर्वेदिक डॉक्टर एथलीट की बॉडी टाइप देखकर डाइट, एक्सरसाइज और हर्बल दवाएं सुझाते हैं. उदाहरण के लिए, अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटी तनाव कम करती है और मांसपेशियों को मजबूत बनाती है. एक अध्ययन में पाया गया कि अश्वगंधा लेने से एथलीट्स की शारीरिक क्षमता में सुधार होता है. यह हर्ब न सिर्फ एनर्जी बढ़ाती है, बल्कि नींद भी बेहतर बनाती है, जो रिकवरी के लिए जरूरी है..'' पतंजलि का दावा है, ''रिकवरी में आयुर्वेद का जादू देखने लायक है. ट्रेडिशनल तरीके जैसे पंचकर्मा- detoxification प्रोसेस, शरीर से टॉक्सिन्स निकालते हैं और इम्यून सिस्टम को बूस्ट करते हैं. कनाडाई हॉकी प्लेयर जोनाथन टोज ने चोट के बाद पंचकर्मा अपनाया और पूरी तरह ठीक हो गए. यह थेरेपी मसल्स को रिलैक्स करती है और सूजन कम करती है. साथ ही आयुर्वेदिक स्पोर्ट्स मसाज चोट रोकने में मदद करता है. तेलों से की जाने वाली यह मालिश ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाती है और ऊतकों को पोषण देती है. एथलीट्स बताते हैं कि इससे वे जल्दी ट्रेनिंग पर लौट पाते हैं, बिना साइड इफेक्ट्स के.'' आधुनिक वर्कआउट को सपोर्ट करता है आयुर्वेद- पतजंलि पतंजलि का कहना है, ''फिटनेस के मामले में आयुर्वेद आधुनिक वर्कआउट को सपोर्ट करता है. यह कहता है कि एक्सरसाइज इतनी होनी चाहिए कि बॉडी गर्म हो, लेकिन थक न जाए. पोस्ट-वर्कआउट रूटीन में ग्राउंडिंग एक्टिविटीज जैसे योग और प्राणायाम शामिल करें. इससे वात दोष बैलेंस रहता है और बॉडी रिचार्ज होती है. डाइट में हल्के, पौष्टिक भोजन जैसे दालें, फल और हर्बल टीज पर जोर. इससे बर्नआउट से बचाव होता है और इम्यूनिटी मजबूत रहती है.'' पतजंलि का दावा है, ''भारत में कई एथलीट्स अब आयुर्वेद को अपनाने लगे हैं. ओलंपिक रनर पीटी उषा ने बताया कि आयुर्वेदिक रूटीन से उनकी स्टेमिना दोगुनी हो गई. विदेशों में भी यह ट्रेंड पकड़ रहा है. अमेरिका और यूरोप के स्पोर्ट्स क्लब्स आयुर्वेदिक सेशंस चला रहे हैं. लेकिन चुनौती यह है कि ज्यादातर एथलीट्स को इसके बारे में कम जानकारी है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी क्वालिफाइड आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह लें, ताकि सही डोज मिले.''
खेल दुनिया में एथलीट्स का फिट रहना और चोट से जल्दी ठीक होना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है. लेकिन अब प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद इस बदलाव का केंद्र बन रही है. पतंजलि का कहना है कि आयुर्वेद न सिर्फ शरीर को मजबूत बनाता है, बल्कि दिमाग और आत्मा को भी संतुलित रखता है. यह होलिस्टिक अप्रोच एथलीट्स को आधुनिक जिम और दवाओं से आगे ले जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि आयुर्वेद से रिकवरी 30-40% तेज हो सकती है, जो खेल की दुनिया को बदल रही है.
आयुर्वेद एथलीट्स के लिए क्या खास है?
पतंजलि ने बताया, ''सबसे पहले यह व्यक्तिगत तरीके से काम करता है. हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है- वात, पित्त या कफ दोष के आधार पर. आयुर्वेदिक डॉक्टर एथलीट की बॉडी टाइप देखकर डाइट, एक्सरसाइज और हर्बल दवाएं सुझाते हैं. उदाहरण के लिए, अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटी तनाव कम करती है और मांसपेशियों को मजबूत बनाती है. एक अध्ययन में पाया गया कि अश्वगंधा लेने से एथलीट्स की शारीरिक क्षमता में सुधार होता है. यह हर्ब न सिर्फ एनर्जी बढ़ाती है, बल्कि नींद भी बेहतर बनाती है, जो रिकवरी के लिए जरूरी है..''
पतंजलि का दावा है, ''रिकवरी में आयुर्वेद का जादू देखने लायक है. ट्रेडिशनल तरीके जैसे पंचकर्मा- detoxification प्रोसेस, शरीर से टॉक्सिन्स निकालते हैं और इम्यून सिस्टम को बूस्ट करते हैं. कनाडाई हॉकी प्लेयर जोनाथन टोज ने चोट के बाद पंचकर्मा अपनाया और पूरी तरह ठीक हो गए. यह थेरेपी मसल्स को रिलैक्स करती है और सूजन कम करती है. साथ ही आयुर्वेदिक स्पोर्ट्स मसाज चोट रोकने में मदद करता है. तेलों से की जाने वाली यह मालिश ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाती है और ऊतकों को पोषण देती है. एथलीट्स बताते हैं कि इससे वे जल्दी ट्रेनिंग पर लौट पाते हैं, बिना साइड इफेक्ट्स के.''
आधुनिक वर्कआउट को सपोर्ट करता है आयुर्वेद- पतजंलि
पतंजलि का कहना है, ''फिटनेस के मामले में आयुर्वेद आधुनिक वर्कआउट को सपोर्ट करता है. यह कहता है कि एक्सरसाइज इतनी होनी चाहिए कि बॉडी गर्म हो, लेकिन थक न जाए. पोस्ट-वर्कआउट रूटीन में ग्राउंडिंग एक्टिविटीज जैसे योग और प्राणायाम शामिल करें. इससे वात दोष बैलेंस रहता है और बॉडी रिचार्ज होती है. डाइट में हल्के, पौष्टिक भोजन जैसे दालें, फल और हर्बल टीज पर जोर. इससे बर्नआउट से बचाव होता है और इम्यूनिटी मजबूत रहती है.''
पतजंलि का दावा है, ''भारत में कई एथलीट्स अब आयुर्वेद को अपनाने लगे हैं. ओलंपिक रनर पीटी उषा ने बताया कि आयुर्वेदिक रूटीन से उनकी स्टेमिना दोगुनी हो गई. विदेशों में भी यह ट्रेंड पकड़ रहा है. अमेरिका और यूरोप के स्पोर्ट्स क्लब्स आयुर्वेदिक सेशंस चला रहे हैं. लेकिन चुनौती यह है कि ज्यादातर एथलीट्स को इसके बारे में कम जानकारी है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी क्वालिफाइड आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह लें, ताकि सही डोज मिले.''
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