SIR पर असदुद्दीन ओवैसी ने BRS को लगाई लताड़, PRC पर भी घेरा, बोले- 'एक दशक तक सत्ता में रहने के बावजूद...'
AIMIM अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार को तेलंगाना सरकार से अपील की कि वह योग्य नागरिकों को स्थायी निवास प्रमाण पत्र (PRC) जारी करे और अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले जरूरी कदम उठाए. हैदराबाद में वकीलों के लिए आयोजित 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) वर्कशॉप में बोलते हुए ओवैसी ने कहा कि सरकार को मतदाता वेरिफिकेशन प्रक्रिया के दौरान नागरिकों को होने वाली मुश्किलों का इंतजार नहीं करना चाहिए. ओवैसी ने कर्नाटक का दिया उदाहरण कर्नाटक का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वहां की कांग्रेस सरकार PRC जारी करती है और सवाल किया कि तेलंगाना में ऐसी व्यवस्था क्यों लागू नहीं की जा सकती. सभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कई राज्यों के आंकड़ों का जिक्र किया और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बीच डॉक्यूमेंट की कमी की ओर इशारा किया. उनके बताए आंकड़ों के अनुसार, लगभग 52 प्रतिशत गरीब नागरिकों के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं हैं, जबकि लगभग 42 प्रतिशत के पास जाति प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र नहीं हैं. SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल, BRS पर साधा निशाना उन्होंने तर्क दिया कि दस्तावेजों की जरूरतें समाज के कमजोर वर्गों पर बहुत ज्यादा असर डाल सकती हैं और जरूरी रिकॉर्ड व पहचान से जुड़े दस्तावेज आसानी से उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया. ओवैसी ने SIR प्रक्रिया पर BRS के रुख की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि तेलंगाना में एक दशक तक सत्ता में रहने के बावजूद पार्टी इस मुद्दे पर चुप रही. यह भी पढ़ें - ‘किसकी क्या भूमिका रही’, चंदा चोरी पर चंपत राय-अनिल मिश्रा का इस्तीफा, जानें ट्रस्ट का पहला रिएक्शन क्या बोले ओवैसी? उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार तेलंगाना में वोटर वेरिफिकेशन के लिए बताए गए बारह जरूरी दस्तावेजों में से तीन के उपलब्ध न होने के बारे में चुनाव आयोग के सामने अपनी बात रखने में नाकाम रही. ये टिप्पणियां मतदाता दस्तावेजों, मतदाता सूची में संशोधन और नागरिकों के लिए सरकारी रिकॉर्ड की उपलब्धता पर चल रही चर्चाओं के बीच आई हैं. यह भी पढ़ें - चांदी चोरी से सोने के रामचरितमानस गायब होने के तक…, चंपत के इस्तीफे के बाद VHP ने बताई पूरी सच्चाई
AIMIM अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार को तेलंगाना सरकार से अपील की कि वह योग्य नागरिकों को स्थायी निवास प्रमाण पत्र (PRC) जारी करे और अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले जरूरी कदम उठाए.
हैदराबाद में वकीलों के लिए आयोजित 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) वर्कशॉप में बोलते हुए ओवैसी ने कहा कि सरकार को मतदाता वेरिफिकेशन प्रक्रिया के दौरान नागरिकों को होने वाली मुश्किलों का इंतजार नहीं करना चाहिए.
ओवैसी ने कर्नाटक का दिया उदाहरण
कर्नाटक का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वहां की कांग्रेस सरकार PRC जारी करती है और सवाल किया कि तेलंगाना में ऐसी व्यवस्था क्यों लागू नहीं की जा सकती. सभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कई राज्यों के आंकड़ों का जिक्र किया और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बीच डॉक्यूमेंट की कमी की ओर इशारा किया. उनके बताए आंकड़ों के अनुसार, लगभग 52 प्रतिशत गरीब नागरिकों के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं हैं, जबकि लगभग 42 प्रतिशत के पास जाति प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र नहीं हैं.
SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल, BRS पर साधा निशाना
उन्होंने तर्क दिया कि दस्तावेजों की जरूरतें समाज के कमजोर वर्गों पर बहुत ज्यादा असर डाल सकती हैं और जरूरी रिकॉर्ड व पहचान से जुड़े दस्तावेज आसानी से उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया. ओवैसी ने SIR प्रक्रिया पर BRS के रुख की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि तेलंगाना में एक दशक तक सत्ता में रहने के बावजूद पार्टी इस मुद्दे पर चुप रही.
यह भी पढ़ें - ‘किसकी क्या भूमिका रही’, चंदा चोरी पर चंपत राय-अनिल मिश्रा का इस्तीफा, जानें ट्रस्ट का पहला रिएक्शन
क्या बोले ओवैसी?
उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार तेलंगाना में वोटर वेरिफिकेशन के लिए बताए गए बारह जरूरी दस्तावेजों में से तीन के उपलब्ध न होने के बारे में चुनाव आयोग के सामने अपनी बात रखने में नाकाम रही. ये टिप्पणियां मतदाता दस्तावेजों, मतदाता सूची में संशोधन और नागरिकों के लिए सरकारी रिकॉर्ड की उपलब्धता पर चल रही चर्चाओं के बीच आई हैं.
यह भी पढ़ें - चांदी चोरी से सोने के रामचरितमानस गायब होने के तक…, चंपत के इस्तीफे के बाद VHP ने बताई पूरी सच्चाई
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