Shrinkflation: दाम वहीं, सामान में कमी! जानें क्या है Shrinkflation का खेल? ब्रांड मालिक और किसानों का बिजनेस बढ़ाने का फॉर्मूला

What is Shrinkflation: किसान और कई ब्रांड्स के मालिक अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाते हैं. जो बिजनेस से जुड़े लोग नहीं हैं उन्हें इसकी टर्म्स के बारे में ज्यादा अच्छी तरह से पता नहीं है. बिजनेस की एक टर्म है 'श्रिंकफ्लेशन', जिसका इस्तेमाल बिजनेस को बढ़ाने के लिए किया जाता है. इस नाम से इसे कम ही लोग जानते हैं, लेकिन जब इसे आसान भाषा में समझा जाएगा तो आप कहेंगे 'अरे हां ये तो होता है अक्सर'. आइये जानते हैं क्या है श्रिंकफ्लेशन और ये कैसे काम करता है? क्या है 'श्रिंकफ्लेशन'?आपने कई बार देखा होगा कि किसी चिप्स, बिस्किट, साबुन या फिर किसी और पैक्ड आइटम की कीमत वही रहती है लेकिन पैकेट के अंदर का सामान कम हो जाता है. इसी को श्रिंकफ्लेशन (Shrinkflation) कहा जाता है. आसान शब्दों में कहें तो, जब कंपनियां किसी प्रोडक्ट की कीमत बढ़ाने की जगह उसकी मात्रा या वजन कम कर देती हैं, तो उसे श्रिंकफ्लेशन कहते हैं. ये भी पढ़ें: Petrol-Diesel News: चक्का जाम की आशंका? पेट्रोल-डीजल के नए नियमों से ट्रांसपोर्टर परेशान, बढ़ सकता है मालभाड़ा कैसे काम करता है श्रिंकफ्लेशन?श्रिंकफ्लेशन में प्रोडक्ट का दाम सालों तक एक ही रहता है, लेकिन प्रोडकट की क्वांटिटी को कम कर दिया जाता है. इससे ग्राहक को कीमत में बदलाव नहीं दिखता, लेकिन उसे पहले के मुकाबले कम सामान मिलता है. उदाहरण के लिए पारले जी बिस्किट हम बचपन से खाते आ रहे हैं, इसके पैकेट की कीमत तब से लेकर आज तक भी 10 रुपये ही है. लेकिन आप ध्यान देंगे तो अंदर बिस्किट कम हो गए हैं, बस यही श्रिंकप्लेशन है. ऐसे ही चॉकलेट, मैगी आदि चीजों के साथ भी होता आ रहा है. कंपनियां ऐसा क्यों करती हैं?जब कच्चे माल, पैकेजिंग, मजदूरी और परिवहन की लागत बढ़ जाती है, तब कंपनियों के सामने मुनाफा बनाए रखने की चुनौती होती है. ऐसे में वो सीधे कीमत बढ़ाने की जगह प्रोडक्ट की मात्रा कम कर देती हैं. ऐसा करने से ग्राहकों को कीमत बढ़ने का झटका नहीं लगता, कंपनी का मुनाफा भी बना रहता है इतना ही नहीं बिक्री पर भी ज्यादा असर नहीं पड़ता. ये भी पढ़ें: FSSAI का बड़ा एक्शन, फूड पैकेट्स में मेटल पिन-तार के इस्तेमाल पर बैन, नियम तोड़ा तो खैर नहीं ब्रांड मालिकों और किसारों को कैसे पहुंचता है फायदा?श्रिंकफ्लेशन की वजह से ब्रांड मालिक बढ़ती लागत के बावजूद अपने मुनाफे को बचा पाते हैं. अगर वो सीधे कीमत बढ़ा दें तो ग्राहक दूसरे ब्रांड की ओर जा सकते हैं. इसलिए कई कंपनियां केवल कम करके लागत को नियंत्रित करती हैं. तो वहीं जब किसी प्रोडक्ट की मांग बनी रहती है और कंपनी का मुनाफा सुरक्षित रहता है, तो वो प्रोडक्शन जारी रखती है. इससे कृषि उत्पादों जैसे गेहूं, आलू, चीनी, दूध, तेल बीज आदि की खरीद भी जारी रहती है. प्रोडक्शन बढ़ने पर किसानों की उपज की मांग बनी रहती है, जिससे उनके कारोबार को भी फायदा मिल सकता है.

Jun 13, 2026 - 00:30
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Shrinkflation: दाम वहीं, सामान में कमी! जानें क्या है Shrinkflation का खेल? ब्रांड मालिक और किसानों का बिजनेस बढ़ाने का फॉर्मूला

What is Shrinkflation: किसान और कई ब्रांड्स के मालिक अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाते हैं. जो बिजनेस से जुड़े लोग नहीं हैं उन्हें इसकी टर्म्स के बारे में ज्यादा अच्छी तरह से पता नहीं है. बिजनेस की एक टर्म है 'श्रिंकफ्लेशन', जिसका इस्तेमाल बिजनेस को बढ़ाने के लिए किया जाता है. इस नाम से इसे कम ही लोग जानते हैं, लेकिन जब इसे आसान भाषा में समझा जाएगा तो आप कहेंगे 'अरे हां ये तो होता है अक्सर'. आइये जानते हैं क्या है श्रिंकफ्लेशन और ये कैसे काम करता है?

क्या है 'श्रिंकफ्लेशन'?
आपने कई बार देखा होगा कि किसी चिप्स, बिस्किट, साबुन या फिर किसी और पैक्ड आइटम की कीमत वही रहती है लेकिन पैकेट के अंदर का सामान कम हो जाता है. इसी को श्रिंकफ्लेशन (Shrinkflation) कहा जाता है. आसान शब्दों में कहें तो, जब कंपनियां किसी प्रोडक्ट की कीमत बढ़ाने की जगह उसकी मात्रा या वजन कम कर देती हैं, तो उसे श्रिंकफ्लेशन कहते हैं.

ये भी पढ़ें: Petrol-Diesel News: चक्का जाम की आशंका? पेट्रोल-डीजल के नए नियमों से ट्रांसपोर्टर परेशान, बढ़ सकता है मालभाड़ा

कैसे काम करता है श्रिंकफ्लेशन?
श्रिंकफ्लेशन में प्रोडक्ट का दाम सालों तक एक ही रहता है, लेकिन प्रोडकट की क्वांटिटी को कम कर दिया जाता है. इससे ग्राहक को कीमत में बदलाव नहीं दिखता, लेकिन उसे पहले के मुकाबले कम सामान मिलता है.

उदाहरण के लिए पारले जी बिस्किट हम बचपन से खाते आ रहे हैं, इसके पैकेट की कीमत तब से लेकर आज तक भी 10 रुपये ही है. लेकिन आप ध्यान देंगे तो अंदर बिस्किट कम हो गए हैं, बस यही श्रिंकप्लेशन है. ऐसे ही चॉकलेट, मैगी आदि चीजों के साथ भी होता आ रहा है.

कंपनियां ऐसा क्यों करती हैं?
जब कच्चे माल, पैकेजिंग, मजदूरी और परिवहन की लागत बढ़ जाती है, तब कंपनियों के सामने मुनाफा बनाए रखने की चुनौती होती है. ऐसे में वो सीधे कीमत बढ़ाने की जगह प्रोडक्ट की मात्रा कम कर देती हैं. ऐसा करने से ग्राहकों को कीमत बढ़ने का झटका नहीं लगता, कंपनी का मुनाफा भी बना रहता है इतना ही नहीं बिक्री पर भी ज्यादा असर नहीं पड़ता.

ये भी पढ़ें: FSSAI का बड़ा एक्शन, फूड पैकेट्स में मेटल पिन-तार के इस्तेमाल पर बैन, नियम तोड़ा तो खैर नहीं

ब्रांड मालिकों और किसारों को कैसे पहुंचता है फायदा?
श्रिंकफ्लेशन की वजह से ब्रांड मालिक बढ़ती लागत के बावजूद अपने मुनाफे को बचा पाते हैं. अगर वो सीधे कीमत बढ़ा दें तो ग्राहक दूसरे ब्रांड की ओर जा सकते हैं. इसलिए कई कंपनियां केवल कम करके लागत को नियंत्रित करती हैं.

तो वहीं जब किसी प्रोडक्ट की मांग बनी रहती है और कंपनी का मुनाफा सुरक्षित रहता है, तो वो प्रोडक्शन जारी रखती है. इससे कृषि उत्पादों जैसे गेहूं, आलू, चीनी, दूध, तेल बीज आदि की खरीद भी जारी रहती है. प्रोडक्शन बढ़ने पर किसानों की उपज की मांग बनी रहती है, जिससे उनके कारोबार को भी फायदा मिल सकता है.

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