Poila Boishakh 2026: पोइला बोइशाख क्या है ? बंगाली लोग इसी दिन से क्यों मनाते हैं नया साल, जानें डेट और महत्व

Poila Boishakh 2026: भारत में नववर्ष के भिन्न होने के कारण सभी धर्म के कैलेंडर भी अलग-अलग होते हैं. बंगाली समुदाय का नववर्ष पोइला बैशाख या पोइला बोइशाख से शुरू होता है. पोइला बंगाली शब्द है जिसका अर्थ है पहला. बैशाख का दिन बंगाली समुदाय के लिए बहुत शुभ है और इसके पहले दिन बंगाली न्यू ईयर की शुरुआत होती है. इस साल पोइला बोइशाख 15 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा. पोइला बैशाख या बंगला नववर्ष को पश्चिम बंगाल, बंगलादेश, त्रिपुरा और अन्य उत्तर-पूर्वी भारतीय राज्यों में बंगाली समुदाय द्वारा बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. बांग्लादेश में, इसे ढाका, चटगांव और टांगेल जैसे शहरों में एक धर्मनिरपेक्ष त्योहार के रूप में मनाया जाता है. पोइला बोइशाख महत्व बंगाली समुदाय के लोग इस दिन शुभो नोबो बोरशो (नया साल मुबारक) के रूप में मनाया जाता है, जिसमें नए कपड़े पहनना, स्वादिष्ट भोजन (जैसे मछली, मिठाइयाँ) और व्यवसायों के लिए 'हाल खाता' (नया बही-खाता शुरू करना) की परंपरा शामिल है. नए व्यवसाय शुरू करने और यहां तक ​​कि पुराने कर्ज चुकाने के लिए यह एक शुभ दिन माना जाता है. क्यों बनाया गया बंगाली कैलेंडर पोइला बैसाख के इतिहास की बात करें तो जानकारों के अनुसार सातवीं शताब्दी में गौड़ा वंश के राजा शशांक के शासनकाल में इसकी शुरुआत हुई थी, जिन्हें बंगाली पंचांग का निर्माता माना जाता है. कुछ मतों के अनुसार, इस त्योहार की शुरुआत इस्लामी हिजरी पंचांग को सौर कृषि चक्रों के अनुरूप बनाने के लिए हुई थी, जिससे मुगल शासन के दौरान कर संग्रह को सरल बनाने में मदद मिली. प्रमुख रीति-रिवाज और परंपराएं इस दिन बंगाली लोग घरों के बाहर चावल के पाउडर के घोल से रंगोली बनाते हैं, ये समृद्धि का प्रतीक है. इस दिन नई शुरुआत के तौर पर नए कपड़े पहने जाते हैं. प्रार्थना करने और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मंदिरों में जाते हैं कुछ जगह पर धार्मिक जुलूस(परेड) निकाली जाती है. परेड के बाद, पुरुष और महिलाएं विभिन्न प्रकार के लोकप्रिय लोक गीतों को गाते और नृत्य करते हैं. लोग दिनभर अपने दोस्तों और परिवार वालों से मिलने जाते हैं और एक-दूसरे को बधाई देते हैं और मिठाइयां बांटते हैं. Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर 300 साल बाद 5 राजयोग, 4 शुभ मुहूर्त, शिव पूजा का महत्व बढ़ा Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Feb 10, 2026 - 14:30
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Poila Boishakh 2026: पोइला बोइशाख क्या है ? बंगाली लोग इसी दिन से क्यों मनाते हैं नया साल, जानें डेट और महत्व

Poila Boishakh 2026: भारत में नववर्ष के भिन्न होने के कारण सभी धर्म के कैलेंडर भी अलग-अलग होते हैं. बंगाली समुदाय का नववर्ष पोइला बैशाख या पोइला बोइशाख से शुरू होता है. पोइला बंगाली शब्द है जिसका अर्थ है पहला. बैशाख का दिन बंगाली समुदाय के लिए बहुत शुभ है और इसके पहले दिन बंगाली न्यू ईयर की शुरुआत होती है. इस साल पोइला बोइशाख 15 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा.

पोइला बैशाख या बंगला नववर्ष को पश्चिम बंगाल, बंगलादेश, त्रिपुरा और अन्य उत्तर-पूर्वी भारतीय राज्यों में बंगाली समुदाय द्वारा बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. बांग्लादेश में, इसे ढाका, चटगांव और टांगेल जैसे शहरों में एक धर्मनिरपेक्ष त्योहार के रूप में मनाया जाता है.

पोइला बोइशाख महत्व

बंगाली समुदाय के लोग इस दिन शुभो नोबो बोरशो (नया साल मुबारक) के रूप में मनाया जाता है, जिसमें नए कपड़े पहनना, स्वादिष्ट भोजन (जैसे मछली, मिठाइयाँ) और व्यवसायों के लिए 'हाल खाता' (नया बही-खाता शुरू करना) की परंपरा शामिल है. नए व्यवसाय शुरू करने और यहां तक ​​कि पुराने कर्ज चुकाने के लिए यह एक शुभ दिन माना जाता है.

क्यों बनाया गया बंगाली कैलेंडर

पोइला बैसाख के इतिहास की बात करें तो जानकारों के अनुसार सातवीं शताब्दी में गौड़ा वंश के राजा शशांक के शासनकाल में इसकी शुरुआत हुई थी, जिन्हें बंगाली पंचांग का निर्माता माना जाता है. कुछ मतों के अनुसार, इस त्योहार की शुरुआत इस्लामी हिजरी पंचांग को सौर कृषि चक्रों के अनुरूप बनाने के लिए हुई थी, जिससे मुगल शासन के दौरान कर संग्रह को सरल बनाने में मदद मिली.

प्रमुख रीति-रिवाज और परंपराएं

  • इस दिन बंगाली लोग घरों के बाहर चावल के पाउडर के घोल से रंगोली बनाते हैं, ये समृद्धि का प्रतीक है.
  • इस दिन नई शुरुआत के तौर पर नए कपड़े पहने जाते हैं.
  • प्रार्थना करने और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मंदिरों में जाते हैं
  • कुछ जगह पर धार्मिक जुलूस(परेड) निकाली जाती है. परेड के बाद, पुरुष और महिलाएं विभिन्न प्रकार के लोकप्रिय लोक गीतों को गाते और नृत्य करते हैं.
  • लोग दिनभर अपने दोस्तों और परिवार वालों से मिलने जाते हैं और एक-दूसरे को बधाई देते हैं और मिठाइयां बांटते हैं.

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर 300 साल बाद 5 राजयोग, 4 शुभ मुहूर्त, शिव पूजा का महत्व बढ़ा

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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