NTA को खत्म करना नहीं, मजबूत करना जरूरी, पूर्व UGC चीफ ने बताया पूरा प्लान
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA पिछले कुछ समय से लगातार सवालों के घेरे में रही है. पिछले कुछ दिनों में UGC NEET पेपर लीक के मामले में बच्चों ने बड़ी मात्रा में दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों का प्रदर्शन किया था, जिसके बाद देश के शिक्षा मंत्री को इस्तीफा तक देना पड़ा था. इन सारे मामलों की आग अभी तक ठंडी हुई ही नहीं थी कि अब इसके बाद UGC NET परीक्षा में भी गड़बड़ियां सामने आईं. इन घटनाओं के बाद से ही यह सवाल उठ रहा है कि क्या NTA को पूरी तरह बदल दिया जाना चाहिए. इसी सवाल पर पूर्व UGC चेयरमैन मामिडाला जगदीश कुमार ने अपनी राय रखी है. वे फिलहाल NEP 2020 की रिव्यू कमेटी के चेयरमैन भी हैं. उन्होंने PTI से बातचीत में कहा कि NTA को खत्म करके नई एजेंसी बनाना सही रास्ता नहीं है, बल्कि इसे अंदर से मजबूत करने की जरूरत है. उनके मुताबिक हर साल एक करोड़ से ज्यादा छात्र NTA की परीक्षाओं में बैठते हैं, इसलिए यह मुद्दा सिर्फ एक एजेंसी बदलने का नहीं बल्कि पूरे सिस्टम को सुरक्षित बनाने का है. एक ही एजेंसी क्यों जरूरी है कुमार ने कहा कि परीक्षाओं को अलग-अलग एजेंसियों में बांटना कोई समाधान नहीं है. उनका कहना था कि सिर्फ काम का बोझ कम दिखाने के लिए परीक्षाओं को कई एजेंसियों में बांटना ठीक नहीं होगा. उन्होंने समझाया कि एक ही राष्ट्रीय टेस्टिंग बॉडी होने से सुरक्षा के नियम, टेक्नोलॉजी, छात्रों को दी जाने वाली सुविधाएं और रिजल्ट बनाने का तरीका एक जैसा रहता है. अगर कई नई एजेंसियां बना दी जाएं तो खर्चा भी दोगुना हो जाएगा और हर जगह सुरक्षा का स्तर अलग-अलग हो जाएगा. साथ ही उन्होंने रामकृष्णन कमेटी की सिफारिशों का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि जो मंत्रालय या संस्था परीक्षा कराना चाहती है, उसे सिलेबस, विषय विशेषज्ञ और सवालों की क्वालिटी की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए. वहीं NTA को सुरक्षित प्लेटफॉर्म, परीक्षा केंद्रों का नेटवर्क, छात्रों की पहचान जांच और रिजल्ट तैयार करने पर ध्यान देना चाहिए. सरकार ने जुलाई में बताया था कि कमेटी के 46 में से 35 बड़े सुझावों पर पहले ही काम हो चुका है, जैसे करीब 600 विशेषज्ञों को बदलना और सवालों की चार स्तर पर जांच शुरू करना चाहिए. यह भी पढ़ेंः 8वें वेतन आयोग के बाद कितनी बढ़ेगी बैंक क्लर्क की सैलरी, देखें हिसाब-किताब आगे क्या करना जरूरी है कुमार ने तीन बड़े सुधारों को सबसे जरूरी बताया. पहला, पूरी परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाना यानी सवाल बनाने से लेकर छपाई, स्टोरेज और सेंटर तक हर कदम पर पूरा रिकॉर्ड रखा जाए. दूसरा, टेस्ट डिजाइन, साइबर सिक्योरिटी, भाषा और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में स्थायी विशेषज्ञ टीम बनाना ताकि हर बार नए लोग न रखने पड़ें. तीसरा, परीक्षा केंद्रों और छात्रों की सुविधाओं को पूरी तरह भरोसेमंद बनाना, जिसमें CCTV निगरानी, बायोमेट्रिक जांच, बिजली और इंटरनेट की सुविधा तथा ट्रेंड स्टाफ शामिल हो. कुमार के अनुसार NTA के पास पहले से ही अनुभव, टेक्नोलॉजी और परीक्षा केंद्रों का बड़ा नेटवर्क मौजूद है, इसलिए इसे खत्म करने के बजाय इसे और मजबूत बनाना ज्यादा सही रास्ता है. यह भी पढ़ेंः CGHS की सफाई, 27 से 31 अगस्त तक बंद नहीं होंगे वेलनेस सेंटर
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA पिछले कुछ समय से लगातार सवालों के घेरे में रही है. पिछले कुछ दिनों में UGC NEET पेपर लीक के मामले में बच्चों ने बड़ी मात्रा में दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों का प्रदर्शन किया था, जिसके बाद देश के शिक्षा मंत्री को इस्तीफा तक देना पड़ा था. इन सारे मामलों की आग अभी तक ठंडी हुई ही नहीं थी कि अब इसके बाद UGC NET परीक्षा में भी गड़बड़ियां सामने आईं. इन घटनाओं के बाद से ही यह सवाल उठ रहा है कि क्या NTA को पूरी तरह बदल दिया जाना चाहिए. इसी सवाल पर पूर्व UGC चेयरमैन मामिडाला जगदीश कुमार ने अपनी राय रखी है. वे फिलहाल NEP 2020 की रिव्यू कमेटी के चेयरमैन भी हैं. उन्होंने PTI से बातचीत में कहा कि NTA को खत्म करके नई एजेंसी बनाना सही रास्ता नहीं है, बल्कि इसे अंदर से मजबूत करने की जरूरत है. उनके मुताबिक हर साल एक करोड़ से ज्यादा छात्र NTA की परीक्षाओं में बैठते हैं, इसलिए यह मुद्दा सिर्फ एक एजेंसी बदलने का नहीं बल्कि पूरे सिस्टम को सुरक्षित बनाने का है.
एक ही एजेंसी क्यों जरूरी है
कुमार ने कहा कि परीक्षाओं को अलग-अलग एजेंसियों में बांटना कोई समाधान नहीं है. उनका कहना था कि सिर्फ काम का बोझ कम दिखाने के लिए परीक्षाओं को कई एजेंसियों में बांटना ठीक नहीं होगा. उन्होंने समझाया कि एक ही राष्ट्रीय टेस्टिंग बॉडी होने से सुरक्षा के नियम, टेक्नोलॉजी, छात्रों को दी जाने वाली सुविधाएं और रिजल्ट बनाने का तरीका एक जैसा रहता है. अगर कई नई एजेंसियां बना दी जाएं तो खर्चा भी दोगुना हो जाएगा और हर जगह सुरक्षा का स्तर अलग-अलग हो जाएगा. साथ ही उन्होंने रामकृष्णन कमेटी की सिफारिशों का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि जो मंत्रालय या संस्था परीक्षा कराना चाहती है, उसे सिलेबस, विषय विशेषज्ञ और सवालों की क्वालिटी की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए. वहीं NTA को सुरक्षित प्लेटफॉर्म, परीक्षा केंद्रों का नेटवर्क, छात्रों की पहचान जांच और रिजल्ट तैयार करने पर ध्यान देना चाहिए. सरकार ने जुलाई में बताया था कि कमेटी के 46 में से 35 बड़े सुझावों पर पहले ही काम हो चुका है, जैसे करीब 600 विशेषज्ञों को बदलना और सवालों की चार स्तर पर जांच शुरू करना चाहिए.
यह भी पढ़ेंः 8वें वेतन आयोग के बाद कितनी बढ़ेगी बैंक क्लर्क की सैलरी, देखें हिसाब-किताब
आगे क्या करना जरूरी है
कुमार ने तीन बड़े सुधारों को सबसे जरूरी बताया.
- पहला, पूरी परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाना यानी सवाल बनाने से लेकर छपाई, स्टोरेज और सेंटर तक हर कदम पर पूरा रिकॉर्ड रखा जाए.
- दूसरा, टेस्ट डिजाइन, साइबर सिक्योरिटी, भाषा और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में स्थायी विशेषज्ञ टीम बनाना ताकि हर बार नए लोग न रखने पड़ें.
- तीसरा, परीक्षा केंद्रों और छात्रों की सुविधाओं को पूरी तरह भरोसेमंद बनाना, जिसमें CCTV निगरानी, बायोमेट्रिक जांच, बिजली और इंटरनेट की सुविधा तथा ट्रेंड स्टाफ शामिल हो.
कुमार के अनुसार NTA के पास पहले से ही अनुभव, टेक्नोलॉजी और परीक्षा केंद्रों का बड़ा नेटवर्क मौजूद है, इसलिए इसे खत्म करने के बजाय इसे और मजबूत बनाना ज्यादा सही रास्ता है.
यह भी पढ़ेंः CGHS की सफाई, 27 से 31 अगस्त तक बंद नहीं होंगे वेलनेस सेंटर
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