NEET पेपर लीक विवाद के बीच समझें मेडिकल सीटों का आरक्षण गणित, जानिए पूरा सिस्टम

हर साल नीट परीक्षा में लाखों की संख्या में कैंडिडेट्स शामिल होते हैं. इस साल भी हुए थे लेकिन पेपर लीक की खबरों के बीच परीक्षा को रद्द कर दिया गया. अब एनटीए की तरफ से जल्द ही नई डेट का एलान किया जा सकता है. जिसका सभी कैंडिडेट्स को इंतजार है. लेकिन क्या आपको नीट यूजी के जरिए मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए सीटों का बंटवारे की जानकारी है? अगर नहीं तो आज हम आपको बताएंगे... हम सबसे पहले बात 15% ऑल इंडिया कोटा की करते हैं. इसके तहत आने वाली सीटों पर पूरे देश के छात्र प्रतिस्पर्धा करते हैं. इसमें केंद्रीय संस्थान जैसे AIIMS, JIPMER, BHU, AMU और अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालय शामिल होते हैं. इन सीटों पर केंद्र सरकार की आरक्षण नीति सख्ती से लागू होती है. यहीं पर अलग-अलग वर्गों के लिए तय प्रतिशत लागू होता है, जो पूरे देश में समान है. ऑल इंडिया कोटा और केंद्रीय संस्थानों में आरक्षण का पैटर्न इस तरह है OBC (नॉन क्रीमी लेयर) को 27% सीटें मिलती हैं. आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS को 10% सीटें मिलती हैं. अनुसूचित जाति (SC) के लिए 15% और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 7.5% सीटें तय हैं. इसके अलावा 5% सीटें PwBD यानी दिव्यांग छात्रों के लिए रखी जाती हैं. यह 5% आरक्षण हॉरिजॉन्टल होता है, यानी यह जनरल, EWS, OBC, SC, ST सभी श्रेणियों के भीतर लागू होता है.यह भी पढ़ें - NEET पेपर लीक ने ली एक और जान, जानें अब तक कितने स्टूडेंट्स कर चुके हैं सुसाइड? स्टेट कोटा में क्या होता है? अब बात 85% स्टेट कोटा की. सरकारी मेडिकल कॉलेजों की ज्यादातर सीटें इसी कोटे में आती हैं. इन सीटों पर वही छात्र दावा कर सकते हैं जो उस राज्य के निवासी हों या जिन्होंने वहीं से पढ़ाई की हो. यहां आरक्षण का पैटर्न राज्य सरकार तय करती है, क्योंकि स्वास्थ्य राज्य का विषय है. इसलिए अलग-अलग राज्यों में OBC या अन्य वर्गों का प्रतिशत थोड़ा अलग हो सकता है. हालांकि SC, ST और EWS जैसी श्रेणियां लगभग हर राज्य में लागू रहती हैं. विशेष श्रेणियां के लिए जरूरी कुछ विशेष श्रेणियां भी होती हैं. PwBD का 5% आरक्षण हर जगह लागू होता है. कई राज्यों और कॉलेजों में रक्षा कर्मियों के बच्चों के लिए भी हॉरिजॉन्टल आरक्षण मिलता है. निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों में NRI और मैनेजमेंट कोटा भी होता है, जहां फीस अलग होती है और नियम भी अलग हो सकते हैं.यह भी पढ़ें - MBBS सीटें बचानी हैं तो 30 मई तक करें यह जरूरी काम, NMC का मेडिकल कॉलेजों को सख्त निर्देश

May 14, 2026 - 21:30
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NEET पेपर लीक विवाद के बीच समझें मेडिकल सीटों का आरक्षण गणित, जानिए पूरा सिस्टम

हर साल नीट परीक्षा में लाखों की संख्या में कैंडिडेट्स शामिल होते हैं. इस साल भी हुए थे लेकिन पेपर लीक की खबरों के बीच परीक्षा को रद्द कर दिया गया. अब एनटीए की तरफ से जल्द ही नई डेट का एलान किया जा सकता है. जिसका सभी कैंडिडेट्स को इंतजार है. लेकिन क्या आपको नीट यूजी के जरिए मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए सीटों का बंटवारे की जानकारी है? अगर नहीं तो आज हम आपको बताएंगे...

हम सबसे पहले बात 15% ऑल इंडिया कोटा की करते हैं. इसके तहत आने वाली सीटों पर पूरे देश के छात्र प्रतिस्पर्धा करते हैं. इसमें केंद्रीय संस्थान जैसे AIIMS, JIPMER, BHU, AMU और अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालय शामिल होते हैं. इन सीटों पर केंद्र सरकार की आरक्षण नीति सख्ती से लागू होती है. यहीं पर अलग-अलग वर्गों के लिए तय प्रतिशत लागू होता है, जो पूरे देश में समान है.

ऑल इंडिया कोटा और केंद्रीय संस्थानों में आरक्षण का पैटर्न इस तरह है OBC (नॉन क्रीमी लेयर) को 27% सीटें मिलती हैं. आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS को 10% सीटें मिलती हैं. अनुसूचित जाति (SC) के लिए 15% और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 7.5% सीटें तय हैं. इसके अलावा 5% सीटें PwBD यानी दिव्यांग छात्रों के लिए रखी जाती हैं. यह 5% आरक्षण हॉरिजॉन्टल होता है, यानी यह जनरल, EWS, OBC, SC, ST सभी श्रेणियों के भीतर लागू होता है.

यह भी पढ़ें - NEET पेपर लीक ने ली एक और जान, जानें अब तक कितने स्टूडेंट्स कर चुके हैं सुसाइड?

स्टेट कोटा में क्या होता है?

अब बात 85% स्टेट कोटा की. सरकारी मेडिकल कॉलेजों की ज्यादातर सीटें इसी कोटे में आती हैं. इन सीटों पर वही छात्र दावा कर सकते हैं जो उस राज्य के निवासी हों या जिन्होंने वहीं से पढ़ाई की हो. यहां आरक्षण का पैटर्न राज्य सरकार तय करती है, क्योंकि स्वास्थ्य राज्य का विषय है. इसलिए अलग-अलग राज्यों में OBC या अन्य वर्गों का प्रतिशत थोड़ा अलग हो सकता है. हालांकि SC, ST और EWS जैसी श्रेणियां लगभग हर राज्य में लागू रहती हैं.

विशेष श्रेणियां के लिए जरूरी

कुछ विशेष श्रेणियां भी होती हैं. PwBD का 5% आरक्षण हर जगह लागू होता है. कई राज्यों और कॉलेजों में रक्षा कर्मियों के बच्चों के लिए भी हॉरिजॉन्टल आरक्षण मिलता है. निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों में NRI और मैनेजमेंट कोटा भी होता है, जहां फीस अलग होती है और नियम भी अलग हो सकते हैं.

यह भी पढ़ें - MBBS सीटें बचानी हैं तो 30 मई तक करें यह जरूरी काम, NMC का मेडिकल कॉलेजों को सख्त निर्देश

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