Monsoon Prediction 2026: 22 जून से वर्षाकाल शुरू, 56 दिन बरसेंगे बादल, पर कुछ राज्यों पर मंडरा रहा अकाल का खतरा!
Monsoon Prediction 2026: मानसून पूर्वानुमान, देश में इस वर्ष मानसून सामान्य रहने के संकेत हैं, लेकिन बारिश का मिजाज पूरे चार महीनों तक एक जैसा नहीं रहेगा. ज्योतिषीय गणनाओं और पंचांग के अनुसार, इस वर्ष वर्षाकाल में कुल 56 दिन वर्षा के योग बन रहे हैं, जिसमें सर्वाधिक बारिश सावन के महीने में होने की संभावना है. हालांकि, सामान्य वर्षा के बावजूद कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति और कहीं-कहीं अतिवृष्टि (बाढ़) की आशंका भी जताई गई है. ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश की विशेष कुंडली के आधार पर वर्ष 2026 के मानसून का विस्तृत आकलन जारी किया है. 22 जून को सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश: कैसा रहेगा ग्रहों का गणित? ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, प्रतिवर्ष सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश के समय बनने वाली कुंडली से ही मानसून की स्थिति का सटीक आकलन किया जाता है. प्रवेश का समय: विक्रमी संवत् 2083 में सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश 22 जून 2026 को दोपहर 12:25 (प्रामाणिक समयानुसार 12:26 बजे) पर होगा. लग्न और नक्षत्र: इस समय हस्त नक्षत्र, वरियान योग, कन्या राशि के चन्द्रमा तथा कन्या लग्न का उदय होगा. सकारात्मक संकेत: लग्न में जलतत्त्व कारक ग्रह 'चन्द्रमा' की उपस्थिति वर्षा के लिए अनुकूल है. जून से सितंबर तक मंगल का सूर्य से पीछे रहना भी शुभ योग है. इसके अलावा, गुरु और शनि दोनों जल तत्व की राशियों में गोचर करेंगे, जिससे देश में 95 से 100 प्रतिशत तक सामान्य मानसून रहने की संभावना है. चुनौतियां: शुष्क राशि और वायुकारक ग्रह शनि की दृष्टि के कारण मेघों की चाल में व्यवधान आ सकता है, जिससे कुछ क्षेत्रों में बारिश का असमान वितरण (खण्डवृष्टि) देखने को मिलेगा. चार महीनों का वर्षा गणित: किस महीने कितने दिन बरसेंगे बादल? पंचांगीय गणना के अनुसार, आगामी चार महीनों में कुल 56 वर्षा दिवस (Rainy Days) होंगे. बारिश की तीव्रता को तीन श्रेणियों में बांटा गया है: मासिक वर्षा विवरण आषाढ़: 13 दिन सावन: 16 दिन (सर्वाधिक मेहरबान) भाद्रपद: 15 दिन आश्विन: 12 दिन वर्षा की तीव्रता का वर्गीकरण वर्षा का प्रकार निर्धारित दिन उत्तम वर्षा 35 दिन मध्यम वर्षा 13 दिन मंद वर्षा 08 दिन कुल वर्षा दिवस 56 दिन कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे के संकेत: देशव्यापी मौसमी प्रभाव ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 26 जुलाई से शनि के वक्री होने और गुरु की तेज गति के कारण अगस्त और सितंबर में असामान्य वर्षा की स्थितियां बनेंगी. यहां बन सकते हैं बाढ़ के हालात (16 जुलाई से 15 अगस्त) इस अवधि में गुरु और सूर्य की युति के कारण देश के कई हिस्सों में भारी वर्षा से अतिवृष्टि हो सकती है. विशेषकर मध्य भारत के राज्यों में प्रबल योग हैं: छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश ओडिशा पूर्वी एवं दक्षिणी भारत (व्यापक वर्षा) यहां मंडराएगा सूखे और अकाल का खतरा (22 अगस्त से 17 सितंबर) इस दौरान ग्रहों के शुष्क राशियों में प्रवेश करने से मानसून की गतिविधियों में कमी आएगी. इसके अलावा, मंगल-शनि के मध्य दृष्टि संबंध होने से कुछ क्षेत्रों में लू, अग्निकांड और अल्प वर्षा की स्थिति बनेगी: उत्तर-पश्चिम के कुछ क्षेत्र पश्चिमी राज्य उत्तरी राज्यों में केवल खण्डवृष्टि (पैच में बारिश) के योग हैं. यह भी पढ़े- Mars Transit in Taurus 2026: 21 जून को मंगल का वृषभ राशि में गोचर, इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जानें महाउपाय कृषि और अर्थव्यवस्था पर कैसा होगा असर? "आर्द्रा प्रवेश सोमवार को होने से सुभिक्ष के संकेत हैं. अर्थात् पर्याप्त वर्षा होने से गेहूँ, अन्न आदि का उत्पादन अच्छा होगा तथा बाज़ार में मूल्यों में विशेष वृद्धि नहीं होगी." शशिधरवारे स्मरहरधिष्ण्ये. दिनकरवेशे सतिहिसुभिक्षम् .. किसानों के लिए राहत: डा. अनीष व्यास के अनुसार, यह पूर्वानुमान किसानों के लिए कुल मिलाकर राहत भरा है. सावन में होने वाली बंपर बारिश से रेगिस्तानी इलाकों में हरियाली छाएगी. इससे खरीफ की प्रमुख फसलों को पर्याप्त नमी मिलेगी: बाजरा, मूंग, मोठ, ग्वार और तिल. नुकसान की आशंका (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा - जल स्तंभ रेवती 03.63%): इस बार जलस्तम्भ लगभग नगण्य (03.63%) है, इसलिए कुछ प्रतिकूल प्रभाव भी देखने को मिलेंगे: अकाल और फसलों को क्षति: बिहार, उड़ीसा, असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे मध्य-पूर्वी क्षेत्रों में बिना मौसम की वृष्टि (बेमौसम बारिश) से कृषि को हानि हो सकती है. अत्यधिक जल से होने वाली खेती (जैसे चावल/धान) को नुकसान पहुंच सकता है. भू-जल स्तर: कई क्षेत्रों में भू-जल (Groundwater) में गिरावट दर्ज की जाएगी. महंगाई के संकेत: दोपहर के समय आर्द्रा प्रवेश होने के कारण खड़ी फसलों को अज्ञात बीमारी से नुकसान हो सकता है. हस्त-नक्षत्र के प्रभाव से धन-धान्य और वस्त्रों की वृद्धि तो होगी, लेकिन वरियान योग के कारण फल, कंदमूल, धान्य, चावल और चना आदि अनाज महंगे हो सकते हैं. (शास्त्रानुसार: मध्याह्नकाले कृषिनाशनाय धान्यं महर्घ च तृणस्य नाशः ) यह भी पढ़े- Astrology Tips: गुस्सा, तनाव और ओवरथिंकिंग से हैं परेशान? बस हाथ में पहन लें यह ब्रेसलेट, जानें किन राशियों और मूलांकों के लिए है बेहद शुभ Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
Monsoon Prediction 2026: मानसून पूर्वानुमान, देश में इस वर्ष मानसून सामान्य रहने के संकेत हैं, लेकिन बारिश का मिजाज पूरे चार महीनों तक एक जैसा नहीं रहेगा. ज्योतिषीय गणनाओं और पंचांग के अनुसार, इस वर्ष वर्षाकाल में कुल 56 दिन वर्षा के योग बन रहे हैं, जिसमें सर्वाधिक बारिश सावन के महीने में होने की संभावना है. हालांकि, सामान्य वर्षा के बावजूद कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति और कहीं-कहीं अतिवृष्टि (बाढ़) की आशंका भी जताई गई है.
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश की विशेष कुंडली के आधार पर वर्ष 2026 के मानसून का विस्तृत आकलन जारी किया है.
22 जून को सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश: कैसा रहेगा ग्रहों का गणित?
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, प्रतिवर्ष सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश के समय बनने वाली कुंडली से ही मानसून की स्थिति का सटीक आकलन किया जाता है.
प्रवेश का समय: विक्रमी संवत् 2083 में सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश 22 जून 2026 को दोपहर 12:25 (प्रामाणिक समयानुसार 12:26 बजे) पर होगा.
लग्न और नक्षत्र: इस समय हस्त नक्षत्र, वरियान योग, कन्या राशि के चन्द्रमा तथा कन्या लग्न का उदय होगा.
सकारात्मक संकेत: लग्न में जलतत्त्व कारक ग्रह 'चन्द्रमा' की उपस्थिति वर्षा के लिए अनुकूल है. जून से सितंबर तक मंगल का सूर्य से पीछे रहना भी शुभ योग है. इसके अलावा, गुरु और शनि दोनों जल तत्व की राशियों में गोचर करेंगे, जिससे देश में 95 से 100 प्रतिशत तक सामान्य मानसून रहने की संभावना है.
चुनौतियां: शुष्क राशि और वायुकारक ग्रह शनि की दृष्टि के कारण मेघों की चाल में व्यवधान आ सकता है, जिससे कुछ क्षेत्रों में बारिश का असमान वितरण (खण्डवृष्टि) देखने को मिलेगा.
चार महीनों का वर्षा गणित: किस महीने कितने दिन बरसेंगे बादल?
पंचांगीय गणना के अनुसार, आगामी चार महीनों में कुल 56 वर्षा दिवस (Rainy Days) होंगे. बारिश की तीव्रता को तीन श्रेणियों में बांटा गया है:
मासिक वर्षा विवरण
- आषाढ़: 13 दिन
- सावन: 16 दिन (सर्वाधिक मेहरबान)
- भाद्रपद: 15 दिन
- आश्विन: 12 दिन
वर्षा की तीव्रता का वर्गीकरण
| वर्षा का प्रकार | निर्धारित दिन |
| उत्तम वर्षा | 35 दिन |
| मध्यम वर्षा | 13 दिन |
| मंद वर्षा | 08 दिन |
| कुल वर्षा दिवस | 56 दिन |
कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे के संकेत: देशव्यापी मौसमी प्रभाव
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 26 जुलाई से शनि के वक्री होने और गुरु की तेज गति के कारण अगस्त और सितंबर में असामान्य वर्षा की स्थितियां बनेंगी.
यहां बन सकते हैं बाढ़ के हालात (16 जुलाई से 15 अगस्त)
इस अवधि में गुरु और सूर्य की युति के कारण देश के कई हिस्सों में भारी वर्षा से अतिवृष्टि हो सकती है. विशेषकर मध्य भारत के राज्यों में प्रबल योग हैं:
- छत्तीसगढ़
- मध्य प्रदेश
- ओडिशा
- पूर्वी एवं दक्षिणी भारत (व्यापक वर्षा)
यहां मंडराएगा सूखे और अकाल का खतरा (22 अगस्त से 17 सितंबर)
इस दौरान ग्रहों के शुष्क राशियों में प्रवेश करने से मानसून की गतिविधियों में कमी आएगी. इसके अलावा, मंगल-शनि के मध्य दृष्टि संबंध होने से कुछ क्षेत्रों में लू, अग्निकांड और अल्प वर्षा की स्थिति बनेगी:
- उत्तर-पश्चिम के कुछ क्षेत्र
- पश्चिमी राज्य
- उत्तरी राज्यों में केवल खण्डवृष्टि (पैच में बारिश) के योग हैं.
कृषि और अर्थव्यवस्था पर कैसा होगा असर?
"आर्द्रा प्रवेश सोमवार को होने से सुभिक्ष के संकेत हैं. अर्थात् पर्याप्त वर्षा होने से गेहूँ, अन्न आदि का उत्पादन अच्छा होगा तथा बाज़ार में मूल्यों में विशेष वृद्धि नहीं होगी."
शशिधरवारे स्मरहरधिष्ण्ये. दिनकरवेशे सतिहिसुभिक्षम् ..
किसानों के लिए राहत:
डा. अनीष व्यास के अनुसार, यह पूर्वानुमान किसानों के लिए कुल मिलाकर राहत भरा है. सावन में होने वाली बंपर बारिश से रेगिस्तानी इलाकों में हरियाली छाएगी. इससे खरीफ की प्रमुख फसलों को पर्याप्त नमी मिलेगी:
-
बाजरा, मूंग, मोठ, ग्वार और तिल.
नुकसान की आशंका (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा - जल स्तंभ रेवती 03.63%):
इस बार जलस्तम्भ लगभग नगण्य (03.63%) है, इसलिए कुछ प्रतिकूल प्रभाव भी देखने को मिलेंगे:
अकाल और फसलों को क्षति: बिहार, उड़ीसा, असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे मध्य-पूर्वी क्षेत्रों में बिना मौसम की वृष्टि (बेमौसम बारिश) से कृषि को हानि हो सकती है. अत्यधिक जल से होने वाली खेती (जैसे चावल/धान) को नुकसान पहुंच सकता है.
भू-जल स्तर: कई क्षेत्रों में भू-जल (Groundwater) में गिरावट दर्ज की जाएगी.
महंगाई के संकेत: दोपहर के समय आर्द्रा प्रवेश होने के कारण खड़ी फसलों को अज्ञात बीमारी से नुकसान हो सकता है. हस्त-नक्षत्र के प्रभाव से धन-धान्य और वस्त्रों की वृद्धि तो होगी, लेकिन वरियान योग के कारण फल, कंदमूल, धान्य, चावल और चना आदि अनाज महंगे हो सकते हैं.
(शास्त्रानुसार: मध्याह्नकाले कृषिनाशनाय धान्यं महर्घ च तृणस्य नाशः )
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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