Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर ये गलती की तो सालभर रहेगी परेशानी! पूजा से पहले जरूर जान लें नियम?

MahaShivratri 2026 Puja Niyam: शिवरात्रि के मौके पर भक्तजन शिवजी की पूजा-अर्चना करने के साथ रातभर भजन-कीर्तन करते हैं. मान्यताओं के मुताबिक इस दिन उपवास रखने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होने के साथ जीवन में सुख और समृद्धि का आगमन होता है. हालांकि शास्त्रों में उपवास के लिए कुछ नियमों को बताया गया है, जिनका पालन करना बेहद जरूरी है.  इस साल महाशिवरात्रि का अत्यंत पवित्र पर्व 15 फरवरी 2026 के दिन मनाया जाएगा. महाशिवरात्रि के मौके पर निशीथ काल की पूजा का समय 15 फरवरी 2026 की रात को 11.52 मिनट से लेकर 16 फरवरी 2026 पूर्वाह्न 12.42 तक रहेगा.  शिवरात्रि के मौके पर इन नियमों का पालन करें? शिवजी की पूजा में जल अर्पित करने के कई नियम शामिल हैं, जिनका पालन करना हम सभी के लिए बेहद जरूरी है. यदि इन नियमों को अनदेखा किया जाए तो पूजा का संपूर्ण फल नहीं मिलता है. आइए सबसे पहले जानते हैं शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सही नियम क्या है?  शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके खड़ा होना चाहिए.  ऐसा करने से महादेव प्रसन्न होने के साथ आपकी पूजा को स्वीकार करते हैं. जल अर्पित करते समय इस बात का ध्यान रखें कि, जल उत्तर दिशा से शिवलिंग पर गिरे.  जल अर्पित करने के फौरन बाद परिक्रमा लगाना उचित नहीं माना जाता है.  महाशिवरात्रि के दिन इन नियमों का सख्ती से पालन करें? महाशिवरात्रि के मौके पर शिवजी की पूजा करने के लिए सही बर्तन का चयन करना बेहद जरूरी है. पूजा में कांसे के बर्तन का इस्तेमाल करना अशुभ होता है. इसलिए शिवलिंग पर दूध चढ़ाने के सोना, चांदी या तांबे के बर्तन का प्रयोग करें. महाशिवरात्रि पर काले रंग के वस्त्रों को धारण करने से बचने चाहिए. ऐसा करने से शिवजी नाराज होते हैं. पूजा के लिए पीले या हल्के रंगों के वस्त्रों को धारण करें. इनमें सफेद, आसमानी, गुलाबी और नारंगी कलर भी शामिल है.  अगर किसी कारण से महाशिवरात्रि के मौके पर व्रत नहीं रख सकते हैं, तो उस दिन भूलकर भी तामसिक भोजन, जैसे मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन करने से बचें. ऐसा माना जाता है कि, इससे पूजा का फल कम होता है.  महाशिवरात्रि पर अपने मन को शुद्ध रखें किसी भी तरह का गलत विचार मन में न आने दे. व्रत के दौरान अनाज की जगह फलों का ही सेवन करें. इस पावन पवित्र मौके पर भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से मन शांत रहता है.  महाशिवरात्रि के मौके पर भगवान शिव को तुलसी के पत्ते अर्पित करना वर्जित माना जाता है. इसके अलावा भगवान शिव को तिल अर्पित करने से भी बचें, क्योंकि तिल भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ है.  महाशिवरात्रि के दौरान भगवान शिव को भूलकर भी टूटे हुए चावल नहीं चढ़ाने चाहिए.  इसके अलावा महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को नारियल का पानी भी नहीं चढ़ाना चाहिए.  महाशिवरात्रि पर शिवजी को बिल्वपत्र चढ़ाने का विशेष महत्व होता है. ऐसे में बिल्व पत्र के तीनों पत्ते पूरे होने चाहिए, खंडित पत्र कभी भी न अर्पित करें. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Jan 28, 2026 - 12:30
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Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर ये गलती की तो सालभर रहेगी परेशानी! पूजा से पहले जरूर जान लें नियम?

MahaShivratri 2026 Puja Niyam: शिवरात्रि के मौके पर भक्तजन शिवजी की पूजा-अर्चना करने के साथ रातभर भजन-कीर्तन करते हैं. मान्यताओं के मुताबिक इस दिन उपवास रखने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होने के साथ जीवन में सुख और समृद्धि का आगमन होता है. हालांकि शास्त्रों में उपवास के लिए कुछ नियमों को बताया गया है, जिनका पालन करना बेहद जरूरी है. 

इस साल महाशिवरात्रि का अत्यंत पवित्र पर्व 15 फरवरी 2026 के दिन मनाया जाएगा. महाशिवरात्रि के मौके पर निशीथ काल की पूजा का समय 15 फरवरी 2026 की रात को 11.52 मिनट से लेकर 16 फरवरी 2026 पूर्वाह्न 12.42 तक रहेगा. 

शिवरात्रि के मौके पर इन नियमों का पालन करें?

शिवजी की पूजा में जल अर्पित करने के कई नियम शामिल हैं, जिनका पालन करना हम सभी के लिए बेहद जरूरी है. यदि इन नियमों को अनदेखा किया जाए तो पूजा का संपूर्ण फल नहीं मिलता है. आइए सबसे पहले जानते हैं शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सही नियम क्या है? 

  • शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके खड़ा होना चाहिए. 
  • ऐसा करने से महादेव प्रसन्न होने के साथ आपकी पूजा को स्वीकार करते हैं.
  • जल अर्पित करते समय इस बात का ध्यान रखें कि, जल उत्तर दिशा से शिवलिंग पर गिरे. 
  • जल अर्पित करने के फौरन बाद परिक्रमा लगाना उचित नहीं माना जाता है. 

महाशिवरात्रि के दिन इन नियमों का सख्ती से पालन करें?

महाशिवरात्रि के मौके पर शिवजी की पूजा करने के लिए सही बर्तन का चयन करना बेहद जरूरी है. पूजा में कांसे के बर्तन का इस्तेमाल करना अशुभ होता है. इसलिए शिवलिंग पर दूध चढ़ाने के सोना, चांदी या तांबे के बर्तन का प्रयोग करें.

महाशिवरात्रि पर काले रंग के वस्त्रों को धारण करने से बचने चाहिए. ऐसा करने से शिवजी नाराज होते हैं. पूजा के लिए पीले या हल्के रंगों के वस्त्रों को धारण करें. इनमें सफेद, आसमानी, गुलाबी और नारंगी कलर भी शामिल है. 

अगर किसी कारण से महाशिवरात्रि के मौके पर व्रत नहीं रख सकते हैं, तो उस दिन भूलकर भी तामसिक भोजन, जैसे मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन करने से बचें. ऐसा माना जाता है कि, इससे पूजा का फल कम होता है. 

महाशिवरात्रि पर अपने मन को शुद्ध रखें किसी भी तरह का गलत विचार मन में न आने दे.

व्रत के दौरान अनाज की जगह फलों का ही सेवन करें. इस पावन पवित्र मौके पर भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से मन शांत रहता है. 

महाशिवरात्रि के मौके पर भगवान शिव को तुलसी के पत्ते अर्पित करना वर्जित माना जाता है.

इसके अलावा भगवान शिव को तिल अर्पित करने से भी बचें, क्योंकि तिल भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ है. 

महाशिवरात्रि के दौरान भगवान शिव को भूलकर भी टूटे हुए चावल नहीं चढ़ाने चाहिए. 

इसके अलावा महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को नारियल का पानी भी नहीं चढ़ाना चाहिए. 

महाशिवरात्रि पर शिवजी को बिल्वपत्र चढ़ाने का विशेष महत्व होता है. ऐसे में बिल्व पत्र के तीनों पत्ते पूरे होने चाहिए, खंडित पत्र कभी भी न अर्पित करें.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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