LPG News: बचाकर चलो गैस, होर्मुज से 90% एलपीजी सप्लाई पर मंडराया खतरा, कंपनियों ने झेला 700 रुपए का नुकसान
LPG News: पिछली बार यानी फरवरी में जब यूएस और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुआ था, तब तेल और गैस की किल्लत से भारत भी परेशान था. जब दोनों देशों के बीच युद्धविराम लगा तो जनता ने और सरकार ने थोड़ी राहत की सांस ली थी. लेकिन अब जब एक बार फिर दोनों देशों के बीच ये युद्ध शुरू हो गया है तो एक बार फिर स्थिति जस की तस हो गई है. ऐसे हालातों में रसोई गैस को सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा है, आइये जानते हैं क्यों? LPG को लेकर स्थिति हुई गंभीरदरअसर भारत अपनी जरूरत की LPG का अधिकतम हिस्सा बाहर से आयात करता है, जिसमें से भी 90 प्रतिशत LPG स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होते हुए भारत आती है. ऐसे में सबसे बड़ा खतरा गैस की किल्लतों को लेकर ही है. मार्च, अप्रैल और मई के महीने में भारत ने गैस की खूब किल्लत देखी, लोगों को एक- एक महीना सिलेंडर के लिए इंतजार करना पड़ा, तो वहीं लंबी लाइनों में भी लगना पड़ा. ऐसे अगर युद्ध के कारण दोबारा समुद्री रास्ता बाधित हुआ तो घरेलू गैस सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इतना ही नहीं कीमतों में भी इजाफा हो सकता है. ये भी पढ़ें: Petrol-Diesel Price: होर्मुज संकट से टेंशन में सरकार, पेट्रोल-डीजल होगा महंगा या टैक्स घटाएगी सरकार? सरकारी तेल कंपनियों ने उठाया नुकसानजैसे पेट्रोल डीजल की कीमतें ना बढ़ा पाने के कारण तेल कंपनियों ने नुकसान झेला है, वैसे ही गैस की वजह से भी तेल कंपनियों ने काफी नुकसान झेला है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार जून 2026 तक सरकारी तेल कंपनियां हर घरेलू LPG सिलेंडर पर 500 से 700 रुपये तक का नुकसान उठा रही थीं. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें फिर बढ़ती हैं तो सरकार के सामने दो ही ऑप्शन होंगे या तो सब्सिडी बढ़ाई जाए या फिर सिलेंडर महंगा किया जाए. रणनीतिक भंडार की है जरूरतदेश को इस संकट की स्थिति से बचने के लिए रणनीति बनाकर चलने की जरूरत है. केवल रोजाना तेल खरीदाकर इस्तेमाल करने से बेहतर होगा कि देश में इसका भंडार रखा जाए. फिलहाल भारत के पास 5.33 मिलियन मीट्रिक टन का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व है, जो सिर्फ 9.5 दिन की जरूरत पूरी कर सकता है. जबकि IEA करीब 90 दिन का रणनीतिक भंडार रखने की सलाह देता है. ये भी पढ़ें: Wealth: दौलत की क्या परिभाषा है, ये क्या होती है, कैसे बताएं कि राम के पास दौलत है और श्याम के पास नहीं?
LPG News: पिछली बार यानी फरवरी में जब यूएस और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुआ था, तब तेल और गैस की किल्लत से भारत भी परेशान था. जब दोनों देशों के बीच युद्धविराम लगा तो जनता ने और सरकार ने थोड़ी राहत की सांस ली थी. लेकिन अब जब एक बार फिर दोनों देशों के बीच ये युद्ध शुरू हो गया है तो एक बार फिर स्थिति जस की तस हो गई है. ऐसे हालातों में रसोई गैस को सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा है, आइये जानते हैं क्यों?
LPG को लेकर स्थिति हुई गंभीर
दरअसर भारत अपनी जरूरत की LPG का अधिकतम हिस्सा बाहर से आयात करता है, जिसमें से भी 90 प्रतिशत LPG स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होते हुए भारत आती है. ऐसे में सबसे बड़ा खतरा गैस की किल्लतों को लेकर ही है. मार्च, अप्रैल और मई के महीने में भारत ने गैस की खूब किल्लत देखी, लोगों को एक- एक महीना सिलेंडर के लिए इंतजार करना पड़ा, तो वहीं लंबी लाइनों में भी लगना पड़ा. ऐसे अगर युद्ध के कारण दोबारा समुद्री रास्ता बाधित हुआ तो घरेलू गैस सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इतना ही नहीं कीमतों में भी इजाफा हो सकता है.
ये भी पढ़ें: Petrol-Diesel Price: होर्मुज संकट से टेंशन में सरकार, पेट्रोल-डीजल होगा महंगा या टैक्स घटाएगी सरकार?
सरकारी तेल कंपनियों ने उठाया नुकसान
जैसे पेट्रोल डीजल की कीमतें ना बढ़ा पाने के कारण तेल कंपनियों ने नुकसान झेला है, वैसे ही गैस की वजह से भी तेल कंपनियों ने काफी नुकसान झेला है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार जून 2026 तक सरकारी तेल कंपनियां हर घरेलू LPG सिलेंडर पर 500 से 700 रुपये तक का नुकसान उठा रही थीं. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें फिर बढ़ती हैं तो सरकार के सामने दो ही ऑप्शन होंगे या तो सब्सिडी बढ़ाई जाए या फिर सिलेंडर महंगा किया जाए.
रणनीतिक भंडार की है जरूरत
देश को इस संकट की स्थिति से बचने के लिए रणनीति बनाकर चलने की जरूरत है. केवल रोजाना तेल खरीदाकर इस्तेमाल करने से बेहतर होगा कि देश में इसका भंडार रखा जाए. फिलहाल भारत के पास 5.33 मिलियन मीट्रिक टन का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व है, जो सिर्फ 9.5 दिन की जरूरत पूरी कर सकता है. जबकि IEA करीब 90 दिन का रणनीतिक भंडार रखने की सलाह देता है.
ये भी पढ़ें: Wealth: दौलत की क्या परिभाषा है, ये क्या होती है, कैसे बताएं कि राम के पास दौलत है और श्याम के पास नहीं?
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