Lean Fatty Liver Disease: बाहर से फिट, अंदर से अनफिट? दुबले लोगों में तेजी से बढ़ रहा 'साइलेंट' फैटी लिवर, एक्सपर्ट से जानें कारण
Can Thin People Get Fatty Liver: अक्सर लोग मानते हैं कि अगर पेट सपाट है और वजन सामान्य है, तो शरीर पूरी तरह स्वस्थ है. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि कई बार सामान्य दिखने वाले शरीर के भीतर एक खामोश समस्या पनप रही होती है वह है फैटी लिवर. यह तब होता है जब लिवर की सेल्स में जरूरत से ज्यादा फैट जमा हो जाती है. खास बात यह है कि यह समस्या सिर्फ मोटे लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि पतले दिखने वाले लोगों में भी तेजी से बढ़ रही है. इसे लीन फैटी लिवर या लीन NAFLD यानी नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज कहा जाता है. कब माना जाता है कि फैटी लिवर की दिक्कत है? फैटी लिवर तब माना जाता है जब लिवर की सेल्स में 5 प्रतिशत से ज्यादा फैट जमा हो जाए. इससे लिवर के जरूरी काम प्रभावित होने लगते हैं, जैसे शरीर से विषैले पदार्थों को फिल्टर करना और शुगर व फैट के स्तर को संतुलित रखना. शुरुआत में यह बीमारी कोई खास दर्द या लक्षण नहीं देती, इसलिए अक्सर लोगों को इसका पता सामान्य ब्लड टेस्ट या अल्ट्रासाउंड के दौरान ही चलता है. पतले लोगों को क्यों होती है दिक्कत? कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि अगर कोई पतला है तो उसके लिवर में फैट कैसे जमा हो सकता है. US National Institutes of Health की एक स्टडी के अनुसार, सिर्फ वजन से लिवर की सेहत तय नहीं होती. कई बार शरीर के अंदर, खासकर अंगों के आसपास जमा होने वाला विसरल फैट ज्यादा नुकसान करता है. व्यक्ति बाहर से पतला दिख सकता है, लेकिन अंदरूनी फैट लिवर को प्रभावित कर सकता है. एक्सपर्ट बताते हैं कि खराब खान-पान, लंबे समय तक बैठे रहना, तनाव और जेनेटिक कारण भी इस जोखिम को बढ़ा देते हैं. इसे भी पढ़ें - 20s में भी कपल्स में क्यों हो रही फर्टिलिटी की प्रॉब्लम, एक्सपर्ट्स से जानें लाइफस्टाइल भी जिम्मेदार आजकल कई लोग कम खाना तो खाते हैं, लेकिन सही खाना नहीं खाते. पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे पेय, सफेद ब्रेड, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और ज्यादा चीनी वाली चीजें धीरे-धीरे लिवर पर दबाव डालती हैं. अतिरिक्त शुगर को लिवर फैट में बदल देता है और यही फैट समय के साथ जमा होता जाता है. दक्षिण एशियाई लोगों, खासकर भारतीयों में यह खतरा और ज्यादा देखा गया है. रिसर्च बताते हैं कि भारतीयों के शरीर में फैट अक्सर पेट और लिवर के आसपास जमा होती है. इसके अलावा खराब गट हेल्थ भी लिवर में सूजन और फैट बढ़ाने का कारण बन सकती है. कैसे इसको ठीक किया जा सकता है? अच्छी बात यह है कि शुरुआती चरण में फैटी लिवर को सुधारा जा सकता है. संतुलित आहार, रेगुलर एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद और तनाव कंट्रोल से लिवर धीरे-धीरे ठीक होने लगता है. एक्सपर्ट के अनुसार भोजन के बाद थोड़ी देर टहलना भी लिवर के लिए फायदेमंद होता है. इसलिए सिर्फ शरीर के आकार से स्वास्थ्य का अंदाजा लगाना सही नहीं है. रेगुलर हेल्थ चेक-अप, ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड जैसे परीक्षण फैटी लिवर की समय रहते पहचान करने में मदद करते हैं. इसे भी पढ़ें- पीरियड्स पेन का पैटर्न: पहले दिन ज्यादा, बाद में कम क्या है वजह? डॉक्टर ने बताया असली कारण Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
Can Thin People Get Fatty Liver: अक्सर लोग मानते हैं कि अगर पेट सपाट है और वजन सामान्य है, तो शरीर पूरी तरह स्वस्थ है. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि कई बार सामान्य दिखने वाले शरीर के भीतर एक खामोश समस्या पनप रही होती है वह है फैटी लिवर. यह तब होता है जब लिवर की सेल्स में जरूरत से ज्यादा फैट जमा हो जाती है. खास बात यह है कि यह समस्या सिर्फ मोटे लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि पतले दिखने वाले लोगों में भी तेजी से बढ़ रही है. इसे लीन फैटी लिवर या लीन NAFLD यानी नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज कहा जाता है.
कब माना जाता है कि फैटी लिवर की दिक्कत है?
फैटी लिवर तब माना जाता है जब लिवर की सेल्स में 5 प्रतिशत से ज्यादा फैट जमा हो जाए. इससे लिवर के जरूरी काम प्रभावित होने लगते हैं, जैसे शरीर से विषैले पदार्थों को फिल्टर करना और शुगर व फैट के स्तर को संतुलित रखना. शुरुआत में यह बीमारी कोई खास दर्द या लक्षण नहीं देती, इसलिए अक्सर लोगों को इसका पता सामान्य ब्लड टेस्ट या अल्ट्रासाउंड के दौरान ही चलता है.
पतले लोगों को क्यों होती है दिक्कत?
कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि अगर कोई पतला है तो उसके लिवर में फैट कैसे जमा हो सकता है. US National Institutes of Health की एक स्टडी के अनुसार, सिर्फ वजन से लिवर की सेहत तय नहीं होती. कई बार शरीर के अंदर, खासकर अंगों के आसपास जमा होने वाला विसरल फैट ज्यादा नुकसान करता है. व्यक्ति बाहर से पतला दिख सकता है, लेकिन अंदरूनी फैट लिवर को प्रभावित कर सकता है. एक्सपर्ट बताते हैं कि खराब खान-पान, लंबे समय तक बैठे रहना, तनाव और जेनेटिक कारण भी इस जोखिम को बढ़ा देते हैं.
इसे भी पढ़ें - 20s में भी कपल्स में क्यों हो रही फर्टिलिटी की प्रॉब्लम, एक्सपर्ट्स से जानें
लाइफस्टाइल भी जिम्मेदार
आजकल कई लोग कम खाना तो खाते हैं, लेकिन सही खाना नहीं खाते. पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे पेय, सफेद ब्रेड, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और ज्यादा चीनी वाली चीजें धीरे-धीरे लिवर पर दबाव डालती हैं. अतिरिक्त शुगर को लिवर फैट में बदल देता है और यही फैट समय के साथ जमा होता जाता है. दक्षिण एशियाई लोगों, खासकर भारतीयों में यह खतरा और ज्यादा देखा गया है. रिसर्च बताते हैं कि भारतीयों के शरीर में फैट अक्सर पेट और लिवर के आसपास जमा होती है. इसके अलावा खराब गट हेल्थ भी लिवर में सूजन और फैट बढ़ाने का कारण बन सकती है.
कैसे इसको ठीक किया जा सकता है?
अच्छी बात यह है कि शुरुआती चरण में फैटी लिवर को सुधारा जा सकता है. संतुलित आहार, रेगुलर एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद और तनाव कंट्रोल से लिवर धीरे-धीरे ठीक होने लगता है. एक्सपर्ट के अनुसार भोजन के बाद थोड़ी देर टहलना भी लिवर के लिए फायदेमंद होता है. इसलिए सिर्फ शरीर के आकार से स्वास्थ्य का अंदाजा लगाना सही नहीं है. रेगुलर हेल्थ चेक-अप, ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड जैसे परीक्षण फैटी लिवर की समय रहते पहचान करने में मदद करते हैं.
इसे भी पढ़ें- पीरियड्स पेन का पैटर्न: पहले दिन ज्यादा, बाद में कम क्या है वजह? डॉक्टर ने बताया असली कारण
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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