Government School Report : देश के इन राज्यों में सबसे खस्ता है सरकारी स्कूलों का हाल, वहां जाकर पढ़ना ही नहीं चाहते बच्चे
Government School Report : सरकारी स्कूल पहले लाखों परिवारों की पहली पसंद हुआ करते थे, लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है. शिक्षा मंत्रालय की नई रिपोर्ट बताती है कि बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों का एडमिशन सरकारी स्कूलों की जगह प्राइवेट स्कूलों में करा रहे हैं. पिछले दो सालों में सरकारी स्कूलों से लाखों बच्चों का नाम कट गया, जबकि प्राइवेट स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार बढ़ी है. यह बदलाव सिर्फ किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई बड़े राज्यों में देखने को मिला है. तो आइए जानते हैं कि देश के किन राज्यों में सरकारी स्कूलों का हाल सबसे खस्ता है. क्या है शिक्षा मंत्रालय की नई रिपोर्ट? यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस शिक्षा मंत्रालय का आधिकारिक डिजिटल डेटाबेस है. इसके जरिए देशभर के स्कूलों में छात्रों के एडमिशन, शिक्षकों की संख्या, स्कूलों की संख्या और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े आंकड़े जुटाए जाते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025-26 में देशभर के प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर तक के स्कूलों में कुल 24.72 करोड़ छात्रों का एडमिशन दर्ज किया गया. वहीं, 2023-24 में यह संख्या करीब 24.80 करोड़ थी. कुल एडमिशन में ज्यादा अंतर नहीं आया, लेकिन सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के आंकड़ों में बड़ा बदलाव देखने को मिला. सरकारी स्कूलों में 86 लाख छात्रों की कमी रिपोर्ट के मुताबिक, 2023-24 में सरकारी स्कूलों में 12.75 करोड़ छात्र पढ़ रहे थे. साल 2025-26 में यह संख्या घटकर 11.89 करोड़ रह गई. दो साल में करीब 86 लाख छात्रों की कमी दर्ज की गई. इसके साथ ही प्राइवेट स्कूलों में छात्रों की संख्या 9 करोड़ से बढ़कर 9.89 करोड़ हो गई. लगभग 88 लाख नए छात्रों ने प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन लिया. देश के किन राज्यों में सरकारी स्कूलों का हाल सबसे खस्ता है 1. बिहार में सरकारी स्कूलों में सबसे ज्यादा छात्र पढ़ते हैं, लेकिन यहां भी एडमिशन में गिरावट दर्ज की गई. साल 2023-24 में यहां 1.71 करोड़ छात्र थे, जो 2025-26 में घटकर 1.66 करोड़ रह गए. 2. उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या 1.48 करोड़ से घटकर 1.41 करोड़ हो गई. यहां दो साल में 7.07 लाख छात्र कम हुए. 3. मध्य प्रदेश में छात्रों की संख्या 81.28 लाख से घटकर 79.70 लाख रह गई. 4. राजस्थान में सरकारी स्कूलों में एडमिशन 77.82 लाख से घटकर 74.49 लाख हो गया. यहां करीब 3.32 लाख छात्र कम हुए. यह भी पढ़ें - Salary Word Origin: कभी पैसों की जगह सैलरी में मिलता था 'नमक'! जानिए कैसे पड़ा आपकी तनख्वाह का नाम 'सैलरी'? 5.महाराष्ट्र में भी सरकारी स्कूलों में एडमिशन में गिरावट आई. यहां छात्रों की संख्या 51.08 लाख से घटकर करीब 49.79 लाख रह गई. 6. पश्चिम बंगाल ऐसा राज्य रहा, जहां सरकारी स्कूलों में एडमिशन बढ़े. यहां छात्रों की संख्या 1.49 करोड़ से बढ़कर 1.54 करोड़ हो गई. यहां करीब 4.61 लाख नए छात्र सरकारी स्कूलों में जुड़े. सरकारी और प्राइवेट स्कूलों की संख्या में क्या बदलाव आया? साल 2025-26 में देशभर में सरकारी स्कूलों की संख्या घटकर 10,05,245 रह गई, जबकि 2023-24 में यह 10,13,322 थी. वहीं प्राइवेट स्कूलों की संख्या बढ़ी है. साल 2023-24 में देश में करीब 3.39 लाख प्राइवेट स्कूल थे, जो 2025-26 में बढ़कर 3.40 लाख से ज्यादा हो गए. उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में प्राइवेट स्कूलों की संख्या बढ़ी है, जबकि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में इनमें कुछ कमी दर्ज की गई. यह भी पढ़ें - इंडोनेशिया और मोनाको के एक जैसे क्यों हैं झंडे, क्या है दोनों देशों के बीच विवाद की जड़?
Government School Report : सरकारी स्कूल पहले लाखों परिवारों की पहली पसंद हुआ करते थे, लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है. शिक्षा मंत्रालय की नई रिपोर्ट बताती है कि बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों का एडमिशन सरकारी स्कूलों की जगह प्राइवेट स्कूलों में करा रहे हैं. पिछले दो सालों में सरकारी स्कूलों से लाखों बच्चों का नाम कट गया, जबकि प्राइवेट स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार बढ़ी है. यह बदलाव सिर्फ किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई बड़े राज्यों में देखने को मिला है. तो आइए जानते हैं कि देश के किन राज्यों में सरकारी स्कूलों का हाल सबसे खस्ता है.
क्या है शिक्षा मंत्रालय की नई रिपोर्ट?
यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस शिक्षा मंत्रालय का आधिकारिक डिजिटल डेटाबेस है. इसके जरिए देशभर के स्कूलों में छात्रों के एडमिशन, शिक्षकों की संख्या, स्कूलों की संख्या और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े आंकड़े जुटाए जाते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025-26 में देशभर के प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर तक के स्कूलों में कुल 24.72 करोड़ छात्रों का एडमिशन दर्ज किया गया. वहीं, 2023-24 में यह संख्या करीब 24.80 करोड़ थी. कुल एडमिशन में ज्यादा अंतर नहीं आया, लेकिन सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के आंकड़ों में बड़ा बदलाव देखने को मिला.
सरकारी स्कूलों में 86 लाख छात्रों की कमी
रिपोर्ट के मुताबिक, 2023-24 में सरकारी स्कूलों में 12.75 करोड़ छात्र पढ़ रहे थे. साल 2025-26 में यह संख्या घटकर 11.89 करोड़ रह गई. दो साल में करीब 86 लाख छात्रों की कमी दर्ज की गई. इसके साथ ही प्राइवेट स्कूलों में छात्रों की संख्या 9 करोड़ से बढ़कर 9.89 करोड़ हो गई. लगभग 88 लाख नए छात्रों ने प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन लिया.
देश के किन राज्यों में सरकारी स्कूलों का हाल सबसे खस्ता है
1. बिहार में सरकारी स्कूलों में सबसे ज्यादा छात्र पढ़ते हैं, लेकिन यहां भी एडमिशन में गिरावट दर्ज की गई. साल 2023-24 में यहां 1.71 करोड़ छात्र थे, जो 2025-26 में घटकर 1.66 करोड़ रह गए.
2. उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या 1.48 करोड़ से घटकर 1.41 करोड़ हो गई. यहां दो साल में 7.07 लाख छात्र कम हुए.
3. मध्य प्रदेश में छात्रों की संख्या 81.28 लाख से घटकर 79.70 लाख रह गई.
4. राजस्थान में सरकारी स्कूलों में एडमिशन 77.82 लाख से घटकर 74.49 लाख हो गया. यहां करीब 3.32 लाख छात्र कम हुए.
यह भी पढ़ें - Salary Word Origin: कभी पैसों की जगह सैलरी में मिलता था 'नमक'! जानिए कैसे पड़ा आपकी तनख्वाह का नाम 'सैलरी'?
5.महाराष्ट्र में भी सरकारी स्कूलों में एडमिशन में गिरावट आई. यहां छात्रों की संख्या 51.08 लाख से घटकर करीब 49.79 लाख रह गई.
6. पश्चिम बंगाल ऐसा राज्य रहा, जहां सरकारी स्कूलों में एडमिशन बढ़े. यहां छात्रों की संख्या 1.49 करोड़ से बढ़कर 1.54 करोड़ हो गई. यहां करीब 4.61 लाख नए छात्र सरकारी स्कूलों में जुड़े.
सरकारी और प्राइवेट स्कूलों की संख्या में क्या बदलाव आया?
साल 2025-26 में देशभर में सरकारी स्कूलों की संख्या घटकर 10,05,245 रह गई, जबकि 2023-24 में यह 10,13,322 थी. वहीं प्राइवेट स्कूलों की संख्या बढ़ी है. साल 2023-24 में देश में करीब 3.39 लाख प्राइवेट स्कूल थे, जो 2025-26 में बढ़कर 3.40 लाख से ज्यादा हो गए. उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में प्राइवेट स्कूलों की संख्या बढ़ी है, जबकि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में इनमें कुछ कमी दर्ज की गई.
यह भी पढ़ें - इंडोनेशिया और मोनाको के एक जैसे क्यों हैं झंडे, क्या है दोनों देशों के बीच विवाद की जड़?
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