Falta By-Election: बंगाल की जिस सीट पर 'पुष्पा' ने छोड़ा मैदान, वहां किसने दी बीजेपी कैंडिडेट को टक्कर, हैरान कर देगा नाम!

पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी ने शानदार जीत दर्ज की है. यहां तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी जहांगीर खान ने मैदान छोड़ दिया था, जिसके बाद ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस कैंडिडेट अब्दुर रज्जाक बीजेपी को चुनौती देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. यहां कांग्रेस तीसरे नंबर पर पहुंच गई, जबकि सीपीआईएम के उम्मीदवार शंभूनाथ कुर्मी ने बीजेपी को कड़ी चुनौती दी. बीजेपी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा को 1 लाख 49 हजार 666 वोट मिले और उन्होंने 71 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल किए. वहीं, सीपीआईएम के शंभूनाथ कुर्मी 40 हजार 645 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जो कुल मतों का लगभग 20 प्रतिशत है, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार अब्दुर रज्जाक तीसरे स्थान पर रहे. टीएमसी के उम्मीदवार जहांगीर खान सिर्फ 7,783 वोटों के साथ चौथे स्थान पर खिसक गए और उनकी जमानत जब्त हो गई. ये भी पढ़ें- फाल्टा उपचुनाव: BJP की प्रचंड जीत पर PM मोदी का पहला रिएक्शन, TMC की हार पर बोले - 'ये धमकियों की...' डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र में आती है फाल्टा सीट फाल्टा सीट डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र में आती है, जहां से टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी सांसद हैं. फाल्टा ने दो साल पहले हुए लोकसभा चुनाव में टीएमसी को करीब 89 फीसदी वोट दिए थे और बनर्जी को लगभग 1.68 लाख वोटों से जीत मिली थी. बीजेपी को 2021 के विधानसभा चुनाव में फाल्टा में 36.75 प्रतिशत वोट मिले थे, जो इस बार बढ़कर 71 फीसदी से अधिक हो गए. वहीं, टीएमसी की करीब 56 प्रतिशत वोट मिले थे, जो घटकर सिर्फ 3.7 फीसदी रह गए. ये भी पढ़ें- फाल्टा में एक लाख वोट से जीती BJP तो ममता को लगा झटका, वीडियो शेयर कर जानें क्या कहा?  टीएमसी की टेंशन क्यों बढ़ी? बंगाल में हार के बाद टीएमसी अपना संगठन फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रही है, लेकिन फाल्टा में उसके सिंबल पर सिर्फ 7,783 वोट मिलने से उसकी टेंशन भी बढ़ गई है. दरअसल टीएमसी को बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज वोट करता है, उसके अलावा हिंदू समाज का खास वर्ग भी ममता बनर्जी को पसंद करता है और उसका परंपरागत वोटर भी है. इनके साथ ही महिलाएं और सरकारी योजनाओं के लाभार्थी भी टीएमसी को वोट करता आया है, लेकिन फाल्टा के नतीजों ने बता दिया है कि टीएमसी को दोबारा अपनी स्थिति में आने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी. 

May 25, 2026 - 11:30
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Falta By-Election: बंगाल की जिस सीट पर 'पुष्पा' ने छोड़ा मैदान, वहां किसने दी बीजेपी कैंडिडेट को टक्कर, हैरान कर देगा नाम!

पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी ने शानदार जीत दर्ज की है. यहां तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी जहांगीर खान ने मैदान छोड़ दिया था, जिसके बाद ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस कैंडिडेट अब्दुर रज्जाक बीजेपी को चुनौती देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. यहां कांग्रेस तीसरे नंबर पर पहुंच गई, जबकि सीपीआईएम के उम्मीदवार शंभूनाथ कुर्मी ने बीजेपी को कड़ी चुनौती दी.

बीजेपी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा को 1 लाख 49 हजार 666 वोट मिले और उन्होंने 71 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल किए. वहीं, सीपीआईएम के शंभूनाथ कुर्मी 40 हजार 645 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जो कुल मतों का लगभग 20 प्रतिशत है, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार अब्दुर रज्जाक तीसरे स्थान पर रहे. टीएमसी के उम्मीदवार जहांगीर खान सिर्फ 7,783 वोटों के साथ चौथे स्थान पर खिसक गए और उनकी जमानत जब्त हो गई.

ये भी पढ़ें- फाल्टा उपचुनाव: BJP की प्रचंड जीत पर PM मोदी का पहला रिएक्शन, TMC की हार पर बोले - 'ये धमकियों की...'

डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र में आती है फाल्टा सीट

फाल्टा सीट डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र में आती है, जहां से टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी सांसद हैं. फाल्टा ने दो साल पहले हुए लोकसभा चुनाव में टीएमसी को करीब 89 फीसदी वोट दिए थे और बनर्जी को लगभग 1.68 लाख वोटों से जीत मिली थी. बीजेपी को 2021 के विधानसभा चुनाव में फाल्टा में 36.75 प्रतिशत वोट मिले थे, जो इस बार बढ़कर 71 फीसदी से अधिक हो गए. वहीं, टीएमसी की करीब 56 प्रतिशत वोट मिले थे, जो घटकर सिर्फ 3.7 फीसदी रह गए.

ये भी पढ़ें- फाल्टा में एक लाख वोट से जीती BJP तो ममता को लगा झटका, वीडियो शेयर कर जानें क्या कहा? 

टीएमसी की टेंशन क्यों बढ़ी?

बंगाल में हार के बाद टीएमसी अपना संगठन फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रही है, लेकिन फाल्टा में उसके सिंबल पर सिर्फ 7,783 वोट मिलने से उसकी टेंशन भी बढ़ गई है. दरअसल टीएमसी को बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज वोट करता है, उसके अलावा हिंदू समाज का खास वर्ग भी ममता बनर्जी को पसंद करता है और उसका परंपरागत वोटर भी है. इनके साथ ही महिलाएं और सरकारी योजनाओं के लाभार्थी भी टीएमसी को वोट करता आया है, लेकिन फाल्टा के नतीजों ने बता दिया है कि टीएमसी को दोबारा अपनी स्थिति में आने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी. 

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