Ethanol News: इथेनॉल वाले पेट्रोल से घट रहा है गाड़ियों का माइलेज? सर्वे में 10 में से 5 लोगों ने दिया ये जवाब

Ethanol Fuel Impact Report: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर कई देशों पर देखने को मिल रहा है. अगर बात करें भारत की तो यहां पेट्रोल-डीजल की सप्लाई और कीमतों पर इसका असर पड़ा है. हाल के दिनों में पेट्रोल-डीजल के दामों में कई बार बढ़ोतरी देखने को मिली है. ऐसे में भारत सरकार  इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल यानी E20 पेट्रोल को तेजी से बढ़ावा दे रही है. सरकार का मानना है कि इससे कच्चे तेल के आयात को कम करने, विदेशी मुद्रा बचाने और किसानों को फायदा पहुंचाने में मदद मिलेगी, लेकिन अब कई वाहन मालिकों, खासकर पुरानी पेट्रोल कार और बाइक चलाने वालों की चिंताएं भी बढ़ने लगी हैं.  सर्वे में क्या सामने आया? अगर बात करें सर्वे की तो हाल ही में LocalCircles के एक सर्वे में सामने आया है कि 2022 या उससे पहले खरीदे गए पेट्रोल वाहनों के करीब 10 में से 5 मालिकों का कहना है कि E20 पेट्रोल आने के बाद उनकी गाड़ी का माइलेड कम हो गया है. इस सर्वे में 24 हजार से ज्यादा वाहन मालिकों की राय शामिल की गई. सर्वे के मुताबिक, जिन लोगों ने माइलेज घटने की शिकायत की, उनमें लगभग 25 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनकी गाड़ी का माइलेज 20 प्रतिशत से ज्यादा तक कम हो गया. वहीं, 7 प्रतिशत लोगों ने 15 से 20 प्रतिशत तक और 13 प्रतिशत लोगों ने 10 से 15 प्रतिशत तक माइलेज घटने की बात कही.  अब पेट्रोल पंप पर खुद चुन सकेंगे गाड़ी के हिसाब से इथेनॉल ब्लेंड, नया नियम तैयार- रिपोर्ट सरकारी दावों और लोगों के अनुभव में फर्क बता दें कि यह आंकड़े इसलिए भी चर्चा में हैं, क्योंकि पहले सरकार की तरफ से कहा गया था कि E20 पेट्रोल से माइलेज पर बहुत कम असर पड़ेगा. अनुमान लगाया गया था कि माइलेज में केवल 1 से 6 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है, लेकिन अब कई यूजर्स का कहना है कि असल जिंदगी में उन्हें ज्यादा फर्क महसूस हो रहा है. ऐसे में यह मुद्दा लगातार चर्चा का विषय बनता जा रहा है. पुरानी गाड़ियों पर ज्यादा असर क्यों? दरअसल, 2023 से पहले खरीदे गए कई पेट्रोल गाड़ी E5 या E10 जैसे कम इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के हिसाब से बनाए गए थे. ऐसे में E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर पुराने इंजन पर ज्यादा असर देखने को मिल सकता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी सामान्य पेट्रोल से कम होती है. इसका साफ मतलब यह है कि समान दूरी तय करने के लिए वाहन को ज्यादा ईंधन की जरूरत पड़ सकती है. इसके अलावा लंबे टाइम तक उपयोग करने पर इथेनॉल पुराने गाड़ियों के रबर और प्लास्टिक पार्ट्स को भी नुकसान पहुंचा सकता है. मरम्मत खर्च बढ़ने की भी शिकायत इसके साथ ही सर्वे में केवल माइलेज ही नहीं बल्कि गाड़ी खराब होने की शिकायतें भी सामने आई हैं. लगभग 29 प्रतिशत लोगों ने कहा कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद उन्हें इंजन, फ्यूल लाइन, कार्बेरेटर या फिर अन्य हिस्सों से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. हालांकि, ये दावे गाड़ी मालिकों के अनुभवों पर आधारित हैं. यह कोई वैज्ञानिक या सरकारी रिसर्च नहीं है. फिर भी इससे लोगों के बीच E20 पेट्रोल को लेकर चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है. कम हुआ सोने का भाव, 24 से लेकर 22 कैरेट के रेट में आई गिरावट; चांदी भी सस्ती सरकार क्यों दे रही E20 को बढ़ावा? भारत अपनी जरूरत का लगभग 87 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. ऐसे में सरकार इथेनॉल मिश्रण को लंबे टाइम की रणनीति के तौर पर देख रही है. इससे तेल आयात कम करने, विदेशी मुद्रा बचाने और गन्ना व मक्का किसानों को फायदा देने की कोशिश की जा रही है. सरकार ने E20 लक्ष्य तय टाइम से पहले हासिल कर लिया है और अब फ्यूचर में E22,E25,E30 और कुछ मामलों में E85 जैसे ज्यादा इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर भी काम किया जा रहा है. यूजर्स की सबसे बड़ी चिंता गाड़ी मालिकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर माइलेज कम होगा तो हर महीने पेट्रोल पर खर्च बढ़ जाएगा. इसके साथ अगर गाड़ी की मरम्मत का खर्च भी बढ़ता है तो पुरानी पेट्रोल गाड़ियां चलाना पहले के मुकाबले महंगा पड़ सकता है. हालांकि, सरकार इथेनॉल मिश्रण को देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक मजबूती के लिए जरूरी मान रही है. वहीं दूसरी तरफ, यूजर अब यह जानना चाहते हैं कि फ्यूचर में बढ़ते इथेनॉल के साथ उनके पुराने गाड़ी कितना बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे.

May 29, 2026 - 16:30
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Ethanol News: इथेनॉल वाले पेट्रोल से घट रहा है गाड़ियों का माइलेज? सर्वे में 10 में से 5 लोगों ने दिया ये जवाब

Ethanol Fuel Impact Report: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर कई देशों पर देखने को मिल रहा है. अगर बात करें भारत की तो यहां पेट्रोल-डीजल की सप्लाई और कीमतों पर इसका असर पड़ा है. हाल के दिनों में पेट्रोल-डीजल के दामों में कई बार बढ़ोतरी देखने को मिली है. ऐसे में भारत सरकार  इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल यानी E20 पेट्रोल को तेजी से बढ़ावा दे रही है. सरकार का मानना है कि इससे कच्चे तेल के आयात को कम करने, विदेशी मुद्रा बचाने और किसानों को फायदा पहुंचाने में मदद मिलेगी, लेकिन अब कई वाहन मालिकों, खासकर पुरानी पेट्रोल कार और बाइक चलाने वालों की चिंताएं भी बढ़ने लगी हैं. 

सर्वे में क्या सामने आया?

अगर बात करें सर्वे की तो हाल ही में LocalCircles के एक सर्वे में सामने आया है कि 2022 या उससे पहले खरीदे गए पेट्रोल वाहनों के करीब 10 में से 5 मालिकों का कहना है कि E20 पेट्रोल आने के बाद उनकी गाड़ी का माइलेड कम हो गया है. इस सर्वे में 24 हजार से ज्यादा वाहन मालिकों की राय शामिल की गई. सर्वे के मुताबिक, जिन लोगों ने माइलेज घटने की शिकायत की, उनमें लगभग 25 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनकी गाड़ी का माइलेज 20 प्रतिशत से ज्यादा तक कम हो गया. वहीं, 7 प्रतिशत लोगों ने 15 से 20 प्रतिशत तक और 13 प्रतिशत लोगों ने 10 से 15 प्रतिशत तक माइलेज घटने की बात कही. 

अब पेट्रोल पंप पर खुद चुन सकेंगे गाड़ी के हिसाब से इथेनॉल ब्लेंड, नया नियम तैयार- रिपोर्ट

सरकारी दावों और लोगों के अनुभव में फर्क

बता दें कि यह आंकड़े इसलिए भी चर्चा में हैं, क्योंकि पहले सरकार की तरफ से कहा गया था कि E20 पेट्रोल से माइलेज पर बहुत कम असर पड़ेगा. अनुमान लगाया गया था कि माइलेज में केवल 1 से 6 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है, लेकिन अब कई यूजर्स का कहना है कि असल जिंदगी में उन्हें ज्यादा फर्क महसूस हो रहा है. ऐसे में यह मुद्दा लगातार चर्चा का विषय बनता जा रहा है.

पुरानी गाड़ियों पर ज्यादा असर क्यों?

दरअसल, 2023 से पहले खरीदे गए कई पेट्रोल गाड़ी E5 या E10 जैसे कम इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के हिसाब से बनाए गए थे. ऐसे में E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर पुराने इंजन पर ज्यादा असर देखने को मिल सकता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी सामान्य पेट्रोल से कम होती है. इसका साफ मतलब यह है कि समान दूरी तय करने के लिए वाहन को ज्यादा ईंधन की जरूरत पड़ सकती है. इसके अलावा लंबे टाइम तक उपयोग करने पर इथेनॉल पुराने गाड़ियों के रबर और प्लास्टिक पार्ट्स को भी नुकसान पहुंचा सकता है.

मरम्मत खर्च बढ़ने की भी शिकायत

इसके साथ ही सर्वे में केवल माइलेज ही नहीं बल्कि गाड़ी खराब होने की शिकायतें भी सामने आई हैं. लगभग 29 प्रतिशत लोगों ने कहा कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद उन्हें इंजन, फ्यूल लाइन, कार्बेरेटर या फिर अन्य हिस्सों से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. हालांकि, ये दावे गाड़ी मालिकों के अनुभवों पर आधारित हैं. यह कोई वैज्ञानिक या सरकारी रिसर्च नहीं है. फिर भी इससे लोगों के बीच E20 पेट्रोल को लेकर चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है.

कम हुआ सोने का भाव, 24 से लेकर 22 कैरेट के रेट में आई गिरावट; चांदी भी सस्ती

सरकार क्यों दे रही E20 को बढ़ावा?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 87 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. ऐसे में सरकार इथेनॉल मिश्रण को लंबे टाइम की रणनीति के तौर पर देख रही है. इससे तेल आयात कम करने, विदेशी मुद्रा बचाने और गन्ना व मक्का किसानों को फायदा देने की कोशिश की जा रही है. सरकार ने E20 लक्ष्य तय टाइम से पहले हासिल कर लिया है और अब फ्यूचर में E22,E25,E30 और कुछ मामलों में E85 जैसे ज्यादा इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर भी काम किया जा रहा है.

यूजर्स की सबसे बड़ी चिंता

गाड़ी मालिकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर माइलेज कम होगा तो हर महीने पेट्रोल पर खर्च बढ़ जाएगा. इसके साथ अगर गाड़ी की मरम्मत का खर्च भी बढ़ता है तो पुरानी पेट्रोल गाड़ियां चलाना पहले के मुकाबले महंगा पड़ सकता है. हालांकि, सरकार इथेनॉल मिश्रण को देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक मजबूती के लिए जरूरी मान रही है. वहीं दूसरी तरफ, यूजर अब यह जानना चाहते हैं कि फ्यूचर में बढ़ते इथेनॉल के साथ उनके पुराने गाड़ी कितना बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे.

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