Cancer And Sugar: कैंसर की जगह शरीर को भूखा मार रही शुगर-फ्री डाइट, जानें एक्सट्रीम कैंसर डाइट का छिपा खतरा

Can Stopping Sugar Cure Cancer: कैंसर को लेकर सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा फैलने वाली बातों में से एक ये है कि "शुगर कैंसर को बढ़ाती है" और अगर इंसान पूरी तरह शुगर या कार्बोहाइड्रेट खाना बंद कर दे, तो ट्यूमर भूखा मर जाएगा. इसी वजह से कई फैमिली मरीज की डाइट से चावल, रोटी, फल और दूसरी कार्ब वाली चीजें हटाने लगती हैं. पहली नजर में ये बात सही लगती है, क्योंकि कैंसर सेल्स ग्लूकोज का ज्यादा इस्तेमाल करती हैं. लेकिन असली साइंस इससे कहीं ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड है.  क्या यह सच है या नहीं? सीके बिरला हॉस्पिटल, नई दिल्ली के डायरेक्टर सर्जिकल ऑन्कोलॉजी एंड रोबोटिक सर्जरी डॉ. मनदीप सिंह मल्होत्रा इस सोच को डेंजरस हाफ ट्रुथ बताते हैं. उनका कहना है कि साइंस का एक हिस्सा सही है, लेकिन लोग उससे गलत निष्कर्ष निकाल लेते हैं. कैंसर में सही न्यूट्रिशन का मतलब बॉडी को भूखा रखना नहीं, बल्कि उसे इतना मजबूत रखना है कि वह इलाज झेल सके और इम्यूनिटी बनी रहे. इसे भी पढ़ें - Heart Fights Cancer: दिल धड़क रहा है यानी कैंसर से लड़ रहा है, नई स्टडी से जागी उम्मीद क्या है शुगर और कैंसर वाली थ्योरी? असल में शुगर और कैंसर वाली थ्योरी की शुरुआत 1924 में हुई थी, जब जर्मन साइंटिस्ट ओटो वारबर्ग ने खोजा कि कैंसर सेल्स सामान्य सेल्स के मुकाबले ज्यादा तेजी से ग्लूकोज इस्तेमाल करती हैं. इसे वारबर्ग इफेक्ट कहा गया. आज भी  पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी - कंप्यूटेड टोमोग्राफी स्कैन इसी सिद्धांत पर काम करता है, क्योंकि ट्यूमर ग्लूकोज को तेजी से खींचते हैं और स्कैन में चमकने लगते हैं. यूएस नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट की रिसर्च भी बताती है कि कैंसर सेल्स एनर्जी इस्तेमाल करने का तरीका बदल देती हैं. कार्बोहाइड्रेट बंद करने से क्या है नुकसान? लेकिन सोशल मीडिया पर अक्सर एक जरूरी बात नहीं बताई जाती कि सिर्फ कैंसर सेल्स ही नहीं, बल्कि दिमाग, हार्ट, मसल्स, ब्लड सेल्स और इम्यून सिस्टम को भी ग्लूकोज की जरूरत होती है. अगर इंसान पूरी तरह कार्बोहाइड्रेट बंद कर देता है, तो बॉडी खुद ग्लूकोज बनाना शुरू कर देती है. इस प्रोसेस को ग्लूकोनियोजेनेसिस कहा जाता है. इसके लिए शरीर मसल्स और प्रोटीन तोड़ता है. यानी कैंसर को तो एनर्जी मिलती रहती है, लेकिन मरीज कमजोर होने लगता है.  इलाज के दौरान किन चीजों का रखें ध्यान? डॉक्टर ये नहीं कहते कि अनलिमिटेड शुगर खाना सही है. रिफाइंड शुगर, कोल्ड ड्रिंक्स, कैंडी, पेस्ट्री और ज्यादा प्रोसेस्ड फूड हेल्थ के लिए नुकसानदायक होते हैं. लेकिन इलाज के दौरान बॉडी को बैलेंस्ड डाइट की जरूरत होती है. एक्सपर्ट्स होल ग्रेन्स, दालें, सब्जियां, नट्स, हेल्दी फैट और प्रोटीन वाली चीजें खाने की सलाह देते हैं, ताकि बॉडी को धीरे-धीरे एनर्जी मिलती रहे और ताकत बनी रहे. इसे भी पढ़ें- Vitamin D Deficiency: क्या बिना बात रहता है बदन दर्द और खराब मूड, कहीं इस विटामिन की कमी से तो नहीं हो रहा ऐसा? Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

May 18, 2026 - 20:30
 0
Cancer And Sugar: कैंसर की जगह शरीर को भूखा मार रही शुगर-फ्री डाइट, जानें एक्सट्रीम कैंसर डाइट का छिपा खतरा

Can Stopping Sugar Cure Cancer: कैंसर को लेकर सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा फैलने वाली बातों में से एक ये है कि "शुगर कैंसर को बढ़ाती है" और अगर इंसान पूरी तरह शुगर या कार्बोहाइड्रेट खाना बंद कर दे, तो ट्यूमर भूखा मर जाएगा. इसी वजह से कई फैमिली मरीज की डाइट से चावल, रोटी, फल और दूसरी कार्ब वाली चीजें हटाने लगती हैं. पहली नजर में ये बात सही लगती है, क्योंकि कैंसर सेल्स ग्लूकोज का ज्यादा इस्तेमाल करती हैं. लेकिन असली साइंस इससे कहीं ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड है. 

क्या यह सच है या नहीं?

सीके बिरला हॉस्पिटल, नई दिल्ली के डायरेक्टर सर्जिकल ऑन्कोलॉजी एंड रोबोटिक सर्जरी डॉ. मनदीप सिंह मल्होत्रा इस सोच को डेंजरस हाफ ट्रुथ बताते हैं. उनका कहना है कि साइंस का एक हिस्सा सही है, लेकिन लोग उससे गलत निष्कर्ष निकाल लेते हैं. कैंसर में सही न्यूट्रिशन का मतलब बॉडी को भूखा रखना नहीं, बल्कि उसे इतना मजबूत रखना है कि वह इलाज झेल सके और इम्यूनिटी बनी रहे.

इसे भी पढ़ें - Heart Fights Cancer: दिल धड़क रहा है यानी कैंसर से लड़ रहा है, नई स्टडी से जागी उम्मीद

क्या है शुगर और कैंसर वाली थ्योरी?

असल में शुगर और कैंसर वाली थ्योरी की शुरुआत 1924 में हुई थी, जब जर्मन साइंटिस्ट ओटो वारबर्ग ने खोजा कि कैंसर सेल्स सामान्य सेल्स के मुकाबले ज्यादा तेजी से ग्लूकोज इस्तेमाल करती हैं. इसे वारबर्ग इफेक्ट कहा गया. आज भी  पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी - कंप्यूटेड टोमोग्राफी स्कैन इसी सिद्धांत पर काम करता है, क्योंकि ट्यूमर ग्लूकोज को तेजी से खींचते हैं और स्कैन में चमकने लगते हैं. यूएस नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट की रिसर्च भी बताती है कि कैंसर सेल्स एनर्जी इस्तेमाल करने का तरीका बदल देती हैं.

कार्बोहाइड्रेट बंद करने से क्या है नुकसान?

लेकिन सोशल मीडिया पर अक्सर एक जरूरी बात नहीं बताई जाती कि सिर्फ कैंसर सेल्स ही नहीं, बल्कि दिमाग, हार्ट, मसल्स, ब्लड सेल्स और इम्यून सिस्टम को भी ग्लूकोज की जरूरत होती है. अगर इंसान पूरी तरह कार्बोहाइड्रेट बंद कर देता है, तो बॉडी खुद ग्लूकोज बनाना शुरू कर देती है. इस प्रोसेस को ग्लूकोनियोजेनेसिस कहा जाता है. इसके लिए शरीर मसल्स और प्रोटीन तोड़ता है. यानी कैंसर को तो एनर्जी मिलती रहती है, लेकिन मरीज कमजोर होने लगता है. 

इलाज के दौरान किन चीजों का रखें ध्यान?

डॉक्टर ये नहीं कहते कि अनलिमिटेड शुगर खाना सही है. रिफाइंड शुगर, कोल्ड ड्रिंक्स, कैंडी, पेस्ट्री और ज्यादा प्रोसेस्ड फूड हेल्थ के लिए नुकसानदायक होते हैं. लेकिन इलाज के दौरान बॉडी को बैलेंस्ड डाइट की जरूरत होती है. एक्सपर्ट्स होल ग्रेन्स, दालें, सब्जियां, नट्स, हेल्दी फैट और प्रोटीन वाली चीजें खाने की सलाह देते हैं, ताकि बॉडी को धीरे-धीरे एनर्जी मिलती रहे और ताकत बनी रहे.

इसे भी पढ़ें- Vitamin D Deficiency: क्या बिना बात रहता है बदन दर्द और खराब मूड, कहीं इस विटामिन की कमी से तो नहीं हो रहा ऐसा?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow