आरक्षण एवं परिसीमन संख्या बढ़ोतरी- क्यों जरूरी ? By Shyamanand Mishra

Apr 17, 2026 - 14:21
Apr 17, 2026 - 14:28
 0
आरक्षण एवं परिसीमन संख्या बढ़ोतरी- क्यों जरूरी ? By Shyamanand Mishra

आज का आरक्षण परिभाषा है। किसी को पीछे ढकेल खुद आगे खड़ा हो जाना। जो किसी के साथ अन्याय माना जाएगा। ऐसा आरक्षण नेताओं का वोट बैंक से भला कर सकता है परंतु ऐसे आरक्षण से अयोग्य प्रतिनिधि देश का भला नहीं कर सकता है। यदि आरक्षण देना है तो उसे सुयोग्य शिक्षित बनाने में मदद करना चाहिए। ताकि ऐसे आरक्षण से सुयोग्य व्यक्ति देश का सम्मान बढ़ा सके। आज का आरक्षण जाति, धर्म, लिंग के आधार पर देकर देश को कमजोर बना रहे हैं। आज देश में सिर्फ अल्पसंख्यक की पहचान मुसलमानों तक ही सीमित हो गयी है। क्योंकि मुसलमानों में संगठन एवं वोट बैंक मौजूद है। अन्य अल्पसंख्यक बौद्ध, सिख, जैन ईसाई, पादरी आदि को कोई याद भी नहीं करता है। इसलिए आज का आरक्षण देश की जरूरत नहीं बल्कि नेताओं की मजबूरी है।

दूसरी तरफ परिसीमन के नाम पर लोकसभा एवं विधानसभा संख्या में बढ़ोतरी करके भी नेता सिर्फ अपना भला करने जा रहे है। क्योंकि देश को कोई नेता नहीं चलाता हैं। देश को प्रशासनिक पदाधिकारी ही चलाते हैं। जो अपने जीवन का अमूल्य समय देश सेवा में बिताते हैं नेता तो सिर्फ 5 साल के लिए आते - जाते रहते हैं। ऐसे मंत्री गण देश चलाने के लिए उन्ही प्रशासनिक पदाधिकारी को अपना सचिव सलाहकार बनाते हैं। क्या सदस्य संख्या बढ़ने से उनको सचिव सलाहकार की जरूरत खत्म हो जाएगी? यदि नहीं तो फिर सदस्यों की संख्या बढ़ाकर देश पर अतिरिक्त खर्च डालने की क्या जरूरत है। यदि देश के प्रतिनिधि अपना जवाब देही, प्रतिनिधि संख्या बढ़ाकर कम करना चाहते हैं। तो उन्हें अपना वेतन भत्ता भी घटाकर बढ़े प्रतिनिधि के समाहित कर देना चाहिए। ताकि अतिरिक्त खर्च देश पर नहीं पड़े।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow