9 साल बाद RBI का बड़ा एक्शन, पहले चरण में बेच दिए 50000 करोड़ के बॉन्ड
भारतीय रिजर्व बैंक इन दनों बैंकिंग सिस्टम से एक्स्ट्रा कैश या लिक्विडिटी खत्म करने के लिए ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) के तहत कुछ बॉन्ड्स बेचने का काम कर रहा है. जिसका पहला चरण आज यानी 17 सितंबर को था. अपने पहले चरण में केंद्रीय बैंक ने करीब 50000 करोड़ के सरकारी बॉन्ड बेचे हैं. इतना ही नहीं RBI ऐसा दोबारा भी कर सकता है, ताकि अगर आने वाले समय में ब्याज दर बढ़ाई जाती है, तो उसका असर बैंकों के लोन की ब्याज दरों पर जल्दी दिखाई दे. 9 साल बाद बेचे सरकारी बॉन्डRBI ने हाल ही में करीब 9 साल बाद पहली बार खुले बाजार में सरकारी बॉन्ड बेचे हैं. केंद्रीय बैंक ने एक नीलामी के जरिए 5,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड बेचकर बैंकिंग सिस्टम से इतनी ही रकम निकाल ली. इस नीलामी में निवेशकों की ओर से अच्छी मांग देखने को मिली. RBI ने वित्त वर्ष 2029 से 2032 के बीच मैच्योर होने वाले सरकारी बॉन्ड बेचे हैं. इनकी बिक्री जिस ब्याज दर (यील्ड) पर हुई, वो बाजार के अनुमान से थोड़ी ज्यादा थी. RBI अगले दो हफ्तों में 2,500-2,500 करोड़ रुपये के बॉन्ड बेचने की प्लानिंग भी कर रहा है. ये भी पढ़ें: Personal Loan: कौनसा बैंक दे रहा है सबसे सस्ता कर्ज, कितनी बनेगी EMI? क्यों निकाला जा रहा बैंकों का पैसा?बैंकिंग सिस्टम में एक्स्ट्रा नकदी यानी सरप्लस लिक्विडिटी 6 सितंबर को रिकॉर्ड 11.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी. हालांकि, इसके बाद इसमें करीब एक-तिहाई की कमी आई है और अब ये लगभग 7.4 लाख करोड़ रुपये रह गई है. ये पैसा बैंकों के पास ज्यादा नकदी होने का संकेत है. जब बैंकों के पास पर्याप्त पैसा होता है, तो उन्हें RBI से उधार लेने की जरूरत कम पड़ती है. इससे RBI की नीतिगत ब्याज दर में बदलाव का असर बैंक लोन की ब्याज दरों तक पहुंचने में समय लग सकता है. इसी वजह से RBI अतिरिक्त नकदी को धीरे-धीरे सिस्टम से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है. अक्टूबर में बढ़ सकती है ब्याज दरबाजार में इस बात की उम्मीद है कि RBI की अक्टूबर में बैठक के दौरान रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत यानी 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी हो सकती है. ऐसे में केंद्रीय बैंक चाहता है कि ब्याज दर बढ़ाने का फैसला बैंकों की लोन दरों तक प्रभावी तरीके से पहुंचे. ICICI सिकयोरिटीज प्राइमरी डीलरशिप का मानना है कि RBI बॉन्ड बिक्री के जरिए करीब 2 लाख करोड़ रुपये की नकदी सिस्टम से निकाल सकता है. इसके साथ ही अक्टूबर से ब्याज दर बढ़ाने का दौर भी शुरू हो सकता है. ये भी पढ़ें: कहां निवेश करती हैं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कितना है कर्ज?
भारतीय रिजर्व बैंक इन दनों बैंकिंग सिस्टम से एक्स्ट्रा कैश या लिक्विडिटी खत्म करने के लिए ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) के तहत कुछ बॉन्ड्स बेचने का काम कर रहा है. जिसका पहला चरण आज यानी 17 सितंबर को था. अपने पहले चरण में केंद्रीय बैंक ने करीब 50000 करोड़ के सरकारी बॉन्ड बेचे हैं. इतना ही नहीं RBI ऐसा दोबारा भी कर सकता है, ताकि अगर आने वाले समय में ब्याज दर बढ़ाई जाती है, तो उसका असर बैंकों के लोन की ब्याज दरों पर जल्दी दिखाई दे.
9 साल बाद बेचे सरकारी बॉन्ड
RBI ने हाल ही में करीब 9 साल बाद पहली बार खुले बाजार में सरकारी बॉन्ड बेचे हैं. केंद्रीय बैंक ने एक नीलामी के जरिए 5,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड बेचकर बैंकिंग सिस्टम से इतनी ही रकम निकाल ली. इस नीलामी में निवेशकों की ओर से अच्छी मांग देखने को मिली. RBI ने वित्त वर्ष 2029 से 2032 के बीच मैच्योर होने वाले सरकारी बॉन्ड बेचे हैं. इनकी बिक्री जिस ब्याज दर (यील्ड) पर हुई, वो बाजार के अनुमान से थोड़ी ज्यादा थी. RBI अगले दो हफ्तों में 2,500-2,500 करोड़ रुपये के बॉन्ड बेचने की प्लानिंग भी कर रहा है.
ये भी पढ़ें: Personal Loan: कौनसा बैंक दे रहा है सबसे सस्ता कर्ज, कितनी बनेगी EMI?
क्यों निकाला जा रहा बैंकों का पैसा?
बैंकिंग सिस्टम में एक्स्ट्रा नकदी यानी सरप्लस लिक्विडिटी 6 सितंबर को रिकॉर्ड 11.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी. हालांकि, इसके बाद इसमें करीब एक-तिहाई की कमी आई है और अब ये लगभग 7.4 लाख करोड़ रुपये रह गई है. ये पैसा बैंकों के पास ज्यादा नकदी होने का संकेत है. जब बैंकों के पास पर्याप्त पैसा होता है, तो उन्हें RBI से उधार लेने की जरूरत कम पड़ती है. इससे RBI की नीतिगत ब्याज दर में बदलाव का असर बैंक लोन की ब्याज दरों तक पहुंचने में समय लग सकता है. इसी वजह से RBI अतिरिक्त नकदी को धीरे-धीरे सिस्टम से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है.
अक्टूबर में बढ़ सकती है ब्याज दर
बाजार में इस बात की उम्मीद है कि RBI की अक्टूबर में बैठक के दौरान रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत यानी 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी हो सकती है. ऐसे में केंद्रीय बैंक चाहता है कि ब्याज दर बढ़ाने का फैसला बैंकों की लोन दरों तक प्रभावी तरीके से पहुंचे.
ICICI सिकयोरिटीज प्राइमरी डीलरशिप का मानना है कि RBI बॉन्ड बिक्री के जरिए करीब 2 लाख करोड़ रुपये की नकदी सिस्टम से निकाल सकता है. इसके साथ ही अक्टूबर से ब्याज दर बढ़ाने का दौर भी शुरू हो सकता है.
ये भी पढ़ें: कहां निवेश करती हैं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कितना है कर्ज?
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