41% भारतीयों के मानसिक तनाव की बड़ी वजह है 'फाइनेंशियल गोल्स', युवाओं पर सबसे ज्यादा दबाव- रिपोर्ट

Financial Goal: शहरों में रहने वाले कई भारतीयों के लिए पैसे से जुड़े लक्ष्य पूरे करना तनाव की बड़ी वजह बन गया है. लोग अच्छी बचत और आर्थिक सुरक्षा चाहते हैं, लेकिन इसके साथ अपनी सेहत और जीवन का संतुलन बनाए रखना भी उनके लिए चुनौती बन रहा है. मणिपालसिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस और YouGov India की इंडिया हेल्थ कोटिएंट 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, 41 फीसदी शहरी भारतीयों का मानना है कि पैसों से जुड़े लक्ष्य पूरे करने की कोशिश उन्हें तनाव और चिंता देती है. यही वजह है कि आर्थिक चिंताएं लोगों की सेहत पर असर डालने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हो गई हैं. स्टडी में आर्थिक स्थिति को सबसे कम अंक मिले, जहां शारीरिक स्वास्थ्य को 68 और सामाजिक स्वास्थ्य को 66 अंक मिले, वहीं आर्थिक स्थिति को 100 में से सिर्फ 62 अंक प्राप्त हुए. 16 शहरों के 2600 लोगों से की गई बातचीत  इंडिया हेल्थ कोटिएंट 2026 के लिए 16 शहरों के 2,600 लोगों से बातचीत की गई. इसमें लोगों की शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और सामाजिक स्थिति से जुड़े पहलुओं को समझने की कोशिश की गई. रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक दबाव सिर्फ बचत या निवेश तक सीमित नहीं है. करीब 36 फीसदी लोगों ने कहा कि हेल्दी खाना, पोषण संबंधी उत्पाद और नियमित हेल्थ चेकअप पर होने वाला खर्च उनके बजट पर अतिरिक्त बोझ डालता है. वहीं 40 फीसदी लोगों का कहना है कि तनाव और चिंता का असर उनकी शारीरिक सेहत पर पड़ रहा है. इतने ही लोगों ने यह भी माना कि परिवार और दोस्तों के साथ कम समय बिताने से उनके काम या पढ़ाई पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. रिमोट से बंद करते हैं AC और TV? बिजली बिल बढ़ेगा, समझें गणित, गर्मियों में खाली होने से बचेगी आपकी जेब युवाओं पर सबसे ज्यादा आर्थिक दबाव स्टडी में यह बात सामने आई कि कई लोग अपनी कमाई, बचत और भविष्य के खर्चों को लेकर लगातार चिंता में रहते हैं. इसका असर उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है. जब सेहत से जुड़ी जरूरतें बढ़ती हैं, तो लोगों को उस पर अतिरिक्त पैसा खर्च करना पड़ता है, जिससे आर्थिक दबाव और बढ़ जाता है. रिपोर्ट के अनुसार, युवा वर्ग इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित है. खासकर 25 से 34 साल की उम्र के लोग अपने भविष्य को सुरक्षित बनाने, घर-परिवार की जिम्मेदारियों और बढ़ते खर्चों के कारण अधिक दबाव महसूस कर रहे हैं. अध्ययन में महिलाओं ने भी आर्थिक मामलों को लेकर ज्यादा चिंता जताई. कई महिलाओं का मानना है कि भविष्य के खर्चों, बचत और वित्तीय सुरक्षा को लेकर उन्हें अधिक सतर्क रहना पड़ता है. आर्थिक रूप से मजबूत बनना बड़ी प्राथमिकता रिपोर्ट बताती है कि आज लोगों के लिए आर्थिक रूप से मजबूत बनना सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है. कई लोग अपनी शारीरिक या मानसिक सेहत से पहले अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने पर ध्यान देना चाहते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि आर्थिक सुरक्षा बेहतर जीवन की नींव है. रेल यात्रियों की बढ़ेगी मुसीबत, 6 जून तक इस रूट की दर्जनों ट्रेनें रद्द और डायवर्ट, देखें लिस्ट

Jun 4, 2026 - 02:30
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41% भारतीयों के मानसिक तनाव की बड़ी वजह है 'फाइनेंशियल गोल्स', युवाओं पर सबसे ज्यादा दबाव- रिपोर्ट

Financial Goal: शहरों में रहने वाले कई भारतीयों के लिए पैसे से जुड़े लक्ष्य पूरे करना तनाव की बड़ी वजह बन गया है. लोग अच्छी बचत और आर्थिक सुरक्षा चाहते हैं, लेकिन इसके साथ अपनी सेहत और जीवन का संतुलन बनाए रखना भी उनके लिए चुनौती बन रहा है.

मणिपालसिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस और YouGov India की इंडिया हेल्थ कोटिएंट 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, 41 फीसदी शहरी भारतीयों का मानना है कि पैसों से जुड़े लक्ष्य पूरे करने की कोशिश उन्हें तनाव और चिंता देती है. यही वजह है कि आर्थिक चिंताएं लोगों की सेहत पर असर डालने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हो गई हैं. स्टडी में आर्थिक स्थिति को सबसे कम अंक मिले, जहां शारीरिक स्वास्थ्य को 68 और सामाजिक स्वास्थ्य को 66 अंक मिले, वहीं आर्थिक स्थिति को 100 में से सिर्फ 62 अंक प्राप्त हुए.

16 शहरों के 2600 लोगों से की गई बातचीत 

इंडिया हेल्थ कोटिएंट 2026 के लिए 16 शहरों के 2,600 लोगों से बातचीत की गई. इसमें लोगों की शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और सामाजिक स्थिति से जुड़े पहलुओं को समझने की कोशिश की गई. रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक दबाव सिर्फ बचत या निवेश तक सीमित नहीं है. करीब 36 फीसदी लोगों ने कहा कि हेल्दी खाना, पोषण संबंधी उत्पाद और नियमित हेल्थ चेकअप पर होने वाला खर्च उनके बजट पर अतिरिक्त बोझ डालता है.

वहीं 40 फीसदी लोगों का कहना है कि तनाव और चिंता का असर उनकी शारीरिक सेहत पर पड़ रहा है. इतने ही लोगों ने यह भी माना कि परिवार और दोस्तों के साथ कम समय बिताने से उनके काम या पढ़ाई पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है.

रिमोट से बंद करते हैं AC और TV? बिजली बिल बढ़ेगा, समझें गणित, गर्मियों में खाली होने से बचेगी आपकी जेब

युवाओं पर सबसे ज्यादा आर्थिक दबाव

स्टडी में यह बात सामने आई कि कई लोग अपनी कमाई, बचत और भविष्य के खर्चों को लेकर लगातार चिंता में रहते हैं. इसका असर उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है. जब सेहत से जुड़ी जरूरतें बढ़ती हैं, तो लोगों को उस पर अतिरिक्त पैसा खर्च करना पड़ता है, जिससे आर्थिक दबाव और बढ़ जाता है.

रिपोर्ट के अनुसार, युवा वर्ग इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित है. खासकर 25 से 34 साल की उम्र के लोग अपने भविष्य को सुरक्षित बनाने, घर-परिवार की जिम्मेदारियों और बढ़ते खर्चों के कारण अधिक दबाव महसूस कर रहे हैं. अध्ययन में महिलाओं ने भी आर्थिक मामलों को लेकर ज्यादा चिंता जताई. कई महिलाओं का मानना है कि भविष्य के खर्चों, बचत और वित्तीय सुरक्षा को लेकर उन्हें अधिक सतर्क रहना पड़ता है.

आर्थिक रूप से मजबूत बनना बड़ी प्राथमिकता

रिपोर्ट बताती है कि आज लोगों के लिए आर्थिक रूप से मजबूत बनना सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है. कई लोग अपनी शारीरिक या मानसिक सेहत से पहले अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने पर ध्यान देना चाहते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि आर्थिक सुरक्षा बेहतर जीवन की नींव है.

रेल यात्रियों की बढ़ेगी मुसीबत, 6 जून तक इस रूट की दर्जनों ट्रेनें रद्द और डायवर्ट, देखें लिस्ट

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