69 हजार शिक्षक भर्ती का हिसाब देगी यूपी सरकार, सुप्रीम कोर्ट ने मांगी लिस्ट
उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती में 19 हजार सीटों के आरक्षण विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है. मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में राज्य सरकार से भर्ती से जुड़ा विस्तृत डेटा और चयनित उम्मीदवारों की पूरी लिस्ट पेश करने को कहा है. कोर्ट यह देखना चाहता है कि भर्ती में उम्मीदवारों के अंक कैटेगरी और मेरिट के आधार पर चयन किस तरह हुआ था. जस्टिस SVN भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने सरकार को ऐसी लिस्ट तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसमें उम्मीदवारों से जुड़ी जरूरी जानकारी शामिल हो. इस मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होनी है. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से 69 हजार भर्ती की मूल चयन लिस्ट का डेटा उपलब्ध कराने को कहा है. इसमें उम्मीदवारों का नाम, क्रमांक, कैटेगरी, सहायक अध्यापक, लिखित परीक्षा में प्राप्त अंक, ATRE में मिले अंक और क्वालिटी पॉइंट जैसी जानकारी शामिल करनी होगी. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि सिर्फ 64 या 65 प्रतिशत अंक पाने वाले उम्मीदवारों का डेटा नहीं देना है, बल्कि संबंधित रेंज के सभी उम्मीदवारों की जानकारी उपलब्ध कराई जाए. पीठ इस डेटा के जरिए यह समझना चाहती है कि परीक्षा और मेरिट के आधार पर चयन किस तरह हुआ है. गलत सवाल पर एक अंक देने को लेकर सवाल सुनवाई के दौरान आंसर की में गलत सवाल के कारण दिए गए अंक का एक मुद्दा भी उठा. कोर्ट ने सवाल किया कि अगर किसी प्रश्न में गलती थी और उसका लाभ दिया गया, तो यह फायदा सिर्फ कुछ उम्मीदवारों तक सीमित क्यों रहा. अदालत ने इस बात पर भी जानकारी मांगी कि गलत सवाल का एक अंक किन उम्मीदवारों को दिया गया और उसका चयन सूची पर क्या असर पड़ा. बताया गया कि उस समय कोर्ट पहुंचे उन उम्मीदवारों को इसका लाभ दिया गया था, जो इस एक अंक की वजह से चयन से बाहर हो गए थे. EWS उम्मीदवारों को लेकर भी आया मुद्दा सुनवाई में ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के उम्मीदवारों का मुद्दा भी उठा. उनकी ओर से कहा गया कि अगर भर्ती की चयन सूची दोबारा तैयार होती है, तो ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए. इस पीठ ने कहा कि अगर लखनऊ हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रहता है और चयन सूची को दोबारा तैयार करने की स्थिति बनती है, तो ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को शामिल करने पर विचार किया जाएगा. इस मुद्दे पर आगे विस्तार से सुनवाई की जाएगी. ये भी पढ़ें-नीट पेपर लीक के बाद अब CBT मोड में होगी परीक्षा, केंद्र की तैयारी शुरू पहले से चयनित शिक्षकों को लेकर भी दलील चयनित उम्मीदवारों की ओर से अदालत में यह मांग रखी गई कि अगर 69 हजार भर्ती की सूची दोबारा बनाई जाती है, तो पहले से चयनित और नियुक्त शिक्षकों को सीधी भर्ती से बाहर नहीं किया जाए. उनकी ओर से 18 नवंबर 2020 के रामशरण मौर्य फैसले का हवाला दिया गया. दलील दी गई है कि उस फैसले में बीएड उम्मीदवारों को इस भर्ती के लिए पात्र बनाया गया था. NCTE के नियमों का संदर्भ भी इसमें दिया गया है. बीएड और BTC पर भी हुई चर्चा मामले की सुनवाई के दौरान 69 हजार चयनित उम्मीदवारों में बीएड अभ्यर्थियों की संख्या को लेकर भी सवाल हुआ. चयनित पक्ष की ओर से करीब 40 हजार बीएड उम्मीदवार होने की बात कही गई, जबकि आरक्षित वर्ग की ओर से यह संख्या करीब 36 हजार बताई गई. राज्य सरकार के अधिवक्ता अंकित गोयल ने कहा कि सटीक आंकड़ा तत्काल उपलब्ध कराना संभव नहीं है. इसे तैयार करने में समय लगेगा. राज्य सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि मौजूदा मामले में बीएड और बीटीसी का विवाद मुख्य मुद्दा नहीं है. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान भर्ती में मेरिट और आरक्षण के नियमों के पालन को लेकर भी जानकारी मांगी. अदालत उनसे 69 हजार शिक्षक भर्ती की मूल चयन सूची और संबंधित आंकड़ों के आधार पर पूरे मामले को देखना चाहती है. ये भी पढ़ें-नीट यूजी राउंड 3 में 4687 सीटें अलॉट, क्या रही MBBS-BDS कट ऑफ?
उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती में 19 हजार सीटों के आरक्षण विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है. मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में राज्य सरकार से भर्ती से जुड़ा विस्तृत डेटा और चयनित उम्मीदवारों की पूरी लिस्ट पेश करने को कहा है. कोर्ट यह देखना चाहता है कि भर्ती में उम्मीदवारों के अंक कैटेगरी और मेरिट के आधार पर चयन किस तरह हुआ था. जस्टिस SVN भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने सरकार को ऐसी लिस्ट तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसमें उम्मीदवारों से जुड़ी जरूरी जानकारी शामिल हो. इस मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होनी है.
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से 69 हजार भर्ती की मूल चयन लिस्ट का डेटा उपलब्ध कराने को कहा है. इसमें उम्मीदवारों का नाम, क्रमांक, कैटेगरी, सहायक अध्यापक, लिखित परीक्षा में प्राप्त अंक, ATRE में मिले अंक और क्वालिटी पॉइंट जैसी जानकारी शामिल करनी होगी. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि सिर्फ 64 या 65 प्रतिशत अंक पाने वाले उम्मीदवारों का डेटा नहीं देना है, बल्कि संबंधित रेंज के सभी उम्मीदवारों की जानकारी उपलब्ध कराई जाए. पीठ इस डेटा के जरिए यह समझना चाहती है कि परीक्षा और मेरिट के आधार पर चयन किस तरह हुआ है.
गलत सवाल पर एक अंक देने को लेकर सवाल
सुनवाई के दौरान आंसर की में गलत सवाल के कारण दिए गए अंक का एक मुद्दा भी उठा. कोर्ट ने सवाल किया कि अगर किसी प्रश्न में गलती थी और उसका लाभ दिया गया, तो यह फायदा सिर्फ कुछ उम्मीदवारों तक सीमित क्यों रहा. अदालत ने इस बात पर भी जानकारी मांगी कि गलत सवाल का एक अंक किन उम्मीदवारों को दिया गया और उसका चयन सूची पर क्या असर पड़ा. बताया गया कि उस समय कोर्ट पहुंचे उन उम्मीदवारों को इसका लाभ दिया गया था, जो इस एक अंक की वजह से चयन से बाहर हो गए थे.
EWS उम्मीदवारों को लेकर भी आया मुद्दा
सुनवाई में ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के उम्मीदवारों का मुद्दा भी उठा. उनकी ओर से कहा गया कि अगर भर्ती की चयन सूची दोबारा तैयार होती है, तो ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए. इस पीठ ने कहा कि अगर लखनऊ हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रहता है और चयन सूची को दोबारा तैयार करने की स्थिति बनती है, तो ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को शामिल करने पर विचार किया जाएगा. इस मुद्दे पर आगे विस्तार से सुनवाई की जाएगी.
ये भी पढ़ें-नीट पेपर लीक के बाद अब CBT मोड में होगी परीक्षा, केंद्र की तैयारी शुरू
पहले से चयनित शिक्षकों को लेकर भी दलील
चयनित उम्मीदवारों की ओर से अदालत में यह मांग रखी गई कि अगर 69 हजार भर्ती की सूची दोबारा बनाई जाती है, तो पहले से चयनित और नियुक्त शिक्षकों को सीधी भर्ती से बाहर नहीं किया जाए. उनकी ओर से 18 नवंबर 2020 के रामशरण मौर्य फैसले का हवाला दिया गया. दलील दी गई है कि उस फैसले में बीएड उम्मीदवारों को इस भर्ती के लिए पात्र बनाया गया था. NCTE के नियमों का संदर्भ भी इसमें दिया गया है.
बीएड और BTC पर भी हुई चर्चा
मामले की सुनवाई के दौरान 69 हजार चयनित उम्मीदवारों में बीएड अभ्यर्थियों की संख्या को लेकर भी सवाल हुआ. चयनित पक्ष की ओर से करीब 40 हजार बीएड उम्मीदवार होने की बात कही गई, जबकि आरक्षित वर्ग की ओर से यह संख्या करीब 36 हजार बताई गई. राज्य सरकार के अधिवक्ता अंकित गोयल ने कहा कि सटीक आंकड़ा तत्काल उपलब्ध कराना संभव नहीं है. इसे तैयार करने में समय लगेगा. राज्य सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि मौजूदा मामले में बीएड और बीटीसी का विवाद मुख्य मुद्दा नहीं है. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान भर्ती में मेरिट और आरक्षण के नियमों के पालन को लेकर भी जानकारी मांगी. अदालत उनसे 69 हजार शिक्षक भर्ती की मूल चयन सूची और संबंधित आंकड़ों के आधार पर पूरे मामले को देखना चाहती है.
ये भी पढ़ें-नीट यूजी राउंड 3 में 4687 सीटें अलॉट, क्या रही MBBS-BDS कट ऑफ?
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