एशियन गेम्स में जीता सिल्वर, कौन हैं आशीमा और DU से क्या कनेक्शन?

एशियन गेम्स में जब भारत के खिलाड़ी तिरंगे के साथ पोडियम पर पहुंचते हैं, तो हर भारतीय के लिए वह गर्व का पल होता है. इस बार शूटिंग में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया और महिला ट्रैप टीम ने भारत की झोली में सिल्वर मेडल डाला. इस टीम का हिस्सा रहीं आशीमा अहलावत की कहानी इसलिए भी खास है, क्योंकि वह सिर्फ निशानेबाज ही नहीं बल्कि दिल्ली यूनिवर्सिटी से भी जुड़ी हुई हैं. आशीमा ने नीरू ढांडा और मनीषा कीर के साथ मिलकर महिला ट्रैप टीम इवेंट में भारत के लिए रजत पदक जीता. खास बात यह है कि पढ़ाई और शूटिंग दोनों को साथ लेकर चलने वाली आशीमा पहले लेडी श्रीराम कॉलेज से पढ़ाई कर चुकी हैं और अब दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पोस्टग्रेजुएशन कर रही हैं.  कौन हैं आशीमा अहलावत? आशीमा अहलावत हरियाणा के रोहतक जिले के खरखड़ा गांव से हैं. उनका शूटिंग का सफर अचानक शुरू नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे पढ़ाई, परिवार और लगातार मेहनत की कहानी है. रिपोर्ट के मुताबिक, आशीमा ने 12वीं कक्षा में 98.6 प्रतिशत अंक हासिल किए थे. पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करने के साथ उन्हें खेल और दूसरी गतिविधियों में भी रुचि थी. शूटिंग में आगे बढ़ने का फैसला करने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे इस खेल में अपनी जगह बनाई और राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचीं.  मां ने रखी थी पढ़ाई की शर्त आशीमा की शूटिंग की शुरुआत के पीछे उनकी मां का भी बड़ा योगदान रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, जब आशीमा ने शूटिंग को गंभीरता से आगे बढ़ाने की इच्छा जताई तो उनकी मां सुमित्रा अहलावत ने पहले पढ़ाई को प्राथमिकता देने की बात कही. उन्होंने 12वीं में 96 प्रतिशत अंक हासिल करने की शर्त रखी थी. आशीमा ने इस चुनौती को स्वीकार किया और 98.6 प्रतिशत अंक हासिल किए. इसके बाद उन्होंने शूटिंग को आगे बढ़ाया. शुरुआत में उन्हें रोहतक से फरीदाबाद तक रोजाना ट्रेनिंग के लिए लंबा सफर भी करना पड़ता था. यह भी पढ़ें : भारत के किस राज्य में सबसे ज्यादा खुदकुशी करते हैं छात्र? यहां जानें  DU से क्या है आशीमा का कनेक्शन? आशीमा का दिल्ली यूनिवर्सिटी से सीधा कनेक्शन है. उन्होंने Lady Shri Ram College for Women यानी LSR से ग्रेजुएशन किया है. LSR की वार्षिक रिपोर्ट में भी आशीमा का शूटिंग में प्रदर्शन दर्ज है. रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने ट्रैप शूटिंग में राष्ट्रीय और यूनिवर्सिटी स्तर पर पदक जीते थे. अब वह दिल्ली यूनिवर्सिटी के Delhi School of Economics से पोस्टग्रेजुएशन कर रही हैं. एशियन गेम्स में उनके सिल्वर मेडल के बाद DU की ओर से भी उन्हें बधाई दी गई.  अब आगे क्या है आशीमा का लक्ष्य? एशियन गेम्स का सिल्वर आशीमा के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन उनका लक्ष्य यहीं खत्म नहीं होता. रिपोर्टों के मुताबिक, अब उनकी नजर ओलंपिक में पदक जीतने पर है. उनकी कहानी की खास बात यह भी है कि उन्होंने पढ़ाई को छोड़कर सिर्फ खेल पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ीं. LSR में पढ़ाई से लेकर DU के Delhi School of Economics में पोस्टग्रेजुएशन और अब एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंचना उनके सफर का अहम हिस्सा है. यह भी पढ़ें : दिल्ली में कहां है सबसे सस्ती पार्किंग? एक क्लिक में जान लें फायदे का सौदा

Oct 1, 2026 - 22:30
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एशियन गेम्स में जीता सिल्वर, कौन हैं आशीमा और DU से क्या कनेक्शन?

एशियन गेम्स में जब भारत के खिलाड़ी तिरंगे के साथ पोडियम पर पहुंचते हैं, तो हर भारतीय के लिए वह गर्व का पल होता है. इस बार शूटिंग में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया और महिला ट्रैप टीम ने भारत की झोली में सिल्वर मेडल डाला. इस टीम का हिस्सा रहीं आशीमा अहलावत की कहानी इसलिए भी खास है, क्योंकि वह सिर्फ निशानेबाज ही नहीं बल्कि दिल्ली यूनिवर्सिटी से भी जुड़ी हुई हैं.

आशीमा ने नीरू ढांडा और मनीषा कीर के साथ मिलकर महिला ट्रैप टीम इवेंट में भारत के लिए रजत पदक जीता. खास बात यह है कि पढ़ाई और शूटिंग दोनों को साथ लेकर चलने वाली आशीमा पहले लेडी श्रीराम कॉलेज से पढ़ाई कर चुकी हैं और अब दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पोस्टग्रेजुएशन कर रही हैं.

 कौन हैं आशीमा अहलावत?

आशीमा अहलावत हरियाणा के रोहतक जिले के खरखड़ा गांव से हैं. उनका शूटिंग का सफर अचानक शुरू नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे पढ़ाई, परिवार और लगातार मेहनत की कहानी है. रिपोर्ट के मुताबिक, आशीमा ने 12वीं कक्षा में 98.6 प्रतिशत अंक हासिल किए थे. पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करने के साथ उन्हें खेल और दूसरी गतिविधियों में भी रुचि थी. शूटिंग में आगे बढ़ने का फैसला करने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे इस खेल में अपनी जगह बनाई और राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचीं.

 मां ने रखी थी पढ़ाई की शर्त

आशीमा की शूटिंग की शुरुआत के पीछे उनकी मां का भी बड़ा योगदान रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, जब आशीमा ने शूटिंग को गंभीरता से आगे बढ़ाने की इच्छा जताई तो उनकी मां सुमित्रा अहलावत ने पहले पढ़ाई को प्राथमिकता देने की बात कही. उन्होंने 12वीं में 96 प्रतिशत अंक हासिल करने की शर्त रखी थी. आशीमा ने इस चुनौती को स्वीकार किया और 98.6 प्रतिशत अंक हासिल किए. इसके बाद उन्होंने शूटिंग को आगे बढ़ाया. शुरुआत में उन्हें रोहतक से फरीदाबाद तक रोजाना ट्रेनिंग के लिए लंबा सफर भी करना पड़ता था.

यह भी पढ़ें : भारत के किस राज्य में सबसे ज्यादा खुदकुशी करते हैं छात्र? यहां जानें

 DU से क्या है आशीमा का कनेक्शन?

आशीमा का दिल्ली यूनिवर्सिटी से सीधा कनेक्शन है. उन्होंने Lady Shri Ram College for Women यानी LSR से ग्रेजुएशन किया है. LSR की वार्षिक रिपोर्ट में भी आशीमा का शूटिंग में प्रदर्शन दर्ज है. रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने ट्रैप शूटिंग में राष्ट्रीय और यूनिवर्सिटी स्तर पर पदक जीते थे. अब वह दिल्ली यूनिवर्सिटी के Delhi School of Economics से पोस्टग्रेजुएशन कर रही हैं. एशियन गेम्स में उनके सिल्वर मेडल के बाद DU की ओर से भी उन्हें बधाई दी गई.

 अब आगे क्या है आशीमा का लक्ष्य?

एशियन गेम्स का सिल्वर आशीमा के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन उनका लक्ष्य यहीं खत्म नहीं होता. रिपोर्टों के मुताबिक, अब उनकी नजर ओलंपिक में पदक जीतने पर है. उनकी कहानी की खास बात यह भी है कि उन्होंने पढ़ाई को छोड़कर सिर्फ खेल पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ीं. LSR में पढ़ाई से लेकर DU के Delhi School of Economics में पोस्टग्रेजुएशन और अब एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंचना उनके सफर का अहम हिस्सा है.

यह भी पढ़ें : दिल्ली में कहां है सबसे सस्ती पार्किंग? एक क्लिक में जान लें फायदे का सौदा

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