500 रुपए वाला बैग 8.3 लाख का, बिजनेसमेन ने पूछा- कब चोरी बंद करेंगे लग्जरी ब्रैंड
क्या आप भी बैग के शोकीन हैं और इस नवरात्रि कुछ नये तरीके का बैग लेने की इच्छा रखते हैं तो जानें आजकल मार्किट में ऐसा कौनसा बैग चर्चा में शामिल हुआ है, जिसकी कीमत करीब 8 लाख रुपए है. भारत के बड़े उद्योगपति हर्ष गोयनका ने इस बैग को लेकर एक्स पर पोस्ट लिखा है. हर्ष गोयनका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर Fendi के बैग की तस्वीर दिखाते हुए इसकी कीमत और डिजाइन को लेकर टिप्पणी की है. उन्होंने इसकी तुलना गुजरात के बाजारों में मिलने वाले 500 रुपए के बैग से की और कहा कि भारतीय कारीगरों को इस तरह के डिजाइन के लिए पर्याप्त पहचान नहीं मिलती. गोयनका ने Fendi के डिजाइन पर क्या कहा?गोयनका ने अपनी पोस्ट में हाल ही में सामने आए Prada के कोलाहपुरी चप्पल पर विवाद का भी जिक्र किया. उनका सवाल था कि लग्जरी ब्रांड भारतीय पारंपरिक कला को अपने प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल करते समय उससे जुड़े कारीगरों को उचित श्रेय आखिर कब देंगे. यह भी पढ़ें- कहां निवेश करती हैं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कितना है कर्ज? किरण मजुमदार शॉ ने भी जताई आपत्ति इस मुद्दे पर बाइओकोइन की संस्थापक किरण मजुमदार शोव ने भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने Fendi के डिजाइन को लेकर सांस्कृतिक विरासत और भारतीय कारीगरों की पहचान से जुड़े सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक कला को लग्जरी प्रोडक्ट के रूप में पेश करते समय उन कारीगरों और समुदायों की भूमिका को नजर अंदाज नहीं किया जाना चाहिए, जिन्होंने इन परंपराओं को लंबे समय से संभालकर रखा है.क्या है Fendi का यह बैग? Fendi की वेबसाइट पर यह प्रोडक्ट “Baguette 26424 – Multicolour Re Edition bag with embroidery and mirrors” के नाम से दर्ज है. ब्रांड के अनुसार यह फौल- विटंर 2026-27 कलेक्शन का हिस्सा है और मूल Baguette डिजाइन से जुड़ा हुआ है. बैग पर हाथ से कढ़ाई की गई है. इसमें करीब 39,500 बीड्स और 475 मिरर लगाए गए हैं. Fendi के मुताबिक इसे तैयार करने में 138 घंटे से ज्यादा का कारीगरी वाला काम लगता है. मेड इन इटली, लेकिन चर्चा भारत के पारंपरिक कला की Fendi के मुताबिक यह बैग इटली में तैयार किया गया है. इसमें सिल्क, ग्लास एम्ब्रॉयडरी, कैल्फ लेदर और लिनेन जैसी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है. इसका वजन करीब 0.46 किलोग्राम है. इस बैग को लेकर बहस सिर्फ इसकी कीमत तक सीमित नहीं है. सोशल मीडिया पर मुख्य चर्चा इस बात को लेकर है कि भारतीय पारंपरिक डिजाइन से मिलतेजुलते तत्वों को अंतरराष्ट्रीय लग्जरी ब्रांड किस तरह पेश करते हैं और उससे भारतीय कारीगरों को कितनी पहचान मिलती है.भारतीय क्राफ्ट पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल Fendi से पहले भी कुछ अंतरराष्ट्रीय फैशन ब्रांड भारतीय पारंपरिक कला से मिलते-जुलते डिजाइन को लेकर चर्चा में रहे हैं. Prada की कोलाहपुरी सटाइल चप्पलों और Dior के लखनवी मुकाइश इंमबोइडरी वाले महंगी चीजों को लेकर भी सवाल उठे थे. राफ लोरिन के कुछ इंमबोइडरी डिजाइंस पर भी भारतीय जरदोजी से समानता को लेकर चर्चा हुई थी. यह भी पढ़ें: Tata Group: 158 साल के साम्राज्य में चेयरमैन की कुर्सी पर टकराव, आखिर चल क्या रहा है? यह भी देखें-
क्या आप भी बैग के शोकीन हैं और इस नवरात्रि कुछ नये तरीके का बैग लेने की इच्छा रखते हैं तो जानें आजकल मार्किट में ऐसा कौनसा बैग चर्चा में शामिल हुआ है, जिसकी कीमत करीब 8 लाख रुपए है. भारत के बड़े उद्योगपति हर्ष गोयनका ने इस बैग को लेकर एक्स पर पोस्ट लिखा है.
हर्ष गोयनका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर Fendi के बैग की तस्वीर दिखाते हुए इसकी कीमत और डिजाइन को लेकर टिप्पणी की है. उन्होंने इसकी तुलना गुजरात के बाजारों में मिलने वाले 500 रुपए के बैग से की और कहा कि भारतीय कारीगरों को इस तरह के डिजाइन के लिए पर्याप्त पहचान नहीं मिलती.
गोयनका ने Fendi के डिजाइन पर क्या कहा?
गोयनका ने अपनी पोस्ट में हाल ही में सामने आए Prada के कोलाहपुरी चप्पल पर विवाद का भी जिक्र किया. उनका सवाल था कि लग्जरी ब्रांड भारतीय पारंपरिक कला को अपने प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल करते समय उससे जुड़े कारीगरों को उचित श्रेय आखिर कब देंगे.
यह भी पढ़ें- कहां निवेश करती हैं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कितना है कर्ज?
किरण मजुमदार शॉ ने भी जताई आपत्ति
इस मुद्दे पर बाइओकोइन की संस्थापक किरण मजुमदार शोव ने भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने Fendi के डिजाइन को लेकर सांस्कृतिक विरासत और भारतीय कारीगरों की पहचान से जुड़े सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक कला को लग्जरी प्रोडक्ट के रूप में पेश करते समय उन कारीगरों और समुदायों की भूमिका को नजर अंदाज नहीं किया जाना चाहिए, जिन्होंने इन परंपराओं को लंबे समय से संभालकर रखा है.
क्या है Fendi का यह बैग?
Fendi की वेबसाइट पर यह प्रोडक्ट “Baguette 26424 – Multicolour Re Edition bag with embroidery and mirrors” के नाम से दर्ज है. ब्रांड के अनुसार यह फौल- विटंर 2026-27 कलेक्शन का हिस्सा है और मूल Baguette डिजाइन से जुड़ा हुआ है.
बैग पर हाथ से कढ़ाई की गई है. इसमें करीब 39,500 बीड्स और 475 मिरर लगाए गए हैं. Fendi के मुताबिक इसे तैयार करने में 138 घंटे से ज्यादा का कारीगरी वाला काम लगता है.
मेड इन इटली, लेकिन चर्चा भारत के पारंपरिक कला की
Fendi के मुताबिक यह बैग इटली में तैयार किया गया है. इसमें सिल्क, ग्लास एम्ब्रॉयडरी, कैल्फ लेदर और लिनेन जैसी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है. इसका वजन करीब 0.46 किलोग्राम है.
इस बैग को लेकर बहस सिर्फ इसकी कीमत तक सीमित नहीं है. सोशल मीडिया पर मुख्य चर्चा इस बात को लेकर है कि भारतीय पारंपरिक डिजाइन से मिलतेजुलते तत्वों को अंतरराष्ट्रीय लग्जरी ब्रांड किस तरह पेश करते हैं और उससे भारतीय कारीगरों को कितनी पहचान मिलती है.
भारतीय क्राफ्ट पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
Fendi से पहले भी कुछ अंतरराष्ट्रीय फैशन ब्रांड भारतीय पारंपरिक कला से मिलते-जुलते डिजाइन को लेकर चर्चा में रहे हैं. Prada की कोलाहपुरी सटाइल चप्पलों और Dior के लखनवी मुकाइश इंमबोइडरी वाले महंगी चीजों को लेकर भी सवाल उठे थे. राफ लोरिन के कुछ इंमबोइडरी डिजाइंस पर भी भारतीय जरदोजी से समानता को लेकर चर्चा हुई थी.
यह भी पढ़ें: Tata Group: 158 साल के साम्राज्य में चेयरमैन की कुर्सी पर टकराव, आखिर चल क्या रहा है?
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