वोडाफोन आइडिया को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत, 9450 करोड़ रुपए का मामला, जानें सरकार को क्या मिला निर्देश

वोडाफोन आइडिया (Vi) को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कंपनी पर बकाया 9,450 करोड़ रुपए के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू राशि पर दोबारा विचार की अनुमति दी. कोर्ट ने यह माना है कि यह मामला सरकार के नीतिगत अधिकार क्षेत्र में आता है. अदालत का यह फैसला वोडाफोन आइडिया के भविष्य के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है. यह कंपनी लंबे वक्त से अपनी देनदारियों को लेकर परेशान चल रही है. सुप्रीम कोर्ट ने एजीआर बकाए मामले पर कहा कि इसके पुनर्मूल्यांकन का मुद्दा ऐसा है, जिस पर आखिरी फैसला सरकार को लेना है. कोर्ट की इस टिप्पणी ने केंद्र के लिए एक अहम पॉलिसी विंडो खोल दी है. इसका स्पष्ट मतलब है कि सरकार अब कंपनी को राहत देने के लिए नीतिगत स्तर पर नए विकल्प देख सकती है. अब वोडाफोन आइडिया के लिए भी रास्ता आसान होने की उम्मीद है. कंपनी ने क्या दिया तर्क चीफ जस्टिस बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने दूरसंचार विभाग (डीओटी) की एजीआर-संबंधित मांगों को चुनौती देने वाली वोडाफोन आइडिया की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया. कंपनी ने तर्क दिया कि ये अतिरिक्त दावे अस्थिर हैं, क्योंकि एजीआर बकाया पर शीर्ष अदालत के 2019 के फैसले से देनदारियां पहले ही स्पष्ट हो चुकी थीं. केंद्र की ओर से अदालत में क्या कहा गया सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया कि सरकार के पास अब वोडाफोन आइडिया में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है और लगभग 20 करोड़ उपभोक्ता इसकी सेवाओं पर निर्भर हैं. उन्होंने दलील दी कि इन परिस्थितियों को देखते हुए, केंद्र उपभोक्ता हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए कंपनी के उठाए गए मुद्दों पर गौर करने को तैयार है. पीठ ने कहा कि याचिका 2016-17 के लिए अतिरिक्त एजीआर मांगों को रद्द करने और सभी बकाया राशि का व्यापक पुनर्मूल्यांकन करने के लिए आगे के निर्देशों की मांग करते हुए दायर की गई है. इनपुट - पीटीआई

Oct 27, 2025 - 13:30
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वोडाफोन आइडिया को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत, 9450 करोड़ रुपए का मामला, जानें सरकार को क्या मिला निर्देश

वोडाफोन आइडिया (Vi) को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कंपनी पर बकाया 9,450 करोड़ रुपए के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू राशि पर दोबारा विचार की अनुमति दी. कोर्ट ने यह माना है कि यह मामला सरकार के नीतिगत अधिकार क्षेत्र में आता है. अदालत का यह फैसला वोडाफोन आइडिया के भविष्य के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है. यह कंपनी लंबे वक्त से अपनी देनदारियों को लेकर परेशान चल रही है.

सुप्रीम कोर्ट ने एजीआर बकाए मामले पर कहा कि इसके पुनर्मूल्यांकन का मुद्दा ऐसा है, जिस पर आखिरी फैसला सरकार को लेना है. कोर्ट की इस टिप्पणी ने केंद्र के लिए एक अहम पॉलिसी विंडो खोल दी है. इसका स्पष्ट मतलब है कि सरकार अब कंपनी को राहत देने के लिए नीतिगत स्तर पर नए विकल्प देख सकती है. अब वोडाफोन आइडिया के लिए भी रास्ता आसान होने की उम्मीद है.

कंपनी ने क्या दिया तर्क

चीफ जस्टिस बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने दूरसंचार विभाग (डीओटी) की एजीआर-संबंधित मांगों को चुनौती देने वाली वोडाफोन आइडिया की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया. कंपनी ने तर्क दिया कि ये अतिरिक्त दावे अस्थिर हैं, क्योंकि एजीआर बकाया पर शीर्ष अदालत के 2019 के फैसले से देनदारियां पहले ही स्पष्ट हो चुकी थीं.

केंद्र की ओर से अदालत में क्या कहा गया

सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया कि सरकार के पास अब वोडाफोन आइडिया में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है और लगभग 20 करोड़ उपभोक्ता इसकी सेवाओं पर निर्भर हैं. उन्होंने दलील दी कि इन परिस्थितियों को देखते हुए, केंद्र उपभोक्ता हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए कंपनी के उठाए गए मुद्दों पर गौर करने को तैयार है.

पीठ ने कहा कि याचिका 2016-17 के लिए अतिरिक्त एजीआर मांगों को रद्द करने और सभी बकाया राशि का व्यापक पुनर्मूल्यांकन करने के लिए आगे के निर्देशों की मांग करते हुए दायर की गई है.

इनपुट - पीटीआई

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