ममता के करीबी मदन मित्रा ने बदला पाला तो आया TMC का रिएक्शन, कहा - 'उनके जाने से...'
ममता बनर्जी के करीब नेताओं में गिने जाने वाले टीएमसी के दिग्गज नेता और कमारहाटी से विधायक मदन मित्रा ने बुधवार (15 जुलाई) को अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दूसरे गुट में शामिल हो गए. उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी वजह से ही पार्टी की यह हालत हुई है. मदन मित्रा के बागी गुट में शामिल होने पर टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने प्रतिक्रिया दी है. टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा, 'मुझे उनके जाने का बहुत दुख है. वे लंबे समय से हमारे साथ थे और चुनाव में हार के बाद भी हमारे साथ खड़े रहे.उनका जाने का फैसला निराशाजनक है.' #WATCH | Kolkata, West Bengal: On MLA Madan Mitra's resignation, TMC MP Saugata Roy says, "... I am saddened that he has left. He was with us for a very long time and stood by us even after our election defeat. His decision to leave is disappointing..." pic.twitter.com/jG9nWpZFTJ — ANI (@ANI) July 15, 2026 अभिषेक बनर्जी को ठहराया जिम्मेदार मित्रा ने कहा, 'मैं टीएमसी के साथ था और आज भी टीएमसी में ही हूं. मैंने सिर्फ एक गुट से दूसरे गुट में कदम रखा है. पार्टी किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि सभी की है.' उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट में उनके पास जो भी संगठनात्मक जिम्मेदारियां थीं, उनसे उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. आगे कहा, 'मैं सिर्फ तृणमूल का विधायक नहीं हूं, मैं पूरे बंगाल का विधायक हूं. मैं विधानसभा का सदस्य हूं. मैंने तृणमूल के लिए सब कुछ छोड़ दिया. मेरे पास जो भी पद थे, उन सभी से मैंने इस्तीफा दे दिया. बागी गुट में शामिल होने के बाद मदन मित्रा का आया पहला रिएक्शन, बोले - 'ममता बनर्जी का फोटो दिल में लेकिन...' ममता गुट को लगा बड़ा झटका विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी में हुई टूट के बीच मदन मित्रा का यह कदम ममता बनर्जी के गुट के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है. इससे पहले 60 से ज्यादा विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दूसरे गुट में शामिल हो चुके थे, जबकि ममता बनर्जी के साथ अब बहुत कम विधायक बचे हैं. मदन मित्रा को ममता बनर्जी के भरोसेमंद और वफादार नेताओं में से एक माना जाता था. उन्हें संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं. पत्नी-बेटे को ईडी ने भेजा समन यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब ईडी ने पश्चिम बंगाल के कथित नगर निकाय भर्ती घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में मदन मित्रा की पत्नी और उनके बेटों को समन भेजा था. समन मिलने के बाद मित्रा ने मध्य कोलकाता में दूसरे गुट के विधायक संदीपन साहा के घर जाकर पूर्व तृणमूल विधायक स्वर्ण कमल साहा से मुलाकात की. इसके बाद उनके गुट बदलने की अटकलें तेज हो गईं थीं. 'अभिषेक बनर्जी बहुत बुरे हैं...', TMC में टूट के बीच बोलीं ममता, बागियों को लेकर बड़ा ऐलान
ममता बनर्जी के करीब नेताओं में गिने जाने वाले टीएमसी के दिग्गज नेता और कमारहाटी से विधायक मदन मित्रा ने बुधवार (15 जुलाई) को अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दूसरे गुट में शामिल हो गए. उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी वजह से ही पार्टी की यह हालत हुई है. मदन मित्रा के बागी गुट में शामिल होने पर टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने प्रतिक्रिया दी है.
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा, 'मुझे उनके जाने का बहुत दुख है. वे लंबे समय से हमारे साथ थे और चुनाव में हार के बाद भी हमारे साथ खड़े रहे.उनका जाने का फैसला निराशाजनक है.'
#WATCH | Kolkata, West Bengal: On MLA Madan Mitra's resignation, TMC MP Saugata Roy says, "... I am saddened that he has left. He was with us for a very long time and stood by us even after our election defeat. His decision to leave is disappointing..." pic.twitter.com/jG9nWpZFTJ — ANI (@ANI) July 15, 2026
अभिषेक बनर्जी को ठहराया जिम्मेदार
मित्रा ने कहा, 'मैं टीएमसी के साथ था और आज भी टीएमसी में ही हूं. मैंने सिर्फ एक गुट से दूसरे गुट में कदम रखा है. पार्टी किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि सभी की है.' उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट में उनके पास जो भी संगठनात्मक जिम्मेदारियां थीं, उनसे उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. आगे कहा, 'मैं सिर्फ तृणमूल का विधायक नहीं हूं, मैं पूरे बंगाल का विधायक हूं. मैं विधानसभा का सदस्य हूं. मैंने तृणमूल के लिए सब कुछ छोड़ दिया. मेरे पास जो भी पद थे, उन सभी से मैंने इस्तीफा दे दिया.
ममता गुट को लगा बड़ा झटका
विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी में हुई टूट के बीच मदन मित्रा का यह कदम ममता बनर्जी के गुट के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है. इससे पहले 60 से ज्यादा विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दूसरे गुट में शामिल हो चुके थे, जबकि ममता बनर्जी के साथ अब बहुत कम विधायक बचे हैं. मदन मित्रा को ममता बनर्जी के भरोसेमंद और वफादार नेताओं में से एक माना जाता था. उन्हें संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं.
पत्नी-बेटे को ईडी ने भेजा समन
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब ईडी ने पश्चिम बंगाल के कथित नगर निकाय भर्ती घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में मदन मित्रा की पत्नी और उनके बेटों को समन भेजा था. समन मिलने के बाद मित्रा ने मध्य कोलकाता में दूसरे गुट के विधायक संदीपन साहा के घर जाकर पूर्व तृणमूल विधायक स्वर्ण कमल साहा से मुलाकात की. इसके बाद उनके गुट बदलने की अटकलें तेज हो गईं थीं.
'अभिषेक बनर्जी बहुत बुरे हैं...', TMC में टूट के बीच बोलीं ममता, बागियों को लेकर बड़ा ऐलान
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