बड़ा पद और अच्छी सैलरी, फिर भी अचानक इस्तीफा क्यों? कुंडली में छिपा होता है संकेत
आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु से पढ़ाई. फिर लंदन में नौकरी और इसके बाद यूपीएससी पास कर आईएएस बनने का सपना पूरा हुआ. करीब 13 साल तक प्रशासनिक सेवा में रहने के बाद दिव्या मित्तल ने अब आईएएस से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपने आधिकारिक X पोस्ट में लिखा कि वह अपनी इच्छा से 13 वर्षों की यात्रा को विराम दे रही हैं. साथ ही यह भी साफ कर दिया कि पद छूटा है, देश के लिए देखा गया सपना नहीं. आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर 'सब कुछ' पा लेने पर भी कुछ… pic.twitter.com/4VRXpK8nu8 — Divya Mittal (@divyamittal_IAS) August 30, 2026 दिव्या मित्तल ने अपने फैसले के पीछे किसी विवाद, दबाव या नाराजगी का जिक्र नहीं किया है. लेकिन उनका फैसला एक सवाल जरूर खड़ा करता है. जिस नौकरी को पाने के लिए लाखों लोग वर्षों तक मेहनत करते हैं, उसे कोई अपनी इच्छा से क्यों छोड़ देता है? बाहर से सब ठीक होने के बाद भी मन दूसरी दिशा में क्यों जाने लगता है? यह भी पढ़ें- Weather Prediction: सितंबर में फिर बिगड़ेगा मौसम? मंगल-शनि दे रहे भारी बारिश के संकेत दावा तो नहीं है लेकिन फिर भी ज्योतिष से इस स्थिति को काफी हद समझा जा सकता है. कुंडली के 12 भाव में इसका उत्तरा छिपा हो सकता है, लेकिन इसका जवाब केवल दशम भाव से नहीं मिलता. इसके लिए नौकरी, मन, संतुष्टि और बदलाव से जुड़े कई भावों को एक साथ देखना पड़ता है. पद दशम भाव देता है, संतोष कहीं और से आता है कुंडली का दशम भाव करियर, पद, अधिकार और समाज में मिलने वाली पहचान बताता है. दशम भाव और उसका स्वामी मजबूत हो तो व्यक्ति अपने क्षेत्र में ऊंचा मुकाम हासिल कर सकता है. बड़े संस्थान, सरकारी सेवा और जिम्मेदारी वाले पद भी इसी भाव से देखे जाते हैं. यहां एक बात समझना जरूरी है. मजबूत दशम भाव सफलता तो दिला सकता है, लेकिन उस सफलता से संतोष मिलेगा या नहीं, इसका फैसला अकेला दशम भाव नहीं करता. मन की स्थिति चंद्रमा से देखी जाती है. सुख और मानसिक शांति का विचार चतुर्थ भाव से किया जाता है. यदि दशम भाव मजबूत हो, लेकिन चंद्रमा या चतुर्थ भाव दबाव में हो तो व्यक्ति के पास अच्छा पद होने के बाद भी सुकून की कमी रह सकती है. दुनिया उसके करियर को उपलब्धि मानती है, लेकिन वह स्वयं उस काम से जुड़ाव महसूस नहीं करता. यह भी पढ़ें- Nepal Flood 2026: सितंबर में फिर उफन सकती हैं हिमालयी नदियां? नौकरी में बने रहने का संबंध षष्ठ भाव से दशम भाव करियर बताता है, जबकि षष्ठ भाव नौकरी और सेवा की व्यवस्था से जुड़ा है. रोज तय समय पर काम करना, नियम मानना, अधिकारियों के साथ तालमेल रखना और चुनौतियों के बीच टिके रहना षष्ठ भाव के दायरे में आता है. षष्ठ भाव और उसका स्वामी मजबूत हो तो व्यक्ति कठिन नौकरी को भी लंबे समय तक संभाल सकता है. यदि इस भाव पर लगातार अशुभ प्रभाव बन रहा हो तो काम का दबाव बढ़ सकता है. व्यक्ति को लगने लगता है कि वह काम तो कर रहा है, लेकिन अपनी शर्तों पर नहीं जी पा रहा. सिर्फ षष्ठ भाव कमजोर होने से कोई नौकरी नहीं छोड़ देता. ऐसा फैसला तब सामने आता है, जब षष्ठ और दशम भाव से जुड़े ग्रहों की दशा भी चल रही हो. शनि पहले थकाता है, फिर फैसला कराता है शनि नौकरी, अनुशासन, जिम्मेदारी और व्यवस्था का कारक है. मजबूत शनि व्यक्ति को वर्षों तक एक जगह टिककर काम करने की क्षमता देता है. वह दबाव में भी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटता. समस्या तब आती है, जब शनि का दबाव चंद्रमा, लग्न, दशम भाव या दशमेश पर बहुत अधिक बढ़ जाए. काम धीरे-धीरे उत्साह नहीं, बोझ लगने लगता है. व्यक्ति रोज अपना दायित्व पूरा करता है, लेकिन भीतर बदलाव की इच्छा बढ़ती रहती है. शनि के असर में लिया गया फैसला अक्सर दुनिया को अचानक दिखाई देता है. वास्तविकता में व्यक्ति उस फैसले तक एक दिन में नहीं पहुंचता. वह लंबे समय से सब कुछ देख और सह रहा होता है. इस्तीफा केवल उस प्रक्रिया का आखिरी हिस्सा होता है. यह भी पढ़ें- सितंबर में दाल-तेल से दूध तक क्या होगा महंगा? कमजोर मानसून के बीच कुंडली ने बढ़ाई चिंता केतु क्यों कम कर देता है पद का आकर्षण? केतु को विरक्ति का ग्रह कहा जाता है. इसे मोक्ष का कारक भी माना गया. इसका प्रभाव जिस भाव पर पड़ता है, व्यक्ति को वहां मिली उपलब्धियों से दूरी महसूस हो सकती है. सब कुछ होते हुए भी उसे लगता है कि कुछ कमी है. केतु यदि दशम भाव में बैठा हो, दशमेश से संबंध बना रहा हो या उसकी दशा करियर के भाव को सक्रिय कर रही हो तो बड़े पद का आकर्षण कमजोर पड़ सकता है. व्यक्ति वेतन, कुर्सी और अधिकार से अधिक अपने काम का अर्थ तलाशने लगता है. ऐसा व्यक्ति जरूरी नहीं कि काम करना छोड़ दे. वह पुरानी नौकरी छोड़कर स्वतंत्र काम, रिसर्च, शिक्षा, लेखन, समाजसेवा या किसी ऐसे क्षेत्र में जा सकता है जहां उसे अपने फैसले खुद लेने की आजादी मिले. अचानक इस्तीफे में अष्टम भाव की भूमिका अष्टम भाव अचानक आने वाले बदलाव का भाव है. अष्टमेश का दशम भाव या दशमेश से संबंध बने तो करियर में बड़ा मोड़ आ सकता है. यह बदलाव स्थानांतरण, विभाग बदलने, नौकरी छूटने या अपनी इच्छा से पद छोड़ने के रूप में सामने आ सकता है. बारहवां भाव भी यहां महत्वपूर्ण हो जाता है. यह त्याग, दूरी और किसी पुराने अध्याय के अंत का संकेत देता है. यदि दशम भाव, अष्टम भाव और बारहवें भाव के स्वामियों की दशा-अंतरदशा जुड़ जाए तो व्यक्ति स्थापित करियर से बाहर निकलने का निर्णय ले सकता है. फिर भी केवल एक योग देखकर इस्तीफे की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती. यह देखना जरूरी है कि उसी समय कौन-सी दशा चल रही है, ग्रह किस नवांश में हैं और गोचर जन्मकुंडली के किन भावों को सक्रिय कर रहा है. नौकरी छोड
आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु से पढ़ाई. फिर लंदन में नौकरी और इसके बाद यूपीएससी पास कर आईएएस बनने का सपना पूरा हुआ. करीब 13 साल तक प्रशासनिक सेवा में रहने के बाद दिव्या मित्तल ने अब आईएएस से इस्तीफा दे दिया है.
उन्होंने अपने आधिकारिक X पोस्ट में लिखा कि वह अपनी इच्छा से 13 वर्षों की यात्रा को विराम दे रही हैं. साथ ही यह भी साफ कर दिया कि पद छूटा है, देश के लिए देखा गया सपना नहीं.
आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।
साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर 'सब कुछ' पा लेने पर भी कुछ… pic.twitter.com/4VRXpK8nu8 — Divya Mittal (@divyamittal_IAS) August 30, 2026
दिव्या मित्तल ने अपने फैसले के पीछे किसी विवाद, दबाव या नाराजगी का जिक्र नहीं किया है.
लेकिन उनका फैसला एक सवाल जरूर खड़ा करता है. जिस नौकरी को पाने के लिए लाखों लोग वर्षों तक मेहनत करते हैं, उसे कोई अपनी इच्छा से क्यों छोड़ देता है? बाहर से सब ठीक होने के बाद भी मन दूसरी दिशा में क्यों जाने लगता है?
यह भी पढ़ें- Weather Prediction: सितंबर में फिर बिगड़ेगा मौसम? मंगल-शनि दे रहे भारी बारिश के संकेत
दावा तो नहीं है लेकिन फिर भी ज्योतिष से इस स्थिति को काफी हद समझा जा सकता है. कुंडली के 12 भाव में इसका उत्तरा छिपा हो सकता है, लेकिन इसका जवाब केवल दशम भाव से नहीं मिलता. इसके लिए नौकरी, मन, संतुष्टि और बदलाव से जुड़े कई भावों को एक साथ देखना पड़ता है.
पद दशम भाव देता है, संतोष कहीं और से आता है
कुंडली का दशम भाव करियर, पद, अधिकार और समाज में मिलने वाली पहचान बताता है. दशम भाव और उसका स्वामी मजबूत हो तो व्यक्ति अपने क्षेत्र में ऊंचा मुकाम हासिल कर सकता है. बड़े संस्थान, सरकारी सेवा और जिम्मेदारी वाले पद भी इसी भाव से देखे जाते हैं.
यहां एक बात समझना जरूरी है. मजबूत दशम भाव सफलता तो दिला सकता है, लेकिन उस सफलता से संतोष मिलेगा या नहीं, इसका फैसला अकेला दशम भाव नहीं करता.
मन की स्थिति चंद्रमा से देखी जाती है. सुख और मानसिक शांति का विचार चतुर्थ भाव से किया जाता है. यदि दशम भाव मजबूत हो, लेकिन चंद्रमा या चतुर्थ भाव दबाव में हो तो व्यक्ति के पास अच्छा पद होने के बाद भी सुकून की कमी रह सकती है. दुनिया उसके करियर को उपलब्धि मानती है, लेकिन वह स्वयं उस काम से जुड़ाव महसूस नहीं करता.
यह भी पढ़ें- Nepal Flood 2026: सितंबर में फिर उफन सकती हैं हिमालयी नदियां?
नौकरी में बने रहने का संबंध षष्ठ भाव से
दशम भाव करियर बताता है, जबकि षष्ठ भाव नौकरी और सेवा की व्यवस्था से जुड़ा है. रोज तय समय पर काम करना, नियम मानना, अधिकारियों के साथ तालमेल रखना और चुनौतियों के बीच टिके रहना षष्ठ भाव के दायरे में आता है.
षष्ठ भाव और उसका स्वामी मजबूत हो तो व्यक्ति कठिन नौकरी को भी लंबे समय तक संभाल सकता है. यदि इस भाव पर लगातार अशुभ प्रभाव बन रहा हो तो काम का दबाव बढ़ सकता है. व्यक्ति को लगने लगता है कि वह काम तो कर रहा है, लेकिन अपनी शर्तों पर नहीं जी पा रहा.
सिर्फ षष्ठ भाव कमजोर होने से कोई नौकरी नहीं छोड़ देता. ऐसा फैसला तब सामने आता है, जब षष्ठ और दशम भाव से जुड़े ग्रहों की दशा भी चल रही हो.
शनि पहले थकाता है, फिर फैसला कराता है
शनि नौकरी, अनुशासन, जिम्मेदारी और व्यवस्था का कारक है. मजबूत शनि व्यक्ति को वर्षों तक एक जगह टिककर काम करने की क्षमता देता है. वह दबाव में भी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटता.
समस्या तब आती है, जब शनि का दबाव चंद्रमा, लग्न, दशम भाव या दशमेश पर बहुत अधिक बढ़ जाए. काम धीरे-धीरे उत्साह नहीं, बोझ लगने लगता है. व्यक्ति रोज अपना दायित्व पूरा करता है, लेकिन भीतर बदलाव की इच्छा बढ़ती रहती है.
शनि के असर में लिया गया फैसला अक्सर दुनिया को अचानक दिखाई देता है. वास्तविकता में व्यक्ति उस फैसले तक एक दिन में नहीं पहुंचता. वह लंबे समय से सब कुछ देख और सह रहा होता है. इस्तीफा केवल उस प्रक्रिया का आखिरी हिस्सा होता है.
यह भी पढ़ें- सितंबर में दाल-तेल से दूध तक क्या होगा महंगा? कमजोर मानसून के बीच कुंडली ने बढ़ाई चिंता
केतु क्यों कम कर देता है पद का आकर्षण?
केतु को विरक्ति का ग्रह कहा जाता है. इसे मोक्ष का कारक भी माना गया. इसका प्रभाव जिस भाव पर पड़ता है, व्यक्ति को वहां मिली उपलब्धियों से दूरी महसूस हो सकती है. सब कुछ होते हुए भी उसे लगता है कि कुछ कमी है.
केतु यदि दशम भाव में बैठा हो, दशमेश से संबंध बना रहा हो या उसकी दशा करियर के भाव को सक्रिय कर रही हो तो बड़े पद का आकर्षण कमजोर पड़ सकता है. व्यक्ति वेतन, कुर्सी और अधिकार से अधिक अपने काम का अर्थ तलाशने लगता है.
ऐसा व्यक्ति जरूरी नहीं कि काम करना छोड़ दे. वह पुरानी नौकरी छोड़कर स्वतंत्र काम, रिसर्च, शिक्षा, लेखन, समाजसेवा या किसी ऐसे क्षेत्र में जा सकता है जहां उसे अपने फैसले खुद लेने की आजादी मिले.
अचानक इस्तीफे में अष्टम भाव की भूमिका
अष्टम भाव अचानक आने वाले बदलाव का भाव है. अष्टमेश का दशम भाव या दशमेश से संबंध बने तो करियर में बड़ा मोड़ आ सकता है. यह बदलाव स्थानांतरण, विभाग बदलने, नौकरी छूटने या अपनी इच्छा से पद छोड़ने के रूप में सामने आ सकता है.
बारहवां भाव भी यहां महत्वपूर्ण हो जाता है. यह त्याग, दूरी और किसी पुराने अध्याय के अंत का संकेत देता है. यदि दशम भाव, अष्टम भाव और बारहवें भाव के स्वामियों की दशा-अंतरदशा जुड़ जाए तो व्यक्ति स्थापित करियर से बाहर निकलने का निर्णय ले सकता है.
फिर भी केवल एक योग देखकर इस्तीफे की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती. यह देखना जरूरी है कि उसी समय कौन-सी दशा चल रही है, ग्रह किस नवांश में हैं और गोचर जन्मकुंडली के किन भावों को सक्रिय कर रहा है.
नौकरी छोड़कर अपना काम शुरू करने के योग
हर इस्तीफा नुकसान या असफलता नहीं होता. कई लोग नौकरी इसलिए छोड़ते हैं क्योंकि उन्हें आगे का रास्ता दिखाई देने लगता है.
दशम भाव के साथ तृतीय भाव सक्रिय हो तो व्यक्ति जोखिम लेकर स्वतंत्र काम कर सकता है. पंचम भाव नई सोच और रचनात्मकता देता है. सप्तम भाव कारोबार से जुड़ा है, जबकि एकादश भाव आमदनी और बड़े नेटवर्क को दिखाता है.
इन भावों के स्वामी मजबूत हों और उनकी दशा चल रही हो तो नौकरी छोड़ने के बाद बिजनेस, कंसल्टिंग या किसी नए क्षेत्र में सफलता मिल सकती है.
नवम भाव जुड़ने पर व्यक्ति ऐसा काम चुन सकता है, जिसे वह केवल करियर नहीं बल्कि अपने जीवन का उद्देश्य मानता है.
हर अच्छी नौकरी हर व्यक्ति के लिए अच्छी नहीं होती
वेतन, पद और सुरक्षा के आधार पर कोई नौकरी बहुत अच्छी हो सकती है. लेकिन यदि वहां मन नहीं लग रहा, काम का उद्देश्य समझ नहीं आ रहा या व्यक्ति किसी दूसरे रास्ते पर जाना चाहता है तो वही नौकरी उसके लिए बंधन बन सकती है.
ज्योतिष में नौकरी छोड़ने का फैसला किसी एक ग्रह का परिणाम नहीं माना जाता. दशम भाव पद देता है, षष्ठ भाव नौकरी में टिकाता है, शनि जिम्मेदारी का भार बढ़ाता है, केतु मोह कम करता है और अष्टम भाव पुराने करियर की दिशा बदल सकता है. इन संकेतों का वास्तविक असर तभी सामने आता है, जब संबंधित ग्रह की दशा और गोचर भी साथ दें.
दिव्या मित्तल की प्रमाणित जन्मकुंडली उपलब्ध न होने के कारण उनके इस्तीफे को इनमें से किसी योग से जोड़ना उचित नहीं है. उनकी कहानी को बस इतना समझने के लिए देखा जा सकता है कि कभी-कभी पद हासिल करना मंजिल नहीं होता. एक मुकाम पर पहुंचने के बाद व्यक्ति अपने लिए उस रास्ते की तलाश शुरू कर देता है, जहां पद से ज्यादा काम का अर्थ मायने रखता है.
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