क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य, जिस पर इजरायल-ईरान तनाव के बीच भारत की बढ़ी चिंता

Strait Of Hormuz: ईरान पर इजरायली हमले के बाद पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ चुका है. ईरान के महत्वपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों पर मिसाइल से गए हमले के बीच पूरी दुनिया में इस वक्त जिस एक चीज की दुनिया भर में जबरदस्त चर्चा हो रही है, वो है होर्मुज जलडमरुमध्य. ईरान-ओमान और यूएई के दक्षिणी हिस्से के बीच यह एक संकीर्ण लेकिन महत्वपूर्ण जलमार्ग है. यह जलडमरुमध्य फ़ारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और फिर अरब सागर से जोड़ती है. ये भारत से काफी दूर है, लेकिन यहां पर जो कुछ भी होगा उसका सीधा आपके ईंधन बिल से लेकर कारोबार और यहां तक कि शेयर बाजार पर असर देखने को मिलेगा. होर्मुज जमडमरुमध्य सिर्फ 21 माइल यानी करीब 34 किलोमीटर चौड़ा और 161 किलोमीटर लंबा है. क्या है अहमियत? होर्मुज जलडमरुमध्य क्रूड ऑयल और गैस दोनों के आयात और निर्यात के लिए काफी अहमियत रखता है. इसके बाद कई महत्वपूर्ण बंदगाह है, जैसे- ईरान का बंदर अब्बास जो एक महत्वपूर्ण नौसैनिक और वाणिज्यिक बंदरगाह है. इसके अलावा, इसके पास यूएई का फुजारिया बंदरगाह है, जो महत्वपूर्ण तेल भंडार और शिपिंग केन्द्र बिन्दु है. ओमान को सोहर बंदराह है, जिसका इस्तेमाल व्यापार और शिपिंग री-रूट के लिए किया जाता है. इसके अलावा, कतर का रास लफ्फान है, जो महत्वपूर्ण एलएजी निर्यात बंदरगाह है. इस जलडमरूमध्य से दुनिया के तेल के करीब पांचवां हिस्सा यानी 17 मिलियन प्रति बैरल रोजाना इस रूट से गुजरता है. सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, कतर और यूएई जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों का यह महत्वपूर्ण तेल एक्सपोर्ट का रास्ता है. यूएस एनर्जी इनफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक, यहां से गुजरने वाले तेल का करीब 83 प्रतिशत हिस्सा एशियाई बाजार में पहुंचता है. ईरान की धमकी से क्यों चिंता? ईरान ने इजरायल से तनाव के बीज इस होर्मुज जलडमरुमध्य को बंद करने की धमकी दी है. हालांकि, ऐसा पहली बार भी नहीं है, जब ईरान ने इस तरह की धमकी दी हो. ऐसे में जलडमरुमध्य की इस अहमियत को देखते हुए इस तेल नस भी कहा जा रहा है. जानकारों का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरुमध्य में किसी तरह की रुकावट आने से वैश्विक ऊर्जा की कीमतें बढ़ जाएगा, शिपिंग कॉस्ट बढ़ेगी और आपूर्ति में देरी हो जाएगी. एक सवाल और उठ रहा है कि क्या इसे ईरान बंद कर सकता है? दरअसल, ईरानी कानून के मुताबिक, वो इसके सबसे संकरे हिस्से पर कंट्रोल करता है, लेकिन इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में कहा गया है कि ईरान को विदेशी जहाजों के रास्ते के राइस्ट की कीमत पर काम करने की इजाजत नहीं है. ये भी पढ़ें: क्या अब अमेरिका से अपना बोरिया-बिस्तर समेट चला जाएगा टिकटॉक? 19 जून तक का है वक्त

Jun 17, 2025 - 16:30
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क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य, जिस पर इजरायल-ईरान तनाव के बीच भारत की बढ़ी चिंता

Strait Of Hormuz: ईरान पर इजरायली हमले के बाद पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ चुका है. ईरान के महत्वपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों पर मिसाइल से गए हमले के बीच पूरी दुनिया में इस वक्त जिस एक चीज की दुनिया भर में जबरदस्त चर्चा हो रही है, वो है होर्मुज जलडमरुमध्य. ईरान-ओमान और यूएई के दक्षिणी हिस्से के बीच यह एक संकीर्ण लेकिन महत्वपूर्ण जलमार्ग है. यह जलडमरुमध्य फ़ारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और फिर अरब सागर से जोड़ती है.

ये भारत से काफी दूर है, लेकिन यहां पर जो कुछ भी होगा उसका सीधा आपके ईंधन बिल से लेकर कारोबार और यहां तक कि शेयर बाजार पर असर देखने को मिलेगा. होर्मुज जमडमरुमध्य सिर्फ 21 माइल यानी करीब 34 किलोमीटर चौड़ा और 161 किलोमीटर लंबा है.

क्या है अहमियत?

होर्मुज जलडमरुमध्य क्रूड ऑयल और गैस दोनों के आयात और निर्यात के लिए काफी अहमियत रखता है. इसके बाद कई महत्वपूर्ण बंदगाह है, जैसे- ईरान का बंदर अब्बास जो एक महत्वपूर्ण नौसैनिक और वाणिज्यिक बंदरगाह है. इसके अलावा, इसके पास यूएई का फुजारिया बंदरगाह है, जो महत्वपूर्ण तेल भंडार और शिपिंग केन्द्र बिन्दु है. ओमान को सोहर बंदराह है, जिसका इस्तेमाल व्यापार और शिपिंग री-रूट के लिए किया जाता है. इसके अलावा, कतर का रास लफ्फान है, जो महत्वपूर्ण एलएजी निर्यात बंदरगाह है.

इस जलडमरूमध्य से दुनिया के तेल के करीब पांचवां हिस्सा यानी 17 मिलियन प्रति बैरल रोजाना इस रूट से गुजरता है. सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, कतर और यूएई जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों का यह महत्वपूर्ण तेल एक्सपोर्ट का रास्ता है. यूएस एनर्जी इनफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक, यहां से गुजरने वाले तेल का करीब 83 प्रतिशत हिस्सा एशियाई बाजार में पहुंचता है.

ईरान की धमकी से क्यों चिंता?

ईरान ने इजरायल से तनाव के बीज इस होर्मुज जलडमरुमध्य को बंद करने की धमकी दी है. हालांकि, ऐसा पहली बार भी नहीं है, जब ईरान ने इस तरह की धमकी दी हो. ऐसे में जलडमरुमध्य की इस अहमियत को देखते हुए इस तेल नस भी कहा जा रहा है. जानकारों का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरुमध्य में किसी तरह की रुकावट आने से वैश्विक ऊर्जा की कीमतें बढ़ जाएगा, शिपिंग कॉस्ट बढ़ेगी और आपूर्ति में देरी हो जाएगी.

एक सवाल और उठ रहा है कि क्या इसे ईरान बंद कर सकता है? दरअसल, ईरानी कानून के मुताबिक, वो इसके सबसे संकरे हिस्से पर कंट्रोल करता है, लेकिन इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में कहा गया है कि ईरान को विदेशी जहाजों के रास्ते के राइस्ट की कीमत पर काम करने की इजाजत नहीं है.

ये भी पढ़ें: क्या अब अमेरिका से अपना बोरिया-बिस्तर समेट चला जाएगा टिकटॉक? 19 जून तक का है वक्त

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