क्या है म्यूचुअल फंड का Total Expense Ratio? यहां समझिए निवेश की ABCD

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय अक्सर निवेशक रिटर्न्स पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन उससे जुड़े खर्चों को नजरअंदाज कर देते हैं. जबकि, यह जानना बेहद जरूरी है कि म्यूचुअल फंड स्कीम को चलाने के लिए फंड हाउस कुछ शुल्क वसूल करता है. इसी शुल्क को Total Expense Ratio (TER) कहा जाता है. क्या होता है Total Expense Ratio? सेबी (SEBI) के म्यूचुअल फंड नियम 1996 के अनुसार, म्यूचुअल फंड कंपनियों को किसी भी स्कीम को मैनेज करने के लिए कुछ संचालन खर्च वसूलने की अनुमति है. इसमें निवेश प्रबंधन शुल्क, मार्केटिंग, एडमिनिस्ट्रेशन, लेन-देन से जुड़े खर्च, कस्टोडियन और ऑडिट फीस जैसी लागतें शामिल होती हैं. यह सभी खर्च मिलाकर फंड की कुल नेट एसेट वैल्यू का एक हिस्सा होते हैं, जिसे ही Total Expense Ratio कहा जाता है. TER कैसे कैलकुलेट किया जाता है? Total Expense Ratio की कैलकुलेशन एक प्रतिशत के रूप में की जाती है. यह प्रतिशत फंड की औसत नेट एसेट वैल्यू (NAV) पर आधारित होता है. इसकी गणना इस फॉर्मूले से की जाती है: TER = (Total Costs Incurred / Total Net Assets) × 100 यहां Total Costs में वे सभी खर्च शामिल होते हैं जो फंड को चलाने में होते हैं और Total Net Assets उस फंड की उस तारीख को कुल बाजार वैल्यू को दिखाते हैं. भारत में TER की प्रकृति “fungible” होती है, यानी एक फंड में खर्च के अलग-अलग हिस्सों पर कोई तय सीमा नहीं होती, लेकिन कुल TER सेबी द्वारा निर्धारित लिमिट के अंदर होनी चाहिए. TER ज्यादा है तो क्या नुकसान? अक्सर यह माना जाता है कि ज्यादा TER यानी कम फायदा, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता. कई बार कोई फंड ज्यादा खर्च के बावजूद अच्छा रिटर्न दे सकता है. वहीं, कुछ फंड्स कम TER के बावजूद औसत प्रदर्शन करते हैं. इसलिए TER को अकेले ना आंकें, बल्कि उसे फंड के कुल रिटर्न और बाकी निवेश मानदंडों के साथ मिलाकर देखें. निवेश करते समय क्या ध्यान रखें? किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले TER की तुलना फंड के रिटर्न, जोखिम स्तर, फंड मैनेजर के ट्रैक रिकॉर्ड और निवेश उद्देश्य से जरूर करें. अगर दो फंड लगभग एक जैसा प्रदर्शन कर रहे हैं, तो कम TER वाला फंड आपके लिए अधिक फायदेमंद हो सकता है क्योंकि वह खर्च कम करता है. ये भी पढ़ें: Gold Price: सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, MCX पर 7000 से ज्यादा गिर गए भाव, क्या अभी खरीदना सही?

May 12, 2025 - 23:30
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क्या है म्यूचुअल फंड का Total Expense Ratio? यहां समझिए निवेश की ABCD

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय अक्सर निवेशक रिटर्न्स पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन उससे जुड़े खर्चों को नजरअंदाज कर देते हैं. जबकि, यह जानना बेहद जरूरी है कि म्यूचुअल फंड स्कीम को चलाने के लिए फंड हाउस कुछ शुल्क वसूल करता है. इसी शुल्क को Total Expense Ratio (TER) कहा जाता है.

क्या होता है Total Expense Ratio?

सेबी (SEBI) के म्यूचुअल फंड नियम 1996 के अनुसार, म्यूचुअल फंड कंपनियों को किसी भी स्कीम को मैनेज करने के लिए कुछ संचालन खर्च वसूलने की अनुमति है. इसमें निवेश प्रबंधन शुल्क, मार्केटिंग, एडमिनिस्ट्रेशन, लेन-देन से जुड़े खर्च, कस्टोडियन और ऑडिट फीस जैसी लागतें शामिल होती हैं. यह सभी खर्च मिलाकर फंड की कुल नेट एसेट वैल्यू का एक हिस्सा होते हैं, जिसे ही Total Expense Ratio कहा जाता है.

TER कैसे कैलकुलेट किया जाता है?

Total Expense Ratio की कैलकुलेशन एक प्रतिशत के रूप में की जाती है. यह प्रतिशत फंड की औसत नेट एसेट वैल्यू (NAV) पर आधारित होता है. इसकी गणना इस फॉर्मूले से की जाती है:

TER = (Total Costs Incurred / Total Net Assets) × 100

यहां Total Costs में वे सभी खर्च शामिल होते हैं जो फंड को चलाने में होते हैं और Total Net Assets उस फंड की उस तारीख को कुल बाजार वैल्यू को दिखाते हैं.

भारत में TER की प्रकृति “fungible” होती है, यानी एक फंड में खर्च के अलग-अलग हिस्सों पर कोई तय सीमा नहीं होती, लेकिन कुल TER सेबी द्वारा निर्धारित लिमिट के अंदर होनी चाहिए.

TER ज्यादा है तो क्या नुकसान?

अक्सर यह माना जाता है कि ज्यादा TER यानी कम फायदा, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता. कई बार कोई फंड ज्यादा खर्च के बावजूद अच्छा रिटर्न दे सकता है. वहीं, कुछ फंड्स कम TER के बावजूद औसत प्रदर्शन करते हैं. इसलिए TER को अकेले ना आंकें, बल्कि उसे फंड के कुल रिटर्न और बाकी निवेश मानदंडों के साथ मिलाकर देखें.

निवेश करते समय क्या ध्यान रखें?

किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले TER की तुलना फंड के रिटर्न, जोखिम स्तर, फंड मैनेजर के ट्रैक रिकॉर्ड और निवेश उद्देश्य से जरूर करें. अगर दो फंड लगभग एक जैसा प्रदर्शन कर रहे हैं, तो कम TER वाला फंड आपके लिए अधिक फायदेमंद हो सकता है क्योंकि वह खर्च कम करता है.

ये भी पढ़ें: Gold Price: सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, MCX पर 7000 से ज्यादा गिर गए भाव, क्या अभी खरीदना सही?

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