क्या इंडोनेशिया को सस्ते और भारत को महंगे राफेल बेच रहा है फ्रांस? समझें इसके पीछे का पूरा गणित

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों मंगलवार (17 फरवरी, 2026) को तीन दिवसीय दौरे के लिए भारत पहुंचे हैं. यहां वह 16 फरवरी से शुरू हुए एआई इंपेक्ट समिट में हिस्सा लेने के लिए आए हैं, लेकिन उनके इस विजिट में उस मेगा डील पर भी मुहर लग सकती है, जिसके तहत 114 राफेल खरीदे जाने हैं. ये राफेल 2030 तक भारतीय सेना को मिलेंगे. भारत 114 राफेल खरीदने के लिए 3.25 लाख करोड़ रुपये खर्च करेगा. कीमत के हिसाब से यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी सैन्य डील मानी जा रही है. हाल ही में इंडोनेशिया ने भी फ्रांस से 42 राफेल जेट खरीदे हैं. साल 2022 में तत्कालीन प्रोबावो सुबियांतो की सरकार ने फ्रेंच एयरोस्पेस कंपनी डसॉल्ट एविशन से डील की थी. इंडोनेशिया ने 8.1 बिलियन डॉलर यानी करीब 68 हजार करोड़ रुपये में 42 राफेल खरीदे थे. इस हिसाब से एक राफेल की कीमत 1,747 करोड़ रुपये बैठती है. वहीं, भारत डील पर 3.25 लाख करोड़ खर्च कर सकता है और उस हिसाब से भारत को एक राफेल विमान 2,850 करोड़ रुपये का पड़ेगा. ऐसे में लोगों के मन ये सवाल उठ रहा है कि क्या फ्रांस भारत को महंगी कीमत पर राफेल बेच रहा है, या भारत को क्यों राफेल एक हजार करोड़ रुपये महंगा पड़ रहा है. क्या है सच्चाई?हकीकत ये है कि भारत एक राफेल विमान के लिए 2,850 रुपये इसलिए दे रहा है क्योंकि वह एयरक्राफ्ट के साथ मेटियोर और स्कैल्प जैसी मिसाइलें, हैमर जैसे प्रिसीजन गाइडेड बॉम्ब, ट्रेनिंग के लिए फुल मिशन सिम्यूलेटर, लंबे समय के लिए मेंटेनेंस और राफेल के स्पेयर पार्ट्स और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को भी खरीद रहा है. ये राफेल विमान की पूरी लाइफ साइकिल कोस्ट है और इस हिसाब से भारत को ये विमान सस्ता पड़ रहा है. भारत में बनेंगे राफेलसाल 2016 में भारत ने 36 राफेल खरीदे थे और पिछले साल राफेल का नेवल वेरिएंट खरीदा गया था. इस हिसाब से वायुसेना के पास 36 और नौसेना के पास एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत के लिए 26 राफेल हैं. ये डील इसलिए भी खास है क्योंकि इस बार 96 राफेल का निर्माण भारत के नागपुर में ही डसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (DRAL) में किया जा सकता है, जबकि 18 राफेल फ्रांस में बनेंगे. फिलहाल जो राफेल विमान भारतीय सेनाओं के पास हैं उनका निर्माण फ्रांस में  ही हुआ था. 2030 से 2035 तक भारत के पास राफेल विमानों की कुल संख्या 176 हो जाएगी.  भारत इतनी बड़ी डील इसलिए करने जा रहा है क्योंकि वायुसेना को जितने लड़ाकू विमानों की जरूरत है, उतने मौजूद नहीं हैं. अभी सिर्फ 29 स्कवाड्रन ही हैं, जबकि 42 स्कवाड्रन की जरूरत है. एक स्कवाड्रन में 16-18 से फाइटर जेट होते हैं.

Feb 17, 2026 - 20:30
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क्या इंडोनेशिया को सस्ते और भारत को महंगे राफेल बेच रहा है फ्रांस? समझें इसके पीछे का पूरा गणित

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों मंगलवार (17 फरवरी, 2026) को तीन दिवसीय दौरे के लिए भारत पहुंचे हैं. यहां वह 16 फरवरी से शुरू हुए एआई इंपेक्ट समिट में हिस्सा लेने के लिए आए हैं, लेकिन उनके इस विजिट में उस मेगा डील पर भी मुहर लग सकती है, जिसके तहत 114 राफेल खरीदे जाने हैं. ये राफेल 2030 तक भारतीय सेना को मिलेंगे.

भारत 114 राफेल खरीदने के लिए 3.25 लाख करोड़ रुपये खर्च करेगा. कीमत के हिसाब से यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी सैन्य डील मानी जा रही है. हाल ही में इंडोनेशिया ने भी फ्रांस से 42 राफेल जेट खरीदे हैं. साल 2022 में तत्कालीन प्रोबावो सुबियांतो की सरकार ने फ्रेंच एयरोस्पेस कंपनी डसॉल्ट एविशन से डील की थी.

इंडोनेशिया ने 8.1 बिलियन डॉलर यानी करीब 68 हजार करोड़ रुपये में 42 राफेल खरीदे थे. इस हिसाब से एक राफेल की कीमत 1,747 करोड़ रुपये बैठती है. वहीं, भारत डील पर 3.25 लाख करोड़ खर्च कर सकता है और उस हिसाब से भारत को एक राफेल विमान 2,850 करोड़ रुपये का पड़ेगा. ऐसे में लोगों के मन ये सवाल उठ रहा है कि क्या फ्रांस भारत को महंगी कीमत पर राफेल बेच रहा है, या भारत को क्यों राफेल एक हजार करोड़ रुपये महंगा पड़ रहा है.

क्या है सच्चाई?
हकीकत ये है कि भारत एक राफेल विमान के लिए 2,850 रुपये इसलिए दे रहा है क्योंकि वह एयरक्राफ्ट के साथ मेटियोर और स्कैल्प जैसी मिसाइलें, हैमर जैसे प्रिसीजन गाइडेड बॉम्ब, ट्रेनिंग के लिए फुल मिशन सिम्यूलेटर, लंबे समय के लिए मेंटेनेंस और राफेल के स्पेयर पार्ट्स और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को भी खरीद रहा है. ये राफेल विमान की पूरी लाइफ साइकिल कोस्ट है और इस हिसाब से भारत को ये विमान सस्ता पड़ रहा है.

भारत में बनेंगे राफेल
साल 2016 में भारत ने 36 राफेल खरीदे थे और पिछले साल राफेल का नेवल वेरिएंट खरीदा गया था. इस हिसाब से वायुसेना के पास 36 और नौसेना के पास एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत के लिए 26 राफेल हैं. ये डील इसलिए भी खास है क्योंकि इस बार 96 राफेल का निर्माण भारत के नागपुर में ही डसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (DRAL) में किया जा सकता है, जबकि 18 राफेल फ्रांस में बनेंगे. फिलहाल जो राफेल विमान भारतीय सेनाओं के पास हैं उनका निर्माण फ्रांस में  ही हुआ था. 2030 से 2035 तक भारत के पास राफेल विमानों की कुल संख्या 176 हो जाएगी. 

भारत इतनी बड़ी डील इसलिए करने जा रहा है क्योंकि वायुसेना को जितने लड़ाकू विमानों की जरूरत है, उतने मौजूद नहीं हैं. अभी सिर्फ 29 स्कवाड्रन ही हैं, जबकि 42 स्कवाड्रन की जरूरत है. एक स्कवाड्रन में 16-18 से फाइटर जेट होते हैं.

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