इधर सीजेपी से बातचीत के लिए तैयार हुई सरकार, उधर खरगे ने मोदी सरकार के सामने रखी ये शर्त
नीट पेपर लीक के मुद्दे पर सड़क से लेकर संसद तक राजनीति गरमाई हुई है. सरकार की तरफ से कहा गया है कि वह NEET के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष नई शर्तें थोपकर सदन रुकावट पैदा कर रहा है. इस बीच राज्य सभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार के सामने शर्त रख दी है. उन्होंने कहा कि हम चर्चा के लिए तभी तैयार होंगे, जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होगा. युवा सडकों पर लाठी खाने पर मजबूर: खरगे मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, 'पीएम मोदी ने ऐसा वातावरण बनाया जिससे युवा सडकों पर लाठी खाने पर मजबूर हुए. अब वह अपने ही सांसदों को विपक्ष की आवाज दबाने के लिए भड़का कर रहे हैं.' संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन गुरुवार (23 जुलाई 2026) को संसद भवन परिसर में नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टकराव देखने को मिला. बीजेपी की यह प्रतिक्रिया लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के उस आरोप के बाद आई, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाने और देश की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद होने देने का आरोप लगाया था. दोनों पक्ष संसद के मकर द्वार के बाहर जमा हुए और एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी की. सरकार छात्रों से बातचीत को तैयार केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार नीट पेपर लीक मुद्दे को लेकर संवेदनशील है और छात्रों के साथ बातचीत कर इसका हल निकालना चाहती है. उन्होंने कहा, 'धीरे-धीरे हम चर्चा करके समाधान की तरफ बढ़ सकते हैं और समाधान से ही नया रास्ता भी निर्धारित हो सकता है. जहां भी आप कहें... चाहे आप जेपी नड्डा के आवास पर कहें या आप कहें ऑफिस में तो वहां चर्चा हो सकती है. हमारे लिए ये प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है.' धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी CJP दूसरी तरफ जंतर-मंतर पर भी सीजेपी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी हुई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक के मामलों में सख्ती दिखाते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया है. इसका मकसद दोषियों को जल्दी और कड़ी सजा दिलाना है. उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इस पर तुरंत काम शुरू करने के निर्देश दिए. इसके थोड़ी देर बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सीजेपी का रिएक्शन आया. राहुल गांधी ने कहा, 'छात्रों की मांगें साफ हैं. धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाएं. छात्रों से माफी मांगें. छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें.' CJP ने कहा, 'धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना होगा.' छात्रों का हित सरकार की प्राथमिकता: राजनाथ सिंह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना पीएम मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा, 'पेपर लीक मामलों में तुरंत सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का पीएम मोदी का निर्णय युवाओं को सशक्त बनाने के प्रति उनके दृढ़ संकल्प और अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है. यह निर्णायक कदम उन लोगों के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा, जो हमारे युवाओं की आकांक्षाओं और भविष्य को खतरे में डालते हैं.' केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, 'विपक्ष से अनुरोध है कि चर्चा करें. विषय का राजनीतिकरण ना करें... भागे नहीं. चर्चा होगी तो इस मुद्दे पर और क्या कड़े नियम बन सकते है उस पर आगे बढ़ा जा सकता है.'
नीट पेपर लीक के मुद्दे पर सड़क से लेकर संसद तक राजनीति गरमाई हुई है. सरकार की तरफ से कहा गया है कि वह NEET के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष नई शर्तें थोपकर सदन रुकावट पैदा कर रहा है. इस बीच राज्य सभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार के सामने शर्त रख दी है. उन्होंने कहा कि हम चर्चा के लिए तभी तैयार होंगे, जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होगा.
युवा सडकों पर लाठी खाने पर मजबूर: खरगे
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, 'पीएम मोदी ने ऐसा वातावरण बनाया जिससे युवा सडकों पर लाठी खाने पर मजबूर हुए. अब वह अपने ही सांसदों को विपक्ष की आवाज दबाने के लिए भड़का कर रहे हैं.' संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन गुरुवार (23 जुलाई 2026) को संसद भवन परिसर में नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टकराव देखने को मिला.
बीजेपी की यह प्रतिक्रिया लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के उस आरोप के बाद आई, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाने और देश की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद होने देने का आरोप लगाया था. दोनों पक्ष संसद के मकर द्वार के बाहर जमा हुए और एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी की.
सरकार छात्रों से बातचीत को तैयार
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार नीट पेपर लीक मुद्दे को लेकर संवेदनशील है और छात्रों के साथ बातचीत कर इसका हल निकालना चाहती है. उन्होंने कहा, 'धीरे-धीरे हम चर्चा करके समाधान की तरफ बढ़ सकते हैं और समाधान से ही नया रास्ता भी निर्धारित हो सकता है. जहां भी आप कहें... चाहे आप जेपी नड्डा के आवास पर कहें या आप कहें ऑफिस में तो वहां चर्चा हो सकती है. हमारे लिए ये प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है.'
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी CJP
दूसरी तरफ जंतर-मंतर पर भी सीजेपी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी हुई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक के मामलों में सख्ती दिखाते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया है. इसका मकसद दोषियों को जल्दी और कड़ी सजा दिलाना है. उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इस पर तुरंत काम शुरू करने के निर्देश दिए. इसके थोड़ी देर बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सीजेपी का रिएक्शन आया. राहुल गांधी ने कहा, 'छात्रों की मांगें साफ हैं. धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाएं. छात्रों से माफी मांगें. छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें.' CJP ने कहा, 'धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना होगा.'
छात्रों का हित सरकार की प्राथमिकता: राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना पीएम मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा, 'पेपर लीक मामलों में तुरंत सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का पीएम मोदी का निर्णय युवाओं को सशक्त बनाने के प्रति उनके दृढ़ संकल्प और अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है. यह निर्णायक कदम उन लोगों के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा, जो हमारे युवाओं की आकांक्षाओं और भविष्य को खतरे में डालते हैं.'
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, 'विपक्ष से अनुरोध है कि चर्चा करें. विषय का राजनीतिकरण ना करें... भागे नहीं. चर्चा होगी तो इस मुद्दे पर और क्या कड़े नियम बन सकते है उस पर आगे बढ़ा जा सकता है.'
What's Your Reaction?