अब सस्ता होकर रहेगा पेट्रोल-डीजल! 80 डॉलर से नीचे आया क्रूड ऑयल
Crude Oil Crash: आज 5 अगस्त 2026 को वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. अमेरिका और ईरान के बीच चल रही राजनयिक बातचीत और होर्मुज (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने के प्रयासों के चलते तेल की कीमतों में आज 5-6% की बड़ी गिरावट आई है. यह बीते तीन सप्ताह में क्रूड का अब तक का सबसे निचला स्तर है. आज ब्रेंट क्रूड गिरकर 79.06 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है. इसमें लगभग 5.9% की गिरावट आई है. वहीं, WTI Crude भी आज लगभग 6.2% की गिरावट के साथ 75.20 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है. भारतीय मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कच्चा तेल आज 7860 रुपये प्रति बैरल के आसपास खुला. इसमें भी पिछले सत्र के मुकाबले 177 रुपये की गिरावट देखी जा रही है. जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि कीमतों में इस गिरावट की बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के दोबारा खुलने की संभावना है. क्यों कीमतों में आई गिरावट? अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट की दी गई जानकारी के मुताबिक, होर्मुज से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर ईरान और ओमान के साथ बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है. इधर, अमेरिका और ईरान के बीच मतभेदों को कम करने और एक स्थायी समझौते पर पहुंचने में मदद करने के लिए कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी एक सक्रिय भूमिका निभाते हुए मध्यस्थता भी कर रहे हैं. उन्हीं के द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने ईरान पर हमले को रोकने और बातचीत का प्रस्ताव रखा गया था, जिसके बाद दोनों देश समझौते के मसौदे साझा कर रहे हैं. ओमान की भी इसमें बड़ी भूमिका है. ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, होर्मुज से जहाजों के सुरक्षित गुजरने के लिए एक अस्थायी रूट के समझौते पर उनकी ओमान के साथ चर्चा हो रही है. भारत पर क्या होगा असर? कच्चे तेल के दाम 79 डॉलर प्रति बैरल के पास आने से भारत को बहुत बड़ा आर्थिक फायदा होगा. इससे भारत का विदेशी मुद्रा खर्च काफी घट जाएगा. कच्चे तेल में प्रति डॉलर की गिरावट से भारत का आयात बिल लगभग 10000 करोड़ तक कम हो जाता है. कच्चा तेल सस्ते में मिलेगा, तो देश में ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स की लागत कम होगी. इससे फल-सब्जियां और अन्य जरूरी सामानों की कीमतें काबू में रहेंगी, जिससे आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी. ऊपर से अगर कच्चे तेल की कीमतें लगातार कुछ हफ्ते तक इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-डीजल की रिटेल कीमतों में भी बड़ी कटौती देखने को मिल सकती है. ये भी पढ़ें: यूं ही नहीं देश में स्थिर हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें, ताजा रेट के साथ जानें मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक
Crude Oil Crash: आज 5 अगस्त 2026 को वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. अमेरिका और ईरान के बीच चल रही राजनयिक बातचीत और होर्मुज (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने के प्रयासों के चलते तेल की कीमतों में आज 5-6% की बड़ी गिरावट आई है. यह बीते तीन सप्ताह में क्रूड का अब तक का सबसे निचला स्तर है.
आज ब्रेंट क्रूड गिरकर 79.06 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है. इसमें लगभग 5.9% की गिरावट आई है. वहीं, WTI Crude भी आज लगभग 6.2% की गिरावट के साथ 75.20 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है. भारतीय मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कच्चा तेल आज 7860 रुपये प्रति बैरल के आसपास खुला. इसमें भी पिछले सत्र के मुकाबले 177 रुपये की गिरावट देखी जा रही है. जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि कीमतों में इस गिरावट की बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के दोबारा खुलने की संभावना है.
क्यों कीमतों में आई गिरावट?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट की दी गई जानकारी के मुताबिक, होर्मुज से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर ईरान और ओमान के साथ बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है.
इधर, अमेरिका और ईरान के बीच मतभेदों को कम करने और एक स्थायी समझौते पर पहुंचने में मदद करने के लिए कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी एक सक्रिय भूमिका निभाते हुए मध्यस्थता भी कर रहे हैं. उन्हीं के द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने ईरान पर हमले को रोकने और बातचीत का प्रस्ताव रखा गया था, जिसके बाद दोनों देश समझौते के मसौदे साझा कर रहे हैं.
ओमान की भी इसमें बड़ी भूमिका है. ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, होर्मुज से जहाजों के सुरक्षित गुजरने के लिए एक अस्थायी रूट के समझौते पर उनकी ओमान के साथ चर्चा हो रही है.
भारत पर क्या होगा असर?
कच्चे तेल के दाम 79 डॉलर प्रति बैरल के पास आने से भारत को बहुत बड़ा आर्थिक फायदा होगा. इससे भारत का विदेशी मुद्रा खर्च काफी घट जाएगा. कच्चे तेल में प्रति डॉलर की गिरावट से भारत का आयात बिल लगभग 10000 करोड़ तक कम हो जाता है. कच्चा तेल सस्ते में मिलेगा, तो देश में ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स की लागत कम होगी. इससे फल-सब्जियां और अन्य जरूरी सामानों की कीमतें काबू में रहेंगी, जिससे आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी.
ऊपर से अगर कच्चे तेल की कीमतें लगातार कुछ हफ्ते तक इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-डीजल की रिटेल कीमतों में भी बड़ी कटौती देखने को मिल सकती है.
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